
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ की राजनीति में यदि कुछ ऐसे नेताओं का नाम लिया जाए, जिन्होंने पद से अधिक जनसेवा और सादगी को अपनी पहचान बनाया, तो उनमें रमेश बैस का नाम अग्रणी पंक्ति में आता है। आज उनके जन्मदिन के अवसर पर केवल शुभकामनाएं देना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि उनके राजनीतिक, सामाजिक और जनसेवा के लंबे सफर का मूल्यांकन भी आवश्यक है।
रायपुर की जनता ने उन्हें लगातार कई बार लोकसभा भेजकर जिस विश्वास की मिसाल कायम की, वह भारतीय लोकतंत्र में एक उल्लेखनीय अध्याय है। सांसद रहते हुए उन्होंने संसद में केवल राष्ट्रीय मुद्दों पर ही नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के विकास, किसानों, युवाओं, उद्योगों, रेलवे, शिक्षा और अधोसंरचना से जुड़े विषयों को भी पूरी मजबूती से उठाया। उनकी राजनीति का केंद्र हमेशा जनता रही, न कि व्यक्तिगत महत्वाकांक्षा।
राजनीतिक जीवन में अनेक महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन करने के बाद उन्हें क्रमशः असम, झारखंड और महाराष्ट्र जैसे तीन महत्वपूर्ण राज्यों का राज्यपाल बनने का अवसर मिला। संवैधानिक पद पर रहते हुए उन्होंने निष्पक्षता, मर्यादा और संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का परिचय दिया।
यही कारण है कि वे केवल भाजपा के नेता भर नहीं, बल्कि एक अनुभवी संवैधानिक व्यक्तित्व के रूप में भी सम्मानित हैं।रमेश बैस की सबसे बड़ी विशेषता यह रही कि उन्होंने कभी भी अपनी जड़ों को नहीं छोड़ा।
देश के सर्वोच्च संवैधानिक पदों पर रहने के बावजूद उनका जुड़ाव छत्तीसगढ़ की मिट्टी, यहां की संस्कृति और यहां के लोगों से बना रहा। जब भी राज्य के हितों की बात आई, उन्होंने खुलकर अपनी चिंता और सुझाव व्यक्त किए।
छत्तीसगढ़िया स्वाभिमान और विकास उनके सार्वजनिक जीवन की स्थायी पहचान रहा है।उनका सार्वजनिक जीवन इस बात का प्रमाण है कि राजनीति केवल सत्ता प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व निभाने का अवसर भी है। सादगी, सहजता, स्पष्टवादिता और ईमानदार सार्वजनिक जीवन ने उन्हें राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के बीच भी सम्मान दिलाया।
आज जब राजनीति में वैचारिक स्थिरता और दीर्घकालिक जनविश्वास का संकट दिखाई देता है, तब रमेश बैस का लंबा सार्वजनिक जीवन नई पीढ़ी के नेताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बनकर सामने आता है। उन्होंने यह सिद्ध किया कि जनता का विश्वास वर्षों की निष्ठा, ईमानदारी और निरंतर जनसंपर्क से अर्जित होता है।उनके जन्मदिन पर पूरा छत्तीसगढ़ उनके स्वस्थ, दीर्घायु और सक्रिय सार्वजनिक जीवन की कामना करता है।
यह अवसर केवल एक वरिष्ठ राजनेता का जन्मदिन नहीं, बल्कि जनसेवा, सादगी, संवैधानिक गरिमा और छत्तीसगढ़ के प्रति समर्पण की उस विरासत को नमन करने का भी है, जिसे रमेश बैस ने अपने लंबे राजनीतिक जीवन में स्थापित किया है।



