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सड़कों पर आवारा मवेशियों के खिलाफ चलेगा संयुक्त अभियान, लापरवाही पर लगेगा जुर्माना,पशु क्रूरता निवारण समिति की बैठक में कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश।

विकास नंद/सर्वव्यापी

कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में जिला पशु क्रूरता निवारण समिति की बैठक आयोजित हुई। बैठक में पशुओं के संरक्षण, उनके प्रति क्रूरता की रोकथाम तथा पशु कल्याण से जुड़े विभिन्न विषयों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में जिला पंचायत सीईओ अनुपमा आनंद, अपर कलेक्टर सचिन भूतड़ा, रवि साहू सहित समिति के सदस्य एवं विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।

कलेक्टर ने उच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप ग्राम पंचायतों और नगरीय निकायों की जिम्मेदारी तय करते हुए मुख्य मार्गों एवं सड़कों पर विचरण कर रहे आवारा मवेशियों को हटाने के लिए संयुक्त अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए मवेशियों पर रेडियम बेल्ट लगाई जाए तथा टैगिंग के माध्यम से उनकी पहचान सुनिश्चित कर पशु मालिकों का पता लगाया जाए।उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए कि पशुओं को खुले में सड़कों पर छोड़ने वाले मालिकों को पहले समझाइश दी जाए। इसके बाद भी लापरवाही बरतने पर नियमानुसार जुर्माना लगाया जाए। अभियान में स्थानीय नागरिकों एवं सामाजिक संस्थाओं की सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया।

कलेक्टर ने जनपद पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों, नगरीय निकायों के मुख्य नगरपालिका अधिकारियों, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण, पशुपालन विभाग, यातायात पुलिस तथा संबंधित विभागों को समन्वय के साथ ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों की सड़कों से आवारा पशुओं को हटाने की प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही पशु क्रूरता की घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई, पशु संरक्षण कानूनों का प्रभावी पालन तथा आमजन में जागरूकता बढ़ाने पर भी बल दिया।

बैठक में पशुपालन विभाग की उप संचालक डॉ. अंजना नायडू ने जानकारी दी कि पशु क्रूरता निवारण अधिनियम, 1960 के तहत अशक्त पशुओं को सड़क पर छोड़ने अथवा उन्हें दुष्प्रेरित करने पर अर्थदंड का प्रावधान है। वर्ष 2025-26 के दौरान जिले में 2,073 पशुओं की टैगिंग, 7,719 आवारा पशुओं का विस्थापन तथा 1 लाख 67 हजार 830 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं 3,028 पशुओं को रेडियम बेल्ट पहनाई गई है।उन्होंने बताया कि जिले में 6 गोधामों के संचालन की स्वीकृति दी गई है। साथ ही आवारा एवं पालतू श्वानों के टीकाकरण, बधियाकरण एवं उपचार का कार्य भी नियमित रूप से किया जा रहा है।

मुख्य नगरपालिका अधिकारी महासमुंद ने तुमाड़बरी में पशु जन्म नियंत्रण केंद्र प्रारंभ किए जाने की जानकारी दी।बैठक में जिले की गौशालाओं, पशु आश्रय स्थलों, पशु चिकित्सा सेवाओं, आवारा एवं निराश्रित पशुओं के प्रबंधन तथा पशु कल्याण से संबंधित गतिविधियों की भी विस्तृत समीक्षा की गई।

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