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“तीन महीने श्री अन्न खाइए, बीमारी दूर भगाइए” – पद्मश्री डॉ. खादर वली ने महासमुंद में किसानों को दिया स्वास्थ्य और समृद्धि का मंत्र।

विकास नंद/सर्वव्यापी

मिलेट्स मैन ऑफ इंडिया ने कहा— कम लागत, कम पानी और अधिक पोषण देने वाली फसल है श्री अन्न, प्राकृतिक खेती अपनाने का किया आह्वानमहासमुंद, 02 अगस्त 2026। जिले में श्री अन्न (मिलेट्स) के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने तथा किसानों एवं आमजन को इसके पोषण और आर्थिक महत्व से जोड़ने के उद्देश्य से रविवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में “स्वास्थ्य और टिकाऊ कृषि के लिए श्री अन्न (मिलेट्स) एक वरदान हैं” विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला एवं संवादात्मक सत्र आयोजित किया गया।

कार्यक्रम का आयोजन छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद, छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड, जिला प्रशासन तथा कृषि विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।कार्यशाला के मुख्य वक्ता देश के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक एवं मिलेट्स मैन ऑफ इंडिया पद्मश्री डॉ. खादर वली रहे। उन्होंने कहा कि श्री अन्न केवल एक फसल नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन, पोषण सुरक्षा और किसानों की समृद्धि का मजबूत आधार है। उन्होंने कहा कि बदलती जीवनशैली, बढ़ती बीमारियों, जल संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों के बीच मिलेट्स भविष्य की सबसे उपयुक्त फसल बनकर उभरा है।

डॉ. खादर वली ने कहा कि वे कर्नाटक के मैसूर से हैं और पिछले 30 वर्षों से श्री अन्न पर लगातार कार्य कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान करते हुए कहा, “तीन महीने तक कोदो, कुटकी और रागी का नियमित सेवन कीजिए, स्वास्थ्य में सकारात्मक बदलाव स्वयं महसूस करेंगे।” उन्होंने पारंपरिक अनाजों को फिर से रसोई का हिस्सा बनाने की अपील करते हुए कहा कि देश को बीमारियों से मुक्त रखना ही उनका उद्देश्य है।उन्होंने बताया कि कोदो, कुटकी, रागी, ज्वार और बाजरा जैसे श्री अन्न फाइबर, प्रोटीन, कैल्शियम, आयरन, जिंक, मैग्नीशियम सहित अनेक सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं। इनके नियमित सेवन से मधुमेह, उच्च रक्तचाप, मोटापा, हृदय रोग और पाचन संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है। साथ ही यह बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए भी अत्यंत लाभकारी है।प्राकृतिक खेती पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि श्री अन्न की खेती कम पानी, कम लागत और सीमित संसाधनों में भी सफलतापूर्वक की जा सकती है।

यह सूखा एवं प्रतिकूल मौसम की परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देती है, जिससे किसानों की लागत घटती है और आय बढ़ती है। उन्होंने किसानों से उत्पादन के साथ-साथ प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन अपनाकर बाजार की बढ़ती मांग का लाभ उठाने का भी आह्वान किया।कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य कृषक कल्याण परिषद के अध्यक्ष सुरेश कुमार चंद्रवंशी ने कहा कि राज्य सरकार मिलेट्स की खेती को लगातार प्रोत्साहित कर रही है।

वहीं छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम लिमिटेड के अध्यक्ष चंद्रहास चंद्राकर ने किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज उपलब्ध कराने तथा उत्पादन की खरीदी सुनिश्चित करने की बात कही।संवादात्मक सत्र में किसानों ने श्री अन्न की खेती, प्राकृतिक कृषि, बीज चयन, जल संरक्षण, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन से जुड़े सवाल पूछे, जिनका डॉ. खादर वली ने विस्तार से उत्तर दिया।

भंवरपुर के किसान संत राम पटेल ने बताया कि वे रागी की खेती कर चुके हैं और लगभग 1,000 क्विंटल रागी का उत्पादन प्राप्त कर चुके हैं। उन्नत कृषक महेंद्र चंद्राकर ने भी अपने अनुभव साझा किए और किसानों को मिलेट्स खेती के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में जिला पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुपमा आनंद, कृषि उप संचालक एफ.आर. कश्यप, जिला स्काउट-गाइड संघ के अध्यक्ष येतराम साहू, जनपद सदस्य विजयलक्ष्मी जांगड़े, सांसद प्रतिनिधि महेंद्र जैन सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को कोदो की खिचड़ी और रागी की खीर परोसी गई। किसानों ने जिले में श्री अन्न के रकबे और उपभोग को बढ़ाने का सामूहिक संकल्प भी लिया।

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