
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में क्यों पढ़ाते हैं, इस विषय पर चल रही चर्चाओं के बीच सहायक शिक्षक/समग्र शिक्षक फेडरेशन, बिलासपुर जिला अध्यक्ष सुनील पांडेय ने कहा है कि यह कहना पूरी तरह सही नहीं होगा कि सभी सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में ही पढ़ाते हैं। आज भी हजारों सरकारी शिक्षक अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में शिक्षा दिला रहे हैं।उन्होंने कहा कि कुछ शिक्षक यदि निजी विद्यालयों का चयन करते हैं, तो उसके पीछे कई व्यक्तिगत और व्यावहारिक कारण हो सकते हैं। इनमें घर के निकट विद्यालय की उपलब्धता, अंग्रेजी माध्यम की प्राथमिकता, विशेष शैक्षणिक एवं सह-पाठ्यक्रम गतिविधियां तथा बच्चों की व्यक्तिगत आवश्यकताएं प्रमुख हैं। इसे सरकारी विद्यालयों की गुणवत्ता से जोड़कर देखना उचित नहीं होगा।सुनील पांडेय ने कहा कि वर्तमान समय में सरकारी विद्यालयों में प्रशिक्षित शिक्षक, निःशुल्क पाठ्यपुस्तकें, मध्यान्ह भोजन, डिजिटल शिक्षा, खेलकूद और विभिन्न नवाचारों के माध्यम से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य संवारा जा रहा है। बोर्ड परीक्षाओं, प्रतियोगी परीक्षाओं तथा अन्य क्षेत्रों में भी सरकारी विद्यालयों के विद्यार्थी लगातार उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि यदि सरकार चाहती है कि समाज का भरोसा सरकारी विद्यालयों पर और अधिक बढ़े, तो विद्यालयों में शिक्षकों के रिक्त पदों को शीघ्र भरा जाए, मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जाए, आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जाएं तथा शिक्षा व्यवस्था को अनावश्यक प्रशासनिक और राजनीतिक दबाव से मुक्त रखा जाए।फेडरेशन जिला अध्यक्ष ने कहा कि सरकारी विद्यालय किसी भी दृष्टि से निजी विद्यालयों से कम नहीं हैं। आवश्यकता केवल उन्हें पर्याप्त संसाधन, बेहतर वातावरण और सतत सहयोग उपलब्ध कराने की है। उनका मानना है कि जब शिक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, तब समाज का विश्वास भी स्वतः सरकारी विद्यालयों की ओर बढ़ेगा।




