तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के गौरेला पेंड्रा मरवाही जिले के समीपस्थ मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल अमरकंटक में नगर पालिका परिषद द्वारा पार्किंग और सेल्फी जोन के नाम पर की जा रही कथित वसूली को लेकर पर्यटकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। छत्तीसगढ़ से बड़ी संख्या में प्रतिदिन अमरकंटक पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का आरोप है कि नगर पालिका परिषद द्वारा ठेके के माध्यम से कई स्थानों पर अलग-अलग शुल्क वसूला जा रहा है, जिससे धार्मिक यात्रा अनावश्यक रूप से महंगी होती जा रही है।
पर्यटकों का कहना है कि अमरकंटक पहुंचने के बाद अलग-अलग स्थानों पर बार-बार पार्किंग शुल्क देना पड़ता है। इसके अलावा कपिल धारा में बनाए गए सेल्फी जोन के नाम पर भी अलग से राशि वसूली जा रही है। श्रद्धालुओं का आरोप है कि प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने और फोटो खिंचवाने जैसी सामान्य गतिविधियों पर भी शुल्क लगाया जाना लोगों की भावनाओं के अनुरूप नहीं है।
सबसे गंभीर आरोप मां नर्मदा मंदिर के समीप स्थित झूला घर प्रवेश द्वार और पार्किंग व्यवस्था को लेकर लगाए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों और पर्यटकों का दावा है कि यहां छत्तीसगढ़ नंबर की गाड़ियों से शुल्क वसूला जा रहा है, जबकि मध्य प्रदेश पंजीयन वाली कई गाड़ियों से कथित रूप से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह व्यवस्था समानता के सिद्धांत पर गंभीर प्रश्न खड़े करती है।वसूली की प्रक्रिया को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। पर्यटकों का कहना है कि जो रसीद उन्हें दी जाती है, उसमें वाहन का पंजीयन क्रमांक दर्ज नहीं होता।
इतना ही नहीं, रसीद पर नगर पालिका परिषद अथवा संबंधित कार्यालय का संपर्क नंबर भी अंकित नहीं रहता। ऐसे में यदि किसी पर्यटक को शिकायत करनी हो या वसूली की वैधता पर सवाल उठाना हो तो उसके पास कोई स्पष्ट माध्यम उपलब्ध नहीं रहता।श्रद्धालुओं का कहना है कि अमरकंटक आस्था का केंद्र होने के साथ-साथ राष्ट्रीय महत्व का पर्यटन स्थल भी है। यहां आने वाले पर्यटक बेहतर सुविधाओं और पारदर्शी व्यवस्था की अपेक्षा रखते हैं, लेकिन यदि हर स्थान पर अलग-अलग शुल्क वसूला जाएगा और उसकी प्रक्रिया भी पारदर्शी नहीं होगी तो इससे प्रदेश की पर्यटन छवि प्रभावित हो सकती है।स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों ने जिला प्रशासन तथा संबंधित विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने यह भी मांग की है कि पार्किंग और अन्य शुल्कों की दरें सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित की जाएं, प्रत्येक रसीद पर वाहन क्रमांक, वसूली केंद्र का नाम, संबंधित कार्यालय का संपर्क नंबर तथा ठेकेदार का विवरण अनिवार्य रूप से अंकित किया जाए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी राज्य के वाहन के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार न हो।
फिलहाल इस पूरे मामले में नगर पालिका परिषद अमरकंटक का आधिकारिक पक्ष सामने आना शेष है। यदि परिषद या संबंधित प्रशासन अपनी प्रतिक्रिया देता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए, ताकि समाचार का सभी पक्ष पाठकों के सामने आ सके।




