
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिलासपुर जिले के कई शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूलों में इन दिनों शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे चल रही है। विभागीय सूत्रों का दावा है कि अनेक व्याख्याता और लेक्चरर एक साथ मेडिकल अवकाश लेकर अमरनाथ यात्रा पर निकल पड़े हैं। इससे कई स्कूलों में पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है और विद्यार्थियों की नियमित कक्षाएं बाधित हो रही हैं।सूत्रों के अनुसार नगर निगम तिफरा जोन क्षेत्र के एक शासकीय हायर सेकेंडरी स्कूल में एक साथ तीन से चार व्याख्याताओं ने मेडिकल अवकाश लिया है। दिलचस्प बात यह बताई जा रही है कि अवकाश लेने के कुछ ही समय बाद ये शिक्षक अमरनाथ यात्रा पर रवाना हो गए। यदि यह दावा सही है तो सवाल यह उठता है कि जिस स्वास्थ्य कारण का हवाला देकर मेडिकल अवकाश लिया गया, उसी दौरान कठिन पर्वतीय यात्रा कैसे संभव हो गई?शिक्षा विभाग के जानकारों का कहना है कि अमरनाथ यात्रा श्रद्धा और आस्था का विषय है, लेकिन यदि कोई कर्मचारी वास्तव में स्वस्थ है और यात्रा करने की स्थिति में है, तो उसे मेडिकल अवकाश के बजाय नियमानुसार अर्जित अवकाश या अन्य वैध अवकाश लेना चाहिए। मेडिकल अवकाश का उद्देश्य बीमारी के दौरान उपचार और स्वास्थ्य लाभ है, न कि पर्यटन या धार्मिक यात्रा।जानकारों का यह भी कहना है कि यदि एक ही विद्यालय से एक साथ कई व्याख्याता मेडिकल अवकाश पर चले जाते हैं, तो सबसे अधिक नुकसान विद्यार्थियों का होता है। विज्ञान, गणित और वाणिज्य जैसे विषयों की पढ़ाई प्रभावित होती है और बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।विभागीय सूत्रों का दावा है कि यह स्थिति केवल एक विद्यालय तक सीमित नहीं है, बल्कि जिले के अन्य कुछ विद्यालयों में भी इसी तरह के मामले सामने आने की चर्चा है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो मेडिकल प्रमाण-पत्र जारी करने की प्रक्रिया और अवकाश स्वीकृत करने वाले अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।अब निगाहें जिला शिक्षा अधिकारी और स्कूल शिक्षा विभाग पर हैं। यदि वास्तव में मेडिकल अवकाश का दुरुपयोग हुआ है तो संबंधित व्याख्याताओं से स्पष्टीकरण लेकर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो और विद्यालयों में शिक्षकों की उपलब्धता बनी रहे।शिक्षा जगत में फिलहाल यही चर्चा है कि “कक्षा में खाली कुर्सियां हैं, लेकिन बाबा बर्फानी के दरबार में हाजिरी पूरी है।” अब देखना यह होगा कि विभाग इन चर्चाओं को केवल अफवाह मानकर अनदेखा करता है या तथ्यों की जांच कर सच्चाई सामने लाता है।


