
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
मित्रता केवल साथ चलने का नाम नहीं है, बल्कि हर परिस्थिति में एक-दूसरे के विश्वास, सम्मान और संबल बनकर खड़े रहने का नाम है। छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर जिले के कोटा-करगीरोड़ निवासी वरिष्ठ पत्रकार एवं ग्लोबल जर्नलिस्ट एंड मीडिया संघ, छत्तीसगढ़ के संस्थापक प्रदेशाध्यक्ष हरीश चौबे तथा सर्वव्यापी के ब्यूरो चीफ रामनारायण यादव ‘नंदू भाई’ की मित्रता इसी आदर्श की जीवंत मिसाल मानी जाती है। पत्रकारिता जगत ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अनेक सामाजिक और बौद्धिक वर्गों में इन दोनों की मित्रता को प्रेमपूर्वक ‘राम–हनुमान की जोड़ी’ कहा जाता है।
मित्रता दिवस के अवसर पर जब समाज विभिन्न प्रेरणादायक मित्रताओं को याद कर रहा है, तब हरीश चौबे और नंदू भाई का नाम भी सम्मान के साथ लिया जा रहा है। वर्षों से दोनों ने पत्रकारिता को केवल पेशा नहीं, बल्कि समाज और लोकतंत्र की सेवा का माध्यम माना है।
सत्य, निष्पक्षता और जनहित के मुद्दों को प्रमुखता से उठाने में दोनों ने हमेशा एक-दूसरे का साथ दिया है।इनकी मित्रता की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह किसी स्वार्थ, पद या व्यक्तिगत लाभ पर आधारित नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, आत्मीयता और वैचारिक समानता पर टिकी हुई है। कठिन परिस्थितियों में भी दोनों एक-दूसरे के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं।
यही कारण है कि पत्रकारों के बीच इनकी मित्रता प्रेरणा का विषय बन चुकी है।सामाजिक सरोकारों, पत्रकार हितों और संगठनात्मक गतिविधियों में भी दोनों की सक्रिय भूमिका लगातार दिखाई देती रही है।
पत्रकारों के अधिकारों की आवाज़ बुलंद करने से लेकर समाज के वंचित वर्गों के मुद्दों को प्रमुखता देने तक, दोनों ने कई अवसरों पर एकजुट होकर कार्य किया है। उनके सहयोग और समन्वय ने अनेक युवा पत्रकारों को भी सकारात्मक दिशा देने का कार्य किया है।
पत्रकारिता के बदलते दौर में, जहां प्रतिस्पर्धा कई बार रिश्तों पर भारी पड़ जाती है, वहां हरीश चौबे और नंदू भाई की मित्रता यह संदेश देती है कि सच्चे संबंध विश्वास, त्याग और सम्मान से मजबूत होते हैं।
यही कारण है कि उनकी जोड़ी को लोग केवल दो मित्रों के रूप में नहीं, बल्कि आदर्श सहयोग और समर्पण के प्रतीक के रूप में देखते हैं।मित्रता दिवस पर प्रदेशभर के पत्रकारों और शुभचिंतकों ने दोनों को शुभकामनाएं देते हुए उनके अटूट संबंध की सराहना की।
सभी ने यही कामना की कि उनकी यह मित्रता आने वाले वर्षों में भी इसी प्रकार समाज, पत्रकारिता और मानवीय मूल्यों को नई ऊर्जा और प्रेरणा देती रहे।सच्ची मित्रता समय की कसौटी पर परखी जाती है। हरीश चौबे और रामनारायण यादव ‘नंदू भाई’ की मित्रता इसी कसौटी पर खरी उतरती दिखाई देती है। विश्वास, सहयोग, समर्पण और आत्मीयता से सजी यह मित्रता आज के समय में न केवल पत्रकारिता जगत, बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरक उदाहरण बन चुकी है।




