
विकास नंद/सर्वव्यापी

लोक शिक्षण संचालनालय, छत्तीसगढ़ द्वारा ऑनलाइन अटेंडेंस के आधार पर वेतन आहरित करने संबंधी जारी निर्देश के बाद शिक्षक संगठनों ने इस पर आपत्ति दर्ज कराई है।
सहायक शिक्षक समग्र शिक्षक फेडरेशन के प्रदेश संगठन मंत्री राजाराम पटेल ने कहा है कि जब तक ऑनलाइन अटेंडेंस प्रणाली में आ रही तकनीकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक शिक्षकों का वेतन रोकना या ऑनलाइन उपस्थिति के आधार पर वेतन में कटौती करना पूरी तरह अनुचित होगा।
लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा 27 जुलाई 2026 को जारी पत्र में सभी संभागीय संयुक्त संचालकों एवं जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि जुलाई 2026 से कर्मचारियों का वेतन ऑनलाइन अटेंडेंस के आधार पर आहरित किया जाए। पत्र के अनुसार केवल उन्हीं दिनों का वेतन देय होगा, जिन दिनों कर्मचारी की ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज होगी।
इस आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए राजाराम पटेल ने कहा कि प्रदेश के अनेक स्कूलों में इंटरनेट नेटवर्क की समस्या, सर्वर डाउन, मोबाइल एप की तकनीकी खामियां तथा ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर कनेक्टिविटी के कारण कई शिक्षक नियमित रूप से ऑनलाइन उपस्थिति दर्ज नहीं कर पा रहे हैं।
ऐसी परिस्थितियों में शिक्षकों की गलती न होने के बावजूद उनके वेतन पर रोक लगाना न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।उन्होंने कहा कि शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय पहुंचकर शिक्षण कार्य कर रहे हैं, लेकिन यदि तकनीकी कारणों से उनकी उपस्थिति ऑनलाइन दर्ज नहीं हो पाती है तो इसका दुष्परिणाम उनके वेतन पर नहीं पड़ना चाहिए।
फेडरेशन की मांग है कि जब तक ऑनलाइन अटेंडेंस प्रणाली पूरी तरह सुचारु और त्रुटिरहित नहीं हो जाती, तब तक पूर्ववत व्यवस्था के अनुसार ही वेतन का भुगतान किया जाए।
प्रदेश संगठन मंत्री राजाराम पटेल ने शासन और लोक शिक्षण संचालनालय से आग्रह किया कि शिक्षकों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस आदेश पर पुनर्विचार किया जाए तथा तकनीकी समस्याओं का समाधान होने तक किसी भी कर्मचारी का वेतन न रोका जाए। उन्होंने कहा कि फेडरेशन शिक्षकों के अधिकारों की रक्षा के लिए शासन स्तर पर अपनी मांग मजबूती से उठाता रहेगा।




