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एआई के दौर में भाषा ही हमारा पहला प्रौद्योगिकी है – बालेंदु शर्मा दाधीच…तकनीक के साथ भाषा का समन्‍वय जरूरी है – कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा हिंदी विश्‍वविद्यालय में हुआ ‘एआई के दौर में हिंदी भाषा’ विषय पर व्‍याख्‍यान।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय, वर्धा महाराष्ट्र के क्षेत्रीय केंद्र, प्रयागराज में आज ‘एआई के दौर में हिंदी भाषा’ विषय पर आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में सूचना प्रौद्योगिकी के अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर के विद्वान, एल्‍गो टेक्‍नॉलॉजी, दुबई के मुख्‍य कार्यकारी अधिकारीबालेंदु शर्मा दाधीच ने कहा कि आने वाले वर्षों में एआई द्वारा लगभग मानव जैसा अनुवाद किए जाने की संभावना है। जनरेटिव AI के आने के बाद भाषा के क्षेत्र में मशीन की क्षमताओं का कायाकल्‍प हुआ है।

भाषा केवल विचारों के आदान-प्रदान का माध्यम नहीं है, बल्कि यह मानव इतिहास और आधुनिक तकनीक का सबसे पहला ‘प्रौद्योगिकी’ है।

यदि दुनिया की भाषाओं को इमारतों की तरह देखा जाए, तो ऊपर से भले ही वे अलग दिखें, लेकिन आधारशिला में वे सब एक दूसरे से जुड़ी हुई हैं।” महान भाषा शास्त्रियों ने कहा है कि गणित और विज्ञान समेत दुनिया का लगभग हर विषय वास्तव में भाषा का ही उप-विषय है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के इस युग में भाषा और प्रौद्योगिकी का संबंध और अधिक गहरा और प्रासंगिक हो गया है। उन्‍होंने कहा कि कुछ अर्थों में भाषा प्रौद्योगिकी है और कुछ अर्थों में प्रौद्योगिकी भाषा है और गणित प्रौद्योगिकी की भाषा है। इस कथन को विस्‍तार से पीपीटी के माध्‍यम से समझाने का प्रयास किया। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने की। उन्होंने कहा कि भाषा सामूहिक कार्यवाही का समन्‍वय करती है।

वर्तमान समय में तकनीक के साथ भाषा का समन्‍वय जरूरी है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि नीति के तहत भारतीय ज्ञान परंपरा, तकनीकी समन्वय और AI के प्रयोग पर विशेष बल दिया गया है। उन्होंने कहा कि AI और मशीन अनुवाद आज के दौर की जरूरतें हैं, लेकिन हमें ध्यान रखना होगा कि हम तकनीक पर पूरी तरह निर्भर होकर अपनी भाषाई व मानवीय क्षमताओं को कमजोर न होने दें। प्रो. शर्मा ने आगे कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा में भाषा हमेशा से केंद्र में रही है चाहे वह वाचिक परंपरा में ही क्यों न हो। भारत सांस्कृतिक रूप से बहुत संपन्न देश है, जिसका संपोषण भाषाएँ ही करती हैं। ऐसे में जब भाषा विलुप्त होती है तो संस्कृति का भी क्षरण होता हैं।

यही कारण है कि शायद राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मातृभाषाओं को बचाने उनके शिक्षण पर बल दिया गया है। AI और भाषा ने मिलकर नई पीढ़ी के लिए भाषाई संस्कृति को समझने का मंच तैयार किया है।

भाषा विद्यापीठ की अधिष्‍ठाता प्रो. प्रीति सागर ने स्‍वागत वक्‍तव्‍य में कहा कि बालेंदु शर्मा दाधीच तकनीक के जादूगर हैं और हिंदी प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में हिंदी का परचम लहरा रहे हैं। केंद्र के अकादमिक निदेशक प्रो. अखिलेश कुमार दुबे ने मुख्‍य अतिथि का परिचय देते हुए कहा कि बालेंदु शर्मा दाधीच माइक्रोसॉफ्ट में निदेशक के पद पर रहे हैं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) तथा भाषा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं। पिछले 25 सालों में उन्होंने 15 से ज़्यादा देशों में अपनी कार्यशालाओं, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, व्याख्यानों आदि के जरिए डेढ़ लाख से अधिक लोगों तक पहुँच बनाई है।

बालेंदु शर्मा दाधीच का स्वागत अकादमिक निदेशक एवं केंद्र के वरिष्‍ठ शिक्षकों द्वारा पुष्पगुच्छ, सूत की माला, स्‍मृति चिह्न तथा अंगवस्त्र प्रदान कर किया।

स्‍त्री अध्‍ययन विभाग की सह-आचार्य डॉ. सुप्रिया पाठक ने धन्‍यवाद ज्ञापित किया। एवं कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन भाषाविज्ञान विभाग की सहायक आचार्य डॉ. विजया सिंह ने किया।

इस अवसर पर स्‍त्री अध्‍ययन विभाग की अध्‍यक्ष डॉ. अवंतिका शुक्‍ला डॉ. आशा मिश्रा, डॉ. अख्‍तर आलम, डॉ. मिथिलेश कुमार तिवारी, डॉ. सत्यवीर, जयेन्‍द्र जायसवाल, सुभाष श्रीवास्‍तव, राहुल त्रिपाठी, रश्मि, प्रत्‍यूष शुक्‍ला,गीता देवी एवं देवमूर्ति द्विवेदी, बिरजू प्रसाद, जगजीवन राम प्रजापति, रोहित कुमार, अभिषेक चंद्रा, पीतांबर गौतम सहित केंद्र के शोधार्थी एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। ऑनलाइन माध्‍यम से भाषाविज्ञान विभाग के अध्‍यक्ष डॉ. एच.ए. हुनगुंद, प्रो. अनिल कुमार पाण्‍डेय सहित अन्‍य शिक्षक उपस्थित रहे।

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