
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
आज 1 नवंबर हे। हमर छत्तीसगढ़ राज के स्थापना के 26वां बरसगांठ मनाय जात हे। ए दिन हर छत्तीसगढ़िया बर गरब, अभिमान अउ आत्मसम्मान के दिन आय। ए माटी म धान के खुशबू हे, जंगल के हरियरपन हे, खदान के अकूत संपदा हे, मेहनतकश किसान के पसीना हे अउ अपन अधिकार बर लड़इया छत्तीसगढ़िया मन के संघर्ष के इतिहास हे।लेकिन आज एक सवाल मन ला भीतर तक झकझोरत हे कि 26 बरस म हमर छत्तीसगढ़ कतका आगू बढ़िस अउ छत्तीसगढ़िया मन के सपना कतका पूरा होइस?राज बनिस त जनता के मन म नवा सपना रहिस। किसान मन सोचे रहिन कि अब अपन राज म अपन भलाई होही, जवान मन सोचे रहिन कि रोजगार मिलही, गरीब मन सोचे रहिन कि सरकारी दफ्तर म ओकर सुनवाई होही अउ आम जनता सोचे रहिस कि अब राजकाज म ओकर सम्मान होही। फेर आज घलो भ्रष्टाचार, कमीशनखोरी, भाई-भतीजावाद, राजनीतिक संरक्षण अउ सरकारी दफ्तर म मनमानी के शिकायत मन जनता के बीच चर्चा के विषय बने रहिथे।छत्तीसगढ़ म डॉ. रमन सिंह के 15 बरस के शासन ला जनता आज घलो ‘चाऊर वाले बाबा’ के नाम ले जानथे। ओखर बाद भूपेश बघेल के पांच बरस के कांग्रेस सरकार आइस, जऊन ला छत्तीसगढ़िया सरकार के रूप म प्रचारित करे गिस। ओखर पहिली अजीत जोगी के नेतृत्व म कांग्रेस सरकार के कार्यकाल रहिस। अउ अब विष्णुदेव साय के नेतृत्व म भाजपा सरकार राजकाज चला रहल हे।सरकार बदलिस, मुख्यमंत्री बदलिन, राजनीतिक नारा बदलिस, सत्ता के चेहरा बदलिस, फेर जनता के मन म उठत भ्रष्टाचार अउ जवाबदेही के सवाल आज घलो बने हवय।आखिर काबर?एक तरफ आईएएस अफसर अपन काम के दम म पहचान बना रहे हें, दूसर तरफ पांच बरस बर चुनके आवइया कुछ जनप्रतिनिधि अपन व्यवहार अउ कामकाज ले जनता के भरोसा गंवावत दिखत हें।ए बात ला नकारे नइ जा सकय कि छत्तीसगढ़ म पदस्थ कई आईएएस अधिकारी अपन जिला अउ संभाग म काम के दम म अलग पहचान बनावत हें। ओमन म बहुत झन छत्तीसगढ़ के बाहिर के रहवइया हो सकथें, फेर छत्तीसगढ़ के विकास, प्रशासनिक व्यवस्था अउ जनता के हित म अपन जिम्मेदारी निभाय के कोशिश करत हें। कोनो अधिकारी के असली पहचान ओकर जनमभूमि नइ, बल्कि ओकर काम, नीयत अउ जनता के प्रति ओकर जवाबदेही आय।एखर उलट जनता के वोट ले विधानसभा पहुंचइया कुछ जनप्रतिनिधि मन के ऊपर आरोप लगथे कि ओमन जनता, कार्यकर्ता अउ अपन क्षेत्र के समस्या ले दूरी बना लेथें। आम आदमी अपन काम बर महीना-महीना चक्कर काटथे, कार्यकर्ता अपन दुख-सुख लेके पहुंचथे, फेर कई बार ओला सम्मानजनक व्यवहार तक नइ मिलय। कुछ जनप्रतिनिधि मन के ऊपर भ्रष्टाचार, मनमानी अउ पद के दुरुपयोग के आरोप लगथे। ए आरोप के निष्पक्ष जांच होय ला चाही, काबर कि जनप्रतिनिधि होय के मतलब जनता के सेवक होना आय, जनता के मालिक बनना नइ।लोकतंत्र म विधायक के कुर्सी पांच बरस बर मिलथे, फेर ओला जनता के भरोसा जीवन भर बर कमाय ला पड़थे। चुनाव जीतना अउ जनता के दिल जीतना दूनों अलग-अलग बात आय। चुनाव के बेरा हाथ जोड़के वोट मांगे वाला मनखे अगर जीत के बाद जनता के फोन तक नइ उठाय, कार्यकर्ता के सम्मान नइ करय अउ अपन क्षेत्र के समस्या ला अनदेखा करय, त ओखर राजनीति के नैतिकता ऊपर सवाल उठना स्वाभाविक हे।आज जरूरत हे कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सरकार केवल घोषणा अउ भाषण तक सीमित नइ रहय। सरकार अपन जनप्रतिनिधि मन के कामकाज, व्यवहार, संपत्ति, प्रशासनिक दखल अउ जनता के शिकायत के निष्पक्ष समीक्षा करय। भ्रष्टाचार के मामला म चाहे कोनो मंत्री होवय, विधायक होवय, अधिकारी होवय या कर्मचारी, जांच के आंच सबो तक पहुंचना चाही।अउ एक बात अउ हे, आईएएस अधिकारी मन के काम के समीक्षा घलो निष्पक्ष होना चाही। अच्छा काम करे वाला अधिकारी के सम्मान होवय अउ गलत काम करे वाला अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई होवय। प्रशासन अउ राजनीति के बीच पारदर्शिता अउ जवाबदेही के मजबूत रिश्ता बनना चाही।छत्तीसगढ़िया अस्मिता केवल धोती-कुर्ता पहिरे, छत्तीसगढ़ी म भाषण देय अउ छत्तीसगढ़िया संस्कृति के नाम लेय ले नइ बचय। छत्तीसगढ़िया अस्मिता त गरीब के सम्मान, किसान के खुशहाली, जवान के रोजगार, महिला के सुरक्षा अउ आम आदमी के न्याय म बसथे।हमर राज के 26 बरस पूरा होवत हे। ए बेरा आत्ममंथन करे के जरूरत हे। अजीत जोगी, डॉ. रमन सिंह, भूपेश बघेल अउ अब विष्णुदेव साय के शासनकाल के उपलब्धि अउ कमी के निष्पक्ष समीक्षा होय। कोनो सरकार दूध के धुल्ला नइ होवय, अउ कोनो सरकार के हर काम गलत घलो नइ होवय। जनता ला राजनीतिक चश्मा नइ, विकास अउ सुशासन के साफ तस्वीर चाही।आज छत्तीसगढ़ के जनता पूछत हे कि आखिर हमर माटी के अकूत संपदा के लाभ हमर गांव, गरीब, किसान अउ नौजवान तक पूरा-पूरा काबर नइ पहुंचत हे? सरकारी योजना के लाभ बर आम आदमी ला दफ्तर के चक्कर काबर काटे पड़थे? जनप्रतिनिधि मन जनता के सेवक के बदले खुद ला मालिक काबर समझे लगथें?याद रखव, छत्तीसगढ़ के जनता भोली जरूर हे, फेर अनजान नइ हे। वो सब देखत हे, समझत हे अउ बखत आवे म अपन फैसला घलो सुनाथे।26 बरस के छत्तीसगढ़ ला अब नवा नारा नइ, नवा नीयत चाही। सत्ता के घमंड नइ, सेवा के भावना चाही। भ्रष्टाचार के संरक्षण नइ, भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कार्रवाई चाही। पद के रौब नइ, जनता के सम्मान चाही।छत्तीसगढ़ के असली विकास ओ दिन मानबो, जब बाहिर ले आए अधिकारी छत्तीसगढ़िया हित म काम करे के मिसाल बनंय, अउ छत्तीसगढ़ के माटी म जनम लेके राजनीति करे वाला जनप्रतिनिधि घलो जनता के सेवा के मिसाल बनंय।काबर कि छत्तीसगढ़ कोनो सरकार, कोनो पार्टी या कोनो नेता के निजी जागीर नइ हे।छत्तीसगढ़ हमर आय, हमर पुरखा मन के धरोहर आय अउ आने वाला पीढ़ी के भविष्य आय।जय जोहार! जय छत्तीसगढ़!




