
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

जिला मुख्यालय सारंगढ़ में प्रवेश करते ही विकास की तस्वीर का वह चेहरा सामने आता है, जिसे देखकर सवाल उठना स्वाभाविक है। प्रवेश द्वार से शहर की ओर आने वाली सड़क पर जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी सड़क, उड़ती धूल और बदहाल यातायात व्यवस्था शहर की वास्तविक स्थिति बयां कर रही है। बरसात का मौसम समाप्त हो चुका है, लेकिन सड़क सुधार की उम्मीद अब भी गड्ढों के बीच फंसी दिखाई दे रही है। जिला मुख्यालय में आने वाले नागरिकों, ग्रामीणों और बाहर से पहुंचने वाले लोगों के लिए यह सड़क सिर्फ आवागमन का रास्ता नहीं, बल्कि जिले की प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पहली तस्वीर भी है।सवाल यह नहीं है कि सड़क खराब क्यों हुई, सवाल यह है कि बरसात खत्म होने के बाद भी इसकी मरम्मत क्यों नहीं हुई? जिला मुख्यालय की सड़कें लंबे समय से लोगों की परेशानी का कारण बनी हुई हैं तो जिम्मेदार विभागों की निगरानी आखिर किस स्तर पर हो रही है? जिला प्रशासन की मुखिया कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू स्वयं निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समय-सीमा को लेकर अधिकारियों को निर्देश देती रही हैं। हाल ही में उन्होंने निर्माणाधीन कलेक्ट्रेट भवन का निरीक्षण कर गुणवत्ता से समझौता नहीं करने तथा नियमित मॉनिटरिंग के निर्देश भी दिए थे। ऐसे में शहर की मुख्य सड़कों की बदहाली यह सवाल खड़ा करती है कि सड़क जैसी रोजमर्रा की बुनियादी समस्या पर प्रशासन की निगरानी कितनी प्रभावी है?शहर में प्रवेश करते ही धूल का गुबार लोगों की परेशानी बढ़ा रहा है। सड़क किनारे रहने वाले नागरिकों और दुकानदारों के लिए धूल अब महज असुविधा नहीं रह गई, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है। दोपहिया वाहन चालकों के लिए गड्ढों से बचकर निकलना चुनौती बना हुआ है, जबकि रात के समय इन स्थानों पर दुर्घटना का खतरा और बढ़ जाता है। सड़क की स्थिति ऐसी हो तो विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर साफ दिखाई देता है।बरसात खत्म, लेकिन गड्ढों का मौसम जारीबरसात के दौरान सड़कों पर गड्ढे होना नई बात नहीं है, लेकिन बरसात बीत जाने के बाद भी यदि मुख्य मार्गों का सुधार नहीं होता तो यह सवाल प्रशासनिक प्राथमिकताओं पर उठना स्वाभाविक है। समय रहते पैचवर्क अथवा आवश्यक मरम्मत हो जाए तो सड़क को और ज्यादा खराब होने से बचाया जा सकता है। लेकिन यहां स्थिति इसके उलट दिखाई दे रही है। गड्ढे बढ़ते जा रहे हैं और उनके साथ नागरिकों की परेशानी भी।जिला मुख्यालय होने के कारण सारंगढ़ में प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण और आम नागरिक सरकारी कार्यालयों के काम से पहुंचते हैं। ऐसे में शहर की प्रवेश सड़क का इस हालत में होना प्रशासन के लिए निश्चित रूप से गंभीर समीक्षा का विषय होना चाहिए।निरीक्षण सिर्फ सरकारी भवनों तक सीमित क्यों?कलेक्टर द्वारा निर्माण कार्यों के निरीक्षण और गुणवत्ता की निगरानी को लेकर सख्ती दिखाई जाती रही है। मई 2026 में भी कलेक्टर ने निर्माणाधीन कलेक्ट्रेट, जिला अस्पताल और जिला पंचायत भवन सहित विभिन्न निर्माण कार्यों का निरीक्षण कर समय-सीमा और गुणवत्ता पर जोर दिया था। लेकिन आम नागरिकों का सवाल है कि जिस शहर में ये सरकारी भवन खड़े हो रहे हैं, उन तक पहुंचने वाली सड़कें कब सुधरेंगी? प्रशासनिक भवनों की गुणवत्ता जितनी महत्वपूर्ण है, उतनी ही महत्वपूर्ण वहां तक पहुंचने वाली सड़क भी है। आखिर विकास की इमारत तक पहुंचने वाला रास्ता ही यदि बदहाल रहे तो विकास की तस्वीर अधूरी नहीं मानी जाएगी?जिम्मेदार विभागों पर निगरानी की जरूरतसड़क निर्माण और मरम्मत से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी तय करना प्रशासन का काम है। यदि बजट उपलब्ध है तो काम में देरी क्यों? यदि तकनीकी या प्रशासनिक अड़चन है तो उसका समाधान कब होगा? और यदि सड़क मरम्मत की प्रक्रिया ही शुरू नहीं हुई है तो इसकी वजह क्या है?इन सवालों का जवाब अब सिर्फ कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाले सुधार के रूप में चाहिए।सारंगढ़ के नागरिकों को आश्वासन नहीं, बेहतर सड़क चाहिए। उन्हें निरीक्षण की तस्वीरें नहीं, बल्कि गड्ढों से मुक्त सड़क चाहिए। उन्हें धूल के गुबार नहीं, सुरक्षित और सुगम आवागमन चाहिए।कलेक्टर से सीधा सवाल—कब बदलेगी शहर की तस्वीर?जिला प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी जिले में नागरिक सुविधाओं की स्थिति पर नजर रखना है। ऐसे में कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू से यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि जिला मुख्यालय के प्रवेश मार्ग से लेकर शहर के भीतर तक यदि सड़कें गड्ढों और धूल से जूझ रही हैं, तो जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित निर्माण एजेंसियों की जवाबदेही कब तय होगी?क्या सड़क की स्थिति का उच्चस्तरीय निरीक्षण होगा?क्या जिम्मेदार विभागों से समयबद्ध सुधार की कार्ययोजना मांगी जाएगी?क्या खराब सड़कों का चिन्हांकन कर तत्काल मरम्मत कराई जाएगी?और सबसे अहम—क्या प्रशासन जनता को यह बताएगा कि इन सड़कों के सुधार की निश्चित समय-सीमा क्या है?सारंगढ़ अब नए जिले के रूप में अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में जिला मुख्यालय की सड़कों की बदहाली उस विकास यात्रा पर सवालिया निशान लगाने का काम कर रही है। कलेक्ट्रेट भवन की गुणवत्ता की साप्ताहिक रिपोर्ट मांगी जा सकती है तो शहर की सड़कों की हालत की भी साप्ताहिक समीक्षा क्यों नहीं?फिलहाल शहरवासियों की नजर प्रशासन पर है। **गड्ढों से भरी सड़कें सिर्फ सड़क विभाग की समस्या नहीं, बल्कि जिला प्रशासन की जवाबदेही की कसौटी भी हैं। अब देखना यह है कि कलेक्टर कार्यालय से निकलने वाले आदेशों की गूंज सड़क तक कब पहुंचती है और सारंगढ़ की बदहाल सड़कें कब राहत की सांस लेती हैं।**




