
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
2016 बैच के आईएएस अधिकारी विनय कुमार लंगेह महासमुंद जिले में लगभग तीन वर्षों से प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालते हुए जिले को बेहतर बनाने की दिशा में लगातार प्रयासरत हैं। किसी भी जिले की प्रशासनिक व्यवस्था का मूल्यांकन केवल योजनाओं की घोषणा या बैठकों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से किया जाना चाहिए कि सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ आम नागरिक तक कितनी प्रभावी तरीके से पहुंच रहा है। इसी कसौटी पर महासमुंद में लंगेह के कार्यकाल को देखने पर प्रशासनिक सक्रियता, योजनाओं की निगरानी और स्थानीय समस्याओं के समाधान को लेकर उनकी कार्यशैली चर्चा में आती है।महासमुंद जैसे जिले में प्रशासन चलाना आसान जिम्मेदारी नहीं है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों की अलग-अलग जरूरतें, कृषि आधारित अर्थव्यवस्था, सड़क, पेयजल, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, राजस्व और कानून-व्यवस्था से जुड़े विषय जिला प्रशासन के सामने लगातार चुनौती बने रहते हैं। ऐसे में कलेक्टर की भूमिका केवल सरकारी आदेशों को लागू करने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर विकास की प्राथमिकताएं तय करने और अधिकारियों को जवाबदेह बनाने की भी होती है।विनय कुमार लंगेह के कार्यकाल की समीक्षा इसी व्यापक दृष्टिकोण से की जानी चाहिए। प्रशासनिक नेतृत्व की सबसे बड़ी परीक्षा यह होती है कि योजनाएं कागज से निकलकर गांवों और कस्बों तक कितनी पहुंचती हैं। यदि किसी अधिकारी की कार्यशैली में नियमित समीक्षा, अधिकारियों से जवाबदेही, मैदानी निरीक्षण और नागरिकों की समस्याओं को सुनने की प्रवृत्ति दिखाई देती है, तो उसका असर प्रशासनिक व्यवस्था में दिखाई देना स्वाभाविक है। महासमुंद में भी जिला प्रशासन की गतिविधियों को इसी दृष्टि से देखा जा रहा है।तीन वर्षों का कार्यकाल किसी अधिकारी के लिए इतना लंबा अवश्य होता है कि उसके काम का प्रारंभिक मूल्यांकन किया जा सके। इस अवधि में अधिकारी के सामने तत्काल समस्याओं के साथ-साथ दीर्घकालीन विकास की दिशा तय करने की चुनौती भी रहती है। इसलिए लहंगे के कार्यकाल का सकारात्मक पक्ष यह माना जा सकता है कि उन्होंने जिले की प्रशासनिक व्यवस्था को निरंतर सक्रिय बनाए रखने और विकास कार्यों की गति पर ध्यान केंद्रित करने का प्रयास किया है।हालांकि किसी भी अधिकारी की प्रशंसा तभी सार्थक मानी जानी चाहिए, जब उसके साथ निष्पक्ष समीक्षा भी हो। महासमुंद की वास्तविक तस्वीर जानने के लिए यह देखना जरूरी है कि दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में योजनाओं की स्थिति क्या है, सरकारी अस्पतालों में सेवाएं कैसी हैं, स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता कितनी सुधरी है, किसानों और आम नागरिकों की राजस्व संबंधी समस्याओं का निराकरण कितनी तेजी से हो रहा है तथा विकास कार्यों की गुणवत्ता पर प्रशासन की निगरानी कितनी प्रभावी है। इन सवालों के जवाब ही किसी प्रशासनिक कार्यकाल की वास्तविक सफलता तय करेंगे।एक मजबूत जिला प्रशासन वह होता है जहां अधिकारी केवल फाइलों पर निर्णय नहीं लेते, बल्कि मैदानी वास्तविकताओं को समझते हैं। आम आदमी को कार्यालयों के चक्कर कम लगाने पड़ें, शिकायतों का समयबद्ध निराकरण हो, योजनाओं में पारदर्शिता रहे और विकास कार्यों की गुणवत्ता से समझौता न हो—यही सुशासन की असली पहचान है। यदि महासमुंद प्रशासन इन बिंदुओं पर लगातार आगे बढ़ता है तो निश्चित रूप से इसका श्रेय प्रशासनिक नेतृत्व को भी जाता है।विनय कुमार लंगेह के तीन वर्ष के कार्यकाल को इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है कि प्रशासनिक निरंतरता किसी जिले के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। बार-बार अधिकारियों के तबादले से जहां योजनाओं की प्राथमिकताएं बदलती हैं, वहीं पर्याप्त समय मिलने पर अधिकारी किसी क्षेत्र की समस्याओं को गहराई से समझकर दीर्घकालीन समाधान की दिशा में काम कर सकते हैं। महासमुंद को भी ऐसी ही निरंतरता की जरूरत है।लेकिन अब तीन वर्ष पूरे होने के बाद अपेक्षाएं भी बढ़ गई हैं। जनता यह देखना चाहेगी कि जिन विकास योजनाओं की नींव रखी गई है, उनका ठोस परिणाम आने वाले समय में कितना दिखाई देता है। प्रशासन को भ्रष्टाचार, लापरवाही और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में होने वाली अनियमितताओं के प्रति और अधिक कठोर रुख अपनाने की आवश्यकता है। जिला प्रशासन की सफलता तभी मानी जाएगी जब व्यवस्था में अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को भी यह महसूस हो कि सरकार उसके दरवाजे तक पहुंच रही है।कुल मिलाकर महासमुंद में विनय कुमार लंगेह का लगभग तीन वर्ष का कार्यकाल प्रशासनिक निरंतरता और विकासोन्मुख सोच के संदर्भ में समीक्षा योग्य है। एक अधिकारी की असली पहचान उसके प्रचार से नहीं, बल्कि उसके कार्यों के स्थायी प्रभाव से होती है। यदि आने वाले समय में प्रशासन पारदर्शिता, जवाबदेही, जनसुनवाई और गुणवत्तापूर्ण विकास को और मजबूत करता है तो महासमुंद को बेहतर जिले के रूप में विकसित करने की दिशा में यह कार्यकाल एक महत्वपूर्ण अध्याय साबित हो सकता है। अब चुनौती यही है कि प्रशासनिक सक्रियता को परिणामों में बदला जाए और विकास की रोशनी जिले के अंतिम गांव और अंतिम नागरिक तक पहुंचाई जाए।




