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स्कूल शिक्षा विभाग में कथित वसूली पर गंभीर सवाल,व्हाट्सऐप चैट सामने आने के बाद भी कार्रवाई नहीं, मुख्य सचिव और सीएम टू पीएस तक शिकायत।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ में मंत्रियों के आदेश और संरक्षण के बिना ओएसडी स्तर पर स्थानांतरण सहित अन्य विभागीय कार्यों के नाम पर कथित अवैध वसूली का खेल कैसे संभव है? यह सवाल अब गंभीर रूप से उठने लगा है। सर्वव्यापी के पास उपलब्ध व्हाट्सऐप चैट और बातचीत से संबंधित अधिकारियों के नाम पर कथित तौर पर कितनी-कितनी रकम की मांग अथवा लेन-देन की चर्चा हुई, इसकी जानकारी सामने आई है।बताया जाता है कि इन चैट और उपलब्ध सामग्री को स्वयं मुख्य सचिव विकास शील तथा मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह के संज्ञान में दिया गया है। इसके बावजूद, अब तक संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध किसी स्पष्ट कार्रवाई या जांच की सार्वजनिक जानकारी सामने नहीं आई है।मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि यदि स्थानांतरण अथवा अन्य विभागीय कार्यों के लिए पैसे के लेन-देन से संबंधित चैट वास्तविक और प्रमाणिक हैं, तो इसकी निष्पक्ष जांच से न केवल संबंधित अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट हो सकती है, बल्कि यह भी पता लगाया जा सकता है कि कथित वसूली किसी व्यक्तिगत स्तर पर हो रही थी या इसके पीछे किसी प्रभावशाली व्यक्ति अथवा राजनीतिक संरक्षण की भूमिका थी।सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि सरकार के शीर्ष अधिकारियों के समक्ष कथित वसूली से जुड़े व्हाट्सऐप चैट और अन्य सामग्री प्रस्तुत की जा चुकी है, तो फिर जांच और कार्रवाई में देरी क्यों?मामले में यह भी स्पष्ट किया जाना जरूरी है कि संबंधित ओएसडी अथवा अन्य अधिकारियों को स्थानांतरण और विभागीय कार्यों के संबंध में किस स्तर से अधिकार अथवा निर्देश प्राप्त थे। यदि किसी मंत्री, जनप्रतिनिधि या अन्य प्रभावशाली व्यक्ति का नाम इन चैट में सामने आता है, तो उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि किए बिना उसे दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन ऐसे उल्लेखों की निष्पक्ष जांच होना भी उतना ही आवश्यक है।सवाल अधिकारियों से भी है और सरकार से भी— यदि प्रस्तुत चैट प्रथमदृष्टया गंभीर हैं, तो जांच क्यों नहीं? और यदि चैट फर्जी अथवा भ्रामक हैं, तो इसकी जांच कराकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं की जाती?सरकार की पारदर्शिता और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठ रहे सवालों का जवाब मौन से नहीं, बल्कि निष्पक्ष जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई से ही मिल सकता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि मुख्य सचिव विकास शील और मुख्यमंत्री सचिवालय के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह इस पूरे मामले में क्या कदम उठाते हैं।

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