
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
नए शिक्षा सत्र की शुरुआत के साथ ही गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में शिक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने की कवायद तेज होती दिखाई दे रही है। जिला शिक्षा अधिकारी रजनीश तिवारी ने पदभार संभालने के बाद बीते लगभग एक माह के भीतर जिले के प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल एवं हायर सेकंडरी विद्यालयों का लगातार औचक निरीक्षण कर शिक्षा विभाग में सक्रियता का संदेश दिया है। उनके निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य केवल विद्यालयों में उपस्थिति दर्ज करना नहीं, बल्कि शैक्षणिक गुणवत्ता, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता, शिक्षकों की कार्यशैली, मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, विद्यालयों की साफ-सफाई तथा शासन की विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन की वास्तविक स्थिति का आकलन करना रहा।जानकारी के अनुसार डीईओ रजनीश तिवारी ने जिले के दूरस्थ और ग्रामीण अंचलों के विद्यालयों तक पहुंचकर कक्षाओं का निरीक्षण किया। उन्होंने बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी पढ़ाई का स्तर परखा, शिक्षकों से पाठ्यक्रम की प्रगति की जानकारी ली तथा विद्यालयों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की भी समीक्षा की। निरीक्षण के दौरान जहां व्यवस्थाएं संतोषजनक मिलीं, वहां शिक्षकों और विद्यालय प्रबंधन की सराहना की गई, वहीं कमियां मिलने पर संबंधित अधिकारियों और शिक्षकों को आवश्यक सुधार के निर्देश भी दिए गए।विशेष रूप से मध्यान्ह भोजन योजना पर भी जिला शिक्षा अधिकारी का ध्यान केंद्रित रहा। उन्होंने भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, निर्धारित मेन्यू का पालन, खाद्यान्न के रख-रखाव तथा बच्चों को समय पर भोजन उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया कि शासन की इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण ढंग से मिले और किसी प्रकार की लापरवाही न हो।सूत्रों के अनुसार निरीक्षण के दौरान कई विद्यालयों में विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति, शिक्षकों की समयबद्धता, पुस्तक वितरण, गणवेश, छात्रवृत्ति, प्रयोगशालाओं की स्थिति, पुस्तकालय संचालन तथा खेल गतिविधियों की भी समीक्षा की गई। जिला शिक्षा अधिकारी ने स्पष्ट किया कि विद्यालय केवल भवन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ही उनकी पहचान है और इसी दिशा में सभी शिक्षकों को पूरी निष्ठा से कार्य करना होगा।शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का मानना है कि लंबे समय बाद जिले में इस प्रकार लगातार हो रहे औचक निरीक्षणों से शिक्षकों एवं विद्यालय प्रबंधन में जवाबदेही की भावना बढ़ी है। इससे विद्यालयों में अनुशासन और शैक्षणिक वातावरण को भी मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों के अभिभावकों ने भी विद्यालयों में वरिष्ठ अधिकारियों की नियमित मौजूदगी को सकारात्मक पहल बताया है।हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि केवल निरीक्षण पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि निरीक्षण में सामने आने वाली कमियों का समयबद्ध निराकरण, शिक्षकों को आवश्यक संसाधन, प्रशिक्षण तथा नियमित मॉनिटरिंग भी उतनी ही आवश्यक है। यदि यह अभियान पूरे शैक्षणिक सत्र में इसी गंभीरता से जारी रहता है, तो जिले में शिक्षा की गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिल सकता है।जिले में नए शिक्षा सत्र के साथ शुरू हुई यह सक्रियता निश्चित रूप से शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने की पहल मानी जा रही है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निरीक्षणों के दौरान दिए गए निर्देशों का पालन कितना प्रभावी ढंग से होता है और इसका सीधा लाभ विद्यार्थियों की शिक्षा एवं विद्यालयों की कार्यप्रणाली पर किस रूप में दिखाई देता है।




