तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
प्रदेश की सत्ता के गलियारों में इन दिनों एक मंत्री की ओएसडी नियुक्ति को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। मामला केवल किसी कर्मचारी को ओएसडी बनाए जाने तक सीमित नहीं है, बल्कि नियुक्ति के पीछे के संबंधों और प्रशासनिक प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।चर्चा है कि संबंधित मंत्री ने अपने ही पड़ोस में रहने वाले एक कर्मचारी को अपना विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी (ओएसडी) बना रखा है। हैरानी की बात यह बताई जा रही है कि संबंधित व्यक्ति न तो डिप्टी कलेक्टर है और न ही संयुक्त कलेक्टर, बल्कि वह किसी दूसरे विभाग का कर्मचारी है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर मंत्री को अपने पड़ोसी पर इतनी विशेष मेहरबानी क्यों है?क्या प्रशासनिक अनुभव, योग्यता और विभागीय पात्रता से ज्यादा व्यक्तिगत नजदीकियां महत्वपूर्ण हो गई हैं? क्या मंत्री की निजी पसंद ही ओएसडी नियुक्ति का आधार बन गई है? यदि संबंधित कर्मचारी दूसरे विभाग में पदस्थ है, तो उसे मंत्री के कार्यालय में ओएसडी की जिम्मेदारी किस प्रक्रिया और किन नियमों के तहत दी गई है?स्मृति ईरानी तक पहुंची शिकायत, फिर भी कार्रवाई का इंतजार!इस पूरे मामले को लेकर शिकायत छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी तक पहुंचने की चर्चा है। ऐसे में राजनीतिक गलियारों में यह सवाल भी उठ रहा है कि शिकायत शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचने के बावजूद संबंधित नियुक्ति को लेकर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं हुई? आखिर मंत्री की इस नियुक्ति पर संगठन और सरकार का रुख क्या है?भाजपा का सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेह प्रशासन का दावा अपनी जगह है, लेकिन जब सत्ता में बैठे जिम्मेदार लोगों की नियुक्तियों पर ही सवाल उठने लगें, तो सरकार और संगठन दोनों की जिम्मेदारी बनती है कि तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करें।अब इन सवालों का जवाब कौन देगा?संबंधित कर्मचारी को ओएसडी बनाने का आदेश किस नियम के तहत जारी हुआ?क्या नियुक्ति के लिए निर्धारित प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया गया?दूसरे विभाग के कर्मचारी को मंत्री के कार्यालय में ओएसडी की जिम्मेदारी देने की अनुमति किसने दी?क्या संबंधित कर्मचारी की योग्यता और सेवा शर्तों की जांच की गई?शिकायत भाजपा प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी तक पहुंची है, तो संगठन ने इस पर क्या संज्ञान लिया?फिलहाल इस मामले में संबंधित मंत्री, ओएसडी और शासन का आधिकारिक पक्ष सामने आना बाकी है।सत्ता में पद जिम्मेदारी से मिलना चाहिए या पड़ोस और व्यक्तिगत नजदीकियों के आधार पर? यह सवाल अब केवल एक मंत्री की नियुक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रदेश की प्रशासनिक पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही से भी जुड़ गया है। यदि नियुक्ति नियमानुसार है तो सरकार को दस्तावेजों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और यदि प्रक्रिया में कोई अनियमितता है तो उसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।




