
विकास नंद/सर्वव्यापी
ग्रामीण महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बिहान योजना महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। महासमुंद जिले के बसना विकासखंड अंतर्गत ग्राम पुरुषोत्तमपुर की कुन्ती निषाद ने बिहान से जुड़कर अपनी मेहनत और हुनर को आजीविका का माध्यम बनाया। कृषि मजदूरी के साथ टेंट हाउस, कैटरिंग, मछली पालन और पशुपालन जैसी गतिविधियों से जुड़कर उन्होंने परिवार की वार्षिक आय को मजबूत किया और लखपति दीदी बनने की दिशा में कदम बढ़ाया।कुन्ती निषाद सरस्वती महिला स्व-सहायता समूह से जुड़ी हैं। समूह में कुल 10 सदस्य हैं। समूह को रिवॉल्विंग फंड (आरएफ) के रूप में 15 हजार रुपये तथा कम्युनिटी इन्वेस्टमेंट फंड (सीआईएफ) के रूप में 60 हजार रुपये की राशि प्राप्त हुई है। वहीं बैंक लिंकेज के माध्यम से समूह को तीसरी किस्त में 3 लाख रुपये का ऋण भी मिला। समूह की अध्यक्ष मानकी सिदार और सचिव चन्द्रिका साहू के मार्गदर्शन में महिलाएं विभिन्न आजीविका गतिविधियों से जुड़कर आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ रही हैं।कुन्ती निषाद बताती हैं कि समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने कृषि कार्य के साथ टेंट हाउस और कैटरिंग का व्यवसाय शुरू किया। इसके साथ मछली पालन और पशुपालन से भी अतिरिक्त आय प्राप्त होने लगी। वर्तमान में कृषि कार्य से लगभग 1 लाख 75 हजार रुपये तथा टेंट हाउस एवं कैटरिंग से लगभग 1 लाख 14 हजार रुपये की वार्षिक आय प्राप्त हो रही है। इस तरह परिवार की कुल वार्षिक आय लगभग 2 लाख 89 हजार रुपये तक पहुंच गई है।
व्यवसाय बढ़ा तो समूह ने खरीदा ट्रैक्टर
टेंट हाउस के व्यवसाय के विस्तार के साथ सामान को लाने-ले जाने के लिए परिवहन की आवश्यकता महसूस हुई। इसे देखते हुए समूह ने प्रस्ताव पारित कर 2.50 लाख रुपये में पुराना ट्रैक्टर खरीदा। ट्रैक्टर मिलने से टेंट सामग्री के परिवहन में सुविधा हुई और व्यवसाय को आगे बढ़ाने के साथ आय के नए अवसर भी बने।कुन्ती निषाद का कहना है कि बिहान योजना से जुड़ने के बाद उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में काफी सुधार हुआ है। समूह के माध्यम से उन्हें आगे बढ़ने का अवसर मिला। टेंट हाउस, कैटरिंग और मछली पालन जैसी गतिविधियों ने आमदनी बढ़ाने में मदद की है। उन्होंने बिहान योजना के माध्यम से मिले अवसरों के लिए शासन के प्रति आभार व्यक्त किया।




