
नूर मोहम्मद ,जिला ब्यूरो चीफ, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही(सर्वव्यापी)
TET परीक्षा को लेकर प्रदेश के शिक्षकों का आक्रोश अब खुलकर सामने आ गया है। छत्तीसगढ़ प्रदेश शिक्षक फेडरेशन ने साफ कर दिया है कि शिक्षकों के सेवाकाल, सेवाशर्त और सेवा सुरक्षा से जुड़े इस मुद्दे पर अब चुप्पी नहीं साधी जाएगी। संगठन शासन के सामने कानूनी तथ्यों और दस्तावेजों के साथ अपना पक्ष रखने के साथ ही जरूरत पड़ने पर प्रदेशव्यापी संघर्ष का रास्ता भी अपनाने की तैयारी में है।फेडरेशन के संगठन सचिव आलोक शुक्ला ने पूरे मामले में बेहद मुखर रुख अपनाते हुए कहा कि यह महज TET परीक्षा का विवाद नहीं, बल्कि प्रदेश के हजारों शिक्षकों के भविष्य और सेवा अधिकारों से जुड़ा गंभीर प्रश्न है। संगठन का कहना है कि मामले का समाधान तथ्यों और नियमों के आधार पर होना चाहिए।
CS से DPI तक पहुंचेगा शिक्षकों का प्रतिवेदन
फेडरेशन के प्रांताध्यक्ष राजेश चटर्जी एवं संगठन सचिव आलोक शुक्ला के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल मुख्य सचिव, शिक्षा सचिव एवं DPI के समक्ष विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करेगा। फेडरेशन ने सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 एवं 29 मई 2026 के आदेशों, RTE एक्ट-2009, 2017 के प्रावधानों, NCTE के दिशा-निर्देशों तथा भर्ती-पदोन्नति नियमों का अध्ययन कर अपना पक्ष तैयार किया है।
“कानून भी चलेगा, संघर्ष भी”
आलोक शुक्ला ने स्पष्ट किया कि संगठन इस लड़ाई को केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं रखेगा। जरूरत पड़ी तो कानूनी मोर्चे के साथ सड़क पर भी शिक्षकों की ताकत दिखाई जाएगी। फेडरेशन की रणनीति साफ है-पहले शासन के समक्ष मजबूत कानूनी और तथ्यात्मक पक्ष, समाधान नहीं हुआ तो प्रदेशव्यापी शिक्षक एकजुटता।
“हमारा अस्तित्व-हमारा स्वाभिमान” बना संघर्ष का नारा
फेडरेशन ने शिक्षकों से आह्वान किया है कि वे अपने अधिकारों और सेवा सुरक्षा के सवाल पर एकजुट हों। संगठन का कहना है कि प्रदेश में शासकीय सेवकों की सबसे बड़ी संख्या शिक्षकों की है और किसी भी बड़े जनआंदोलन में शिक्षकों की भूमिका निर्णायक होती है।फेडरेशन ने प्रदेश के शिक्षकों को स्पष्ट संदेश दिया है—“उठो, जागो और संघर्ष करो।” TET के मुद्दे पर अब आने वाले दिनों में शासन और शिक्षक संगठन के बीच टकराव और तेज होने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं।




