
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक गलियारों में एक बार फिर संभावित कलेक्टरों के फेरबदल को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में सरकार कुछ जिलों की प्रशासनिक कमान में बदलाव कर सकती है। इस संभावित फेरबदल में वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों के साथ-साथ ऐसे प्रमोटी आईएएस अधिकारियों के नाम भी चर्चा में हैं, जिन्हें पूर्व में जिला कलेक्टर के रूप में काम करने का अनुभव रहा है।सबसे अधिक चर्चा छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के आयुक्त अवनीश शरण को लेकर है। प्रशासनिक हलकों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि उन्हें एक बार फिर जिला कलेक्टर की जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है। रायपुर, महासमुंद और रायगढ़ जैसे जिलों में उनकी संभावित पदस्थापना को लेकर चर्चाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, अभी तक इस संबंध में शासन स्तर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।अवनीश शरण को यदि कलेक्टरी दी जाती है तो यह प्रशासनिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण पदस्थापना मानी जाएगी। गृह निर्माण मंडल जैसे बड़े संस्थान में जिम्मेदारी संभालने के बाद मैदानी प्रशासन में उनकी वापसी को लेकर प्रशासनिक गलियारों में अलग-अलग तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। वहीं मार्कफेड एमडी जितेंद्र शुक्ला का नाम भी रायपुर, बिलासपुर कलेक्टर के रुप में लिया जा रहा है। अंतिम निर्णय मुख्यमंत्री सचिवालय और सामान्य प्रशासन विभाग के स्तर पर होने की संभावना है।इधर, संभावित फेरबदल में उन प्रमोटी आईएएस अधिकारियों को भी कलेक्टर बनाए जाने की चर्चा है, जिन्हें पहले किसी जिले में कलेक्टर के रूप में काम करने का अवसर मिल चुका है। प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए ऐसे अधिकारियों को फिर से मैदानी जिम्मेदारी दिए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।जांजगीर-चांपा, बालोद और बेमेतरा सहित बस्तर संभाग के कुछ जिलों में भी कलेक्टरों की संभावित पदस्थापना को लेकर प्रशासनिक हलकों में चर्चाएं हैं। खास बात यह है कि सरकार यदि अनुभवी अधिकारियों को मैदानी जिम्मेदारी देने की रणनीति अपनाती है, तो आने वाला फेरबदल केवल सामान्य तबादला सूची न होकर प्रशासनिक कार्यशैली को मजबूत करने की कवायद के रूप में भी देखा जा सकता है।हालांकि प्रशासनिक फेरबदल को लेकर चल रही चर्चाओं में कई नाम अलग-अलग स्तर पर सामने आ रहे हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अंतिम सूची में किन अधिकारियों को स्थान मिलता है और किन जिलों की कमान किसे सौंपी जाती है। सामान्य तौर पर कलेक्टरों की पदस्थापना में प्रशासनिक अनुभव, जिले की परिस्थितियों को संभालने की क्षमता और शासन की प्राथमिकताओं के अनुरूप कार्य करने की क्षमता जैसे पहलुओं को महत्वपूर्ण माना जाता है।राज्य में आगामी दिनों में यदि बड़ा प्रशासनिक फेरबदल होता है तो इसका असर मंत्रालय से लेकर जिलों तक दिखाई देगा। फिलहाल अधिकारी अपने-अपने स्तर पर संभावित पदस्थापनाओं को लेकर आकलन में जुटे हैं और प्रशासनिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि किसे मिलेगी कलेक्टरी और किसकी मौजूदा कुर्सी रहेगी बरकरार।हालांकि, समाचार में उल्लेखित सभी संभावित पदस्थापनाएं फिलहाल प्रशासनिक चर्चाओं और कयासों पर आधारित हैं। आधिकारिक आदेश जारी होने के बाद ही इनकी पुष्टि हो सकेगी।



