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43 पन्नों की जांच रिपोर्ट पर अब भी खामोशी क्यों? मुख्यमंत्री सचिवालय की चिट्ठी से फिर गरमाया मरवाही वनमंडल मामला… सीएम सचिवालय ने वन विभाग से मांगा जवाब.. आखिर पूरे मामले पर क्यों उठ रहें सवाल.. पढ़ें पूरी खबर।

नूर मोहम्मद,जिला ब्यूरो चीफ,(सर्वव्यापी)

मरवाही वनमंडल में कथित वित्तीयअनियमितताओं से जुड़ी वर्ष 2023 की विभागीय जांच रिपोर्ट एक बार फिर सुर्खियों में है। इस पूरे मामले में छत्तीसगढ़िया एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष तरुण कौशिक की पहल ने नया मोड़ ला दिया है। उनके द्वारा मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, वन मंत्री तथा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को भेजे गए विस्तृत ज्ञापन के बाद मुख्यमंत्री सचिवालय ने स्वयं संज्ञान लेते हुए वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग से नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई कर जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश जारी किए हैं। दस्तावेजों के अनुसार, 16 जुलाई 2026 को छत्तीसगढ़िया एकता मंच ने एक विस्तृत ज्ञापन सौंपकर बताया कि मरवाही वनमंडल में विभिन्न योजनाओं के क्रियान्वयन के दौरान कथित आर्थिक अनियमितताओं, शासकीय राशि के दुरुपयोग तथा वित्तीय गड़बड़ियों की जांच वर्ष 2023 में पूरी हो चुकी थी। जांच समिति ने 43 पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार की थी, जिसमें लगभग 388 पृष्ठों के दस्तावेजी साक्ष्य संलग्न बताए गए हैं। इसके बावजूद आज तक संबंधित पूर्व एवं वर्तमान अधिकारियों के विरुद्ध कोई प्रभावी विभागीय अथवा कानूनी कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि जांच पूरी होने के बाद मंत्री स्तर तक नोटशीट चलने के बावजूद कार्रवाई का अभाव शासन की पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

मंच ने मांग की है कि यदि जांच रिपोर्ट में लगाए गए आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए गए हैं तो संबंधित अधिकारियों के विरुद्ध छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियमों सहित लागू कानूनी प्रावधानों के तहत तत्काल विभागीय एवं वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

मुख्यमंत्री सचिवालय का पत्र बना अहम दस्तावेज

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू मुख्यमंत्री सचिवालय का 23 जुलाई 2026 का पत्र है। मुख्यमंत्री सचिवालय के अवर सचिव द्वारा वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के सचिव को भेजे गए पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि छत्तीसगढ़िया एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष तरुण कौशिक द्वारा प्रस्तुत आवेदन विभाग से संबंधित होने के कारण अग्रेषित किया जा रहा है। पत्र में निर्देश दिए गए हैं कि प्रकरण में नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई की जाए, आवेदक तथा मुख्यमंत्री सचिवालय को अवगत कराया जाए और जनदर्शन पोर्टल पर भी इसका इंद्राज किया जाए।यह पत्र इस बात का संकेत माना जा रहा है कि मामला अब केवल एक संगठन की शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मुख्यमंत्री सचिवालय के स्तर पर भी इसे औपचारिक रूप से संबंधित विभाग को परीक्षण एवं कार्रवाई के लिए भेजा जा चुका है।

तरुण कौशिक ने उठाए जवाबदेही के सवाल

छत्तीसगढ़िया एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष तरुण कौशिक ने अपने ज्ञापन में सवाल उठाया है कि यदि विभागीय जांच में गंभीर तथ्य सामने आए थे तो तीन वर्ष बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। उनका कहना है कि दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं होने से शासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं और जनता के बीच गलत संदेश जा रहा है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष समीक्षा कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग दोहराई है।

अब निगाहें वन विभाग पर

मुख्यमंत्री सचिवालय के निर्देश के बाद अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग इस मामले में क्या निर्णय लेता है। क्या वर्ष 2023 की जांच रिपोर्ट पर आखिरकार कार्रवाई होगी, या फिर यह मामला भी फाइलों में ही दबा रह जाएगा? मरवाही वनमंडल से जुड़े इस बहुचर्चित प्रकरण में अब सभी की नजर शासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।

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