
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

स्कूली बच्चों के कंधों पर बढ़ते बस्ते के बोझ को लेकर अब शिक्षा विभाग ने गंभीरता दिखाई है। सीएम हेल्पलाइन 1076 में दर्ज शिकायत के बाद विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय बिल्हा ने विकासखंड के सभी शासकीय एवं अशासकीय स्कूलों के संस्था प्रमुखों और प्रबंधकों को बच्चों के स्कूल बैग का वजन नियंत्रित करने के संबंध में कड़े निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने स्पष्ट किया है कि बच्चों के स्वास्थ्य और सुगम शिक्षण को ध्यान में रखते हुए शासन द्वारा निर्धारित गाइडलाइन का अनिवार्य रूप से पालन कराया जाए।विकासखंड शिक्षा अधिकारी बिल्हा भूपेंद्र कौशिक द्वारा 18 अगस्त 2026 को जारी आदेश में बताया गया है कि सीएम हेल्पलाइन 1076 में दर्ज शिकायत के माध्यम से स्कूली बच्चों के बस्तों में किताबों के अत्यधिक वजन का मुद्दा सामने आया था। शिकायत में कहा गया कि भारी बस्तों के कारण बच्चों की शारीरिक सेहत के साथ-साथ उनके पठन-पाठन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसे गंभीरता से लेते हुए विभाग ने सभी स्कूलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए हैं।निर्देश के अनुसार स्कूलों में समय-सारणी इस प्रकार तैयार की जाए कि विद्यार्थियों को प्रतिदिन सभी विषयों की पुस्तकें एक साथ बस्ते में लेकर स्कूल न आना पड़े। विद्यार्थियों को केवल आवश्यकता के अनुसार ही पुस्तकें लाने के लिए कहा जाए, ताकि उनके बस्ते का अनावश्यक वजन कम किया जा सके।शिक्षा विभाग ने भारत सरकार की स्कूल बैग नीति 2020 के तहत निर्धारित 10 प्रतिशत वजन के नियम का भी कड़ाई से पालन करने को कहा है। यानी विद्यार्थी की आयु और शरीर के वजन को ध्यान में रखते हुए स्कूल बैग का वजन निर्धारित सीमा के भीतर रखा जाना चाहिए। विभाग ने स्कूल प्रबंधन को यह भी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि किताबें बच्चों के व्यक्तित्व विकास और शिक्षा का माध्यम बनें, न कि उनके लिए ऐसा बोझ बन जाए जिससे उनमें पढ़ाई के प्रति अरुचि पैदा हो।इसके साथ ही प्रत्येक विद्यालय परिसर में डिजिटल वजन मशीन उपलब्ध कराने और समय-समय पर विद्यार्थियों के स्कूल बैग का वजन करने के निर्देश दिए गए हैं। इससे यह निगरानी की जा सकेगी कि बच्चों के बस्ते निर्धारित मानकों से अधिक भारी तो नहीं हैं। विभाग ने नियमित अंतराल पर बैग के वजन की जांच करने पर भी जोर दिया है।विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने शासकीय एवं अशासकीय सहित अनुदान प्राप्त उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, हाई स्कूल, पूर्व माध्यमिक विद्यालय और प्राथमिक विद्यालयों के संस्था प्रमुखों एवं प्रबंधकों को निर्देशों का प्राथमिकता के आधार पर पालन सुनिश्चित करने कहा है। आदेश में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि निर्देशों के पालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या उदासीनता पाए जाने पर संबंधित संस्था या प्रबंधक स्वयं जिम्मेदार होंगे।आदेश की प्रतिलिपि बिलासपुर कलेक्टर, संयुक्त संचालक लोक शिक्षण संभाग बिलासपुर तथा जिला शिक्षा अधिकारी बिलासपुर को भी सूचनार्थ भेजी गई है। इसके अलावा सहायक विकासखंड शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड स्रोत समन्वयकों, संकुल प्राचार्यों और शैक्षिक समन्वयकों को भी निर्देशों के पालन और निगरानी के लिए आदेशित किया गया है।अब देखने वाली बात यह होगी कि कागजों में जारी यह निर्देश स्कूलों में वास्तव में कितना प्रभावी ढंग से लागू होता है। बच्चों के कंधों से बस्ते का बोझ कम करने के लिए केवल आदेश जारी करना पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि स्कूल स्तर पर नियमित निगरानी और नियमों के वास्तविक पालन की भी आवश्यकता होगी।



