भागवत प्रसाद, ब्यूरो चीफ सर्वव्यापी
सरकारी व्यवस्था में शिकायतों के निराकरण का दावा कितना प्रभावी है, इसकी हकीकत बिलासपुर नगर निगम के जोन क्रमांक-02 तिफरा में सामने आती दिखाई दे रही है। यहां स्ट्रीट लाइट लगाने की मांग को लेकर सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायत के बाद कथित तौर पर सिर्फ एक स्ट्रीट लाइट लगाकर औपचारिकता निभा दी गई, जबकि आज भी दर्जनों स्ट्रीट लाइट बंद होने की बात सामने आ रही है। हैरानी की बात यह है कि समस्या किसी दूरस्थ इलाके की नहीं, बल्कि जोन कार्यालय के सामने वाली गली की है, जहां पत्रकार तरुण कौशिक का घर भी स्थित है।जानकारी के अनुसार, क्षेत्र में लंबे समय से स्ट्रीट लाइट बंद होने के कारण रात के समय अंधेरे की समस्या बनी हुई है। स्थानीय स्तर पर इस परेशानी का समाधान नहीं होने पर पत्रकार तरुण कौशिक ने स्वयं सीएम हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई थी। उम्मीद थी कि शिकायत के बाद संबंधित अधिकारी मौके की वास्तविक स्थिति का जायजा लेंगे और पूरी गली में बंद पड़ी स्ट्रीट लाइटों को चालू कराने के लिए ठोस कार्रवाई करेंगे। लेकिन शिकायत के बाद केवल एक लाइट लगाए जाने की बात सामने आई है। शेष लाइटों की स्थिति जस की तस बने रहने से शिकायत के निराकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं।जब जोन कार्यालय के सामने ही अंधेरा, तो दूसरे इलाकों का क्या होगा?नगर निगम के जिस जोन कार्यालय पर क्षेत्र की मूलभूत नागरिक सुविधाओं की जिम्मेदारी है, उसके सामने की गली में ही स्ट्रीट लाइटों का बंद रहना व्यवस्था की निगरानी पर सवाल खड़े करता है। यदि कार्यालय के आसपास की समस्या का भी समुचित समाधान नहीं हो पा रहा है, तो शहर के दूसरे हिस्सों में नागरिक सुविधाओं की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।स्ट्रीट लाइट केवल रोशनी का साधन नहीं, बल्कि रात में आम नागरिकों की सुरक्षा और सुरक्षित आवागमन से भी जुड़ी सुविधा है। गलियों में अंधेरा रहने से राहगीरों, महिलाओं, बुजुर्गों और अन्य स्थानीय निवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। ऐसे में शिकायत मिलने के बाद केवल एक लाइट लगाकर शेष समस्या को अनदेखा करना, यदि यही वास्तविक स्थिति है, तो इसे प्रभावी समाधान नहीं कहा जा सकता।कागजों में निराकरण या धरातल पर समाधान?सीएम हेल्पलाइन का उद्देश्य नागरिकों की समस्याओं को संबंधित विभागों तक पहुंचाना और उनका समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करना है। लेकिन यदि किसी शिकायत के बाद समस्या का केवल आंशिक समाधान होता है और बाकी परेशानी बनी रहती है, तो शिकायत निराकरण की प्रक्रिया की प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि शिकायत के आधार पर क्या पूरे प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण किया गया था? क्या बंद पड़ी अन्य स्ट्रीट लाइटों की जानकारी ली गई? यदि शिकायत का निराकरण दर्ज किया गया है, तो क्या मौके पर वास्तविक स्थिति का सत्यापन भी किया गया?इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए, ताकि स्पष्ट हो सके कि शिकायत पर कार्रवाई केवल कागजी प्रक्रिया तक सीमित रही या नागरिकों की समस्या का स्थायी समाधान करने का प्रयास भी किया गया।नगर निगम अधिकारियों से जवाबदेही की अपेक्षाजोन क्रमांक-02 तिफरा के संबंधित अधिकारियों को चाहिए कि वे मौके का निरीक्षण कर बंद पड़ी सभी स्ट्रीट लाइटों की वास्तविक संख्या का पता लगाएं और उन्हें जल्द चालू कराने की व्यवस्था करें। साथ ही, सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज शिकायत के निराकरण की स्थिति की भी समीक्षा की जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत मिली है या नहीं।पत्रकार तरुण कौशिक की शिकायत से जुड़ा यह मामला नगर निगम की शिकायत निवारण व्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है—क्या शिकायत का उद्देश्य सिर्फ उसे निराकृत दर्ज करना है, या नागरिक की समस्या को वास्तव में दूर करना भी है?अब देखना यह होगा कि नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले को गंभीरता से लेते हुए अंधेरे में डूबी गली को रोशन करने के लिए ठोस कदम उठाते हैं या फिर यहां के निवासियों को बंद स्ट्रीट लाइटों के बीच ही इंतजार करना पड़ेगा।



