
विकास नंद/ सर्वव्यापी
दिव्यांगजनों को आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में गुरुवार को महासमुंद कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में छत्तीसगढ़ दिव्यांगजन वित्त एवं विकास निगम की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में कलेक्टर विनय कुमार लंगेह, प्रबंध संचालक डॉ. पंकज वर्मा, समाज कल्याण विभाग की उप संचालक संगीता सिंह सहित बड़ी संख्या में दिव्यांगजन शामिल हुए।कार्यक्रम की शुरुआत दिव्यांगजनों को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित करने के साथ हुई। इस दौरान दिव्यांगजनों द्वारा तैयार हस्तनिर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
बैठक को संबोधित करते हुए निगम के अध्यक्ष लोकेश कावड़िया ने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि निगम के माध्यम से रियायती ब्याज दर पर स्वरोजगार ऋण, समय पर ऋण चुकाने पर ब्याज सब्सिडी तथा कौशल विकास प्रशिक्षण जैसी कई योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। उन्होंने दिव्यांगजनों से इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेकर अपना रोजगार स्थापित करने का आह्वान किया।
प्रबंध संचालक डॉ. पंकज वर्मा ने बताया कि 40 प्रतिशत या उससे अधिक दिव्यांगता वाले पात्र हितग्राहियों को आवश्यकता के अनुसार 10 लाख रुपये तक का ऋण उपलब्ध कराया जाता है। साथ ही समय पर ऋण चुकाने पर ब्याज सब्सिडी का लाभ भी मिलता है। उन्होंने कौशल विकास प्रशिक्षण, विशिष्ट उद्यमी मित्र और विशिष्ट प्रशिक्षण मित्र जैसी योजनाओं की भी जानकारी दी।
कलेक्टर विनय कुमार लंगेह ने कहा कि जिला प्रशासन दिव्यांगजनों के सर्वांगीण विकास और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पात्र हितग्राहियों तक योजनाओं का लाभ समयबद्ध तरीके से पहुंचाया जाए तथा अधिक से अधिक दिव्यांगजनों को स्वरोजगार से जोड़ा जाए।उप संचालक समाज कल्याण संगीता सिंह ने विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी देते हुए आवेदन प्रक्रिया समझाई और हितग्राहियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया।
बैठक में बताया गया कि महासमुंद जिले में अब तक 218 दिव्यांगजनों को लगभग 6 करोड़ 80 लाख रुपये का ऋण उपलब्ध कराया जा चुका है। इससे अनेक हितग्राहियों ने अपना व्यवसाय शुरू कर आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की है। कार्यक्रम के अंत में दिव्यांगजनों ने अपने अनुभव साझा करते हुए शासन की योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।




