
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

बिलासपुर संभाग अंर्तगत गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले के जनपद पंचायत मरवाही अंतर्गत ग्राम पंचायत सेखवा में सरकारी राशि के भुगतान को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पंचायत व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सामने आए बिल के अनुसार “साहू हार्डवेयर कोटमी” के नाम से जारी बिल में सेव और बूंदी की खरीद दर्शाई गई है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि हार्डवेयर दुकान से खाद्य सामग्री की बिक्री कैसे हुई और यदि हुई भी, तो उसका भुगतान बिना GST बिल के किस आधार पर कर दिया गया?बिल में 60 किलो सेव और 48 किलो बूंदी की खरीद दर्शाई गई है, जिसकी कुल राशि 20,640 रुपये अंकित है। इस भुगतान पर अब पंचायत के वित्तीय प्रबंधन और लेखा प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि यदि हार्डवेयर व्यवसायी ने खाद्य सामग्री बेची है तो संबंधित व्यापारिक अनुमति, GST और कर संबंधी नियमों का पालन क्यों नहीं किया गया। वहीं यदि बिल में दर्ज जानकारी वास्तविक नहीं है, तो यह सरकारी राशि के दुरुपयोग और फर्जी भुगतान का मामला भी हो सकता है।
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि क्या जनपद पंचायत मरवाही और संबंधित अधिकारियों ने इस मामले की जांच कराई? यदि शिकायत हुई थी तो सरपंच और सचिव के विरुद्ध अब तक क्या कार्रवाई की गई? यदि कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो उसके पीछे क्या कारण हैं?
यह मामला केवल एक बिल का नहीं, बल्कि पंचायतों में सरकारी धन के उपयोग की पारदर्शिता और जवाबदेही का भी है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अनियमितता हुई है तो निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि सरकारी धन का सही उपयोग सुनिश्चित हो सके।



