
विकास नंद/सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ आदिवासी, स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा एवं औषधि पादप बोर्ड (वन विभाग) ने महासमुंद वनमंडल के सहयोग से पहली बार जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन का आयोजन वन विद्यालय, महासमुंद में किया। सम्मेलन का उद्देश्य पारंपरिक स्वास्थ्य परंपरा का संरक्षण, वैद्यों को शासन की योजनाओं से जोड़ना तथा औषधीय पौधों के संरक्षण को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम की शुरुआत वृक्षारोपण से हुई। बोर्ड के अध्यक्ष विकास मरकाम ने लाल चंदन, उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने लक्ष्मी तरु तथा मुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव ने रीठा का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन के साथ सम्मेलन का शुभारंभ हुआ।
प्रदेश के सभी 33 जिलों में होंगे वैद्य सम्मेलन
अध्यक्ष विकास मरकाम ने कहा कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी समाज और पारंपरिक वैद्यों ने वर्षों से स्थानीय स्वास्थ्य परंपरा, उपचार पद्धति और औषधीय ज्ञान को संरक्षित रखा है।
इसी विरासत को आगे बढ़ाने के लिए प्रदेश के सभी 33 जिलों में जिला स्तरीय वैद्य सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे।उन्होंने बताया कि वर्ष 2026 में क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया (QCI) के माध्यम से राज्य के 660 पारंपरिक वैद्यों का प्रमाणन कराया जाएगा। प्रत्येक जिले से लगभग 20 वैद्यों का चयन कर उन्हें प्रमाण-पत्र दिलाने की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
वैद्यों को मिलेंगी कई योजनाओं का लाभमुख्य कार्यपालन अधिकारी जे.ए.सी.एस. राव ने बताया कि बोर्ड द्वारा औषधीय पौधों की खेती, विनाश-विहीन विदोहन तकनीक का प्रशिक्षण, हीलर हर्बल गार्डन योजना, स्कूलों में हर्बल गार्डन की स्थापना तथा समूहों को निःशुल्क पल्वराइजर मशीन उपलब्ध कराने जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं। इन योजनाओं से वैद्यों को तकनीकी और आर्थिक सहयोग प्रदान किया जा रहा है।
पारंपरिक ज्ञान और समस्याओं पर हुई चर्चा
सम्मेलन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए पारंपरिक वैद्यों ने जड़ी-बूटियों से उपचार के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने औषधीय पौधों के संग्रहण के लिए वन क्षेत्रों में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने की मांग भी रखी।इस पर उपाध्यक्ष अंजय शुक्ला ने वन अधिकारियों से वैद्यों की समस्याओं के समाधान का आग्रह किया।
वनमंडलाधिकारी मयंक पांडे ने आश्वासन दिया कि नियमानुसार अनुमति लेकर वन क्षेत्रों में जाने वाले वैद्यों को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।कार्यक्रम के अंत में सम्मेलन में शामिल वैद्यों और वन प्रबंधन समितियों के सदस्यों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।
इस अवसर पर संयुक्त वनमंडलाधिकारी डिम्पी बैस, उपवनमंडलाधिकारी गोविंद सिंह, परिक्षेत्र अधिकारी सियाराम करमाकर, वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी, जिले के लगभग 50 पारंपरिक वैद्य तथा वन प्रबंधन समितियों के 200 से अधिक सदस्य उपस्थित रहे।




