
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ में सड़कों की बदहाली अब केवल गड्ढों और टूटे रास्तों की कहानी नहीं रह गई है, बल्कि यह सरकार की जवाबदेही और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठता गंभीर सवाल बन चुकी है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि अब सवाल विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ता पक्ष के भीतर से उठने लगे हैं।जब सरकार के ही मंत्री जनता के बीच जाकर यह कहने को मजबूर हों कि सड़कों की हालत से उन्हें शर्मिंदगी महसूस हो रही है, तो यह स्थिति किसी भी सरकार के लिए आत्मचिंतन का विषय होनी चाहिए। आखिर वह कौन-सी परिस्थिति है कि विकास के दावे करने वाली सरकार में सड़क जैसे बुनियादी मुद्दे पर मंत्री खुद असहाय नजर आ रहे हैं?लोक निर्माण विभाग के मंत्री और उप मुख्यमंत्री अरुण साव के सामने यह सबसे बड़ी चुनौती है। विभागीय सचिव मुकेश बंसल की प्रशासनिक निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की ओर से इस गंभीर विषय पर कड़े फैसले और त्वरित हस्तक्षेप की जनता को प्रतीक्षा है।भाजपा के कुछ मंत्री और वरिष्ठ नेता अब यह कहने लगे हैं कि छत्तीसगढ़ में सड़कों की ऐसी दुर्दशा पूर्ववर्ती डॉ. रमन सिंह सरकार के कार्यकाल में देखने को नहीं मिली। यह टिप्पणी केवल राजनीतिक बयान नहीं, बल्कि वर्तमान व्यवस्था के लिए एक आईना है। क्योंकि सड़कें किसी भी सरकार के विकास मॉडल की पहली पहचान होती हैं।कृषि मंत्री रामविचार नेताम द्वारा भी सड़कों की स्थिति को लेकर अधिकारियों को फटकार लगाना बताता है कि समस्या की गंभीरता सरकार के अंदर तक महसूस की जा रही है। जब अलग-अलग विभागों के मंत्री ही सड़क व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर करने लगें, तो यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आखिर जवाबदेही तय क्यों नहीं हो रही?बिलासपुर लोकसभा क्षेत्र की स्थिति भी सरकार के लिए चिंता का विषय बनती जा रही है। जिस क्षेत्र से लोक निर्माण मंत्री अरुण साव का राजनीतिक संबंध रहा है और जहां से केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू सांसद हैं, वहां की सड़कों की बदहाली जनता के बीच बड़ा मुद्दा बन रही है। सड़क पर चलना कई स्थानों पर सुविधा नहीं बल्कि जोखिम बन चुका है।जनता को केवल सड़क नहीं चाहिए, जनता को जवाब चाहिए। आखिर हर बारिश के बाद सड़कें क्यों टूट जाती हैं? करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी सड़कें कुछ महीनों में क्यों जवाब दे देती हैं? क्या ठेकेदारों, अधिकारियों और निगरानी व्यवस्था की जिम्मेदारी तय होगी?सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं होतीं, वे सरकार के कामकाज की तस्वीर होती हैं। आज छत्तीसगढ़ की सड़कें उस तस्वीर को दिखा रही हैं, जिस पर सरकार को गंभीर चिंतन करने की जरूरत है। क्योंकि सवाल केवल गड्ढों का नहीं है, सवाल भरोसे का है। और जब जनता का भरोसा सड़कों पर डगमगाने लगे, तो सरकारों को अपनी राह सुधारनी पड़ती है।



