
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
शहर में स्मार्ट सिटी मिशन के तहत तैयार की गई करोड़ों रुपये की परियोजनाओं को लंबे समय तक उपयोगी बनाए रखने के लिए अब उनके निर्माण के बाद की व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड की बोर्ड बैठक में परियोजनाओं के संचालन, रखरखाव, जिम्मेदारियों के निर्धारण और भविष्य में उनकी उपयोगिता को लेकर विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया।इसके तहत स्मार्ट सिटी की प्रत्येक परियोजना के लिए अलग स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने की दिशा में काम किया जाएगा। इस SOP में यह तय किया जाएगा कि संबंधित परियोजना का संचालन किस तरीके से होगा, रखरखाव की जिम्मेदारी किसकी होगी, मानव संसाधन की भूमिका क्या होगी और परियोजना को लंबे समय तक प्रभावी बनाए रखने के लिए किन व्यवस्थाओं की जरूरत होगी।अब परियोजनाओं के रखरखाव पर भी नजरनगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा की अध्यक्षता में हुई बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की 20वीं बैठक में निर्माणाधीन और पूर्ण हो चुकी परियोजनाओं की वर्तमान स्थिति के साथ उनके भविष्य को लेकर चर्चा हुई।बैठक में यह बात प्रमुखता से सामने आई कि किसी परियोजना का निर्माण पूरा होना ही अंतिम लक्ष्य नहीं है। उसके बाद उसका नियमित संचालन, रखरखाव और नागरिकों के लिए प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। इसी उद्देश्य से प्रत्येक परियोजना के लिए स्पष्ट संचालन व्यवस्था तैयार करने पर जोर दिया गया।परियोजनाओं से आय की संभावनाएं भी तलाशेंगीस्मार्ट सिटी की संपत्तियों के बेहतर इस्तेमाल के साथ उनसे राजस्व अर्जित करने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाएगा। परियोजना की प्रकृति और आवश्यकता के अनुसार निजी क्षेत्र की भागीदारी यानी PPP मॉडल अपनाने की संभावनाओं का भी परीक्षण किया जाएगा।इसका उद्देश्य उपलब्ध अधोसंरचना का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने के साथ उसके संचालन और रखरखाव को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है।अधिकारी-कर्मचारियों की जिम्मेदारी होगी तयपरियोजनाओं के संचालन में लगे मानव संसाधन की क्षमता बढ़ाने पर भी बैठक में जोर दिया गया। प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से अधिकारियों और कर्मचारियों को आवश्यक प्रशिक्षण तथा व्यावहारिक कार्य अनुभव उपलब्ध कराने की बात कही गई।साथ ही प्रत्येक परियोजना में किस अधिकारी या कर्मचारी की क्या भूमिका और जिम्मेदारी होगी, इसे स्पष्ट रूप से निर्धारित करने की दिशा में भी काम किया जाएगा। इससे संचालन व्यवस्था में जिम्मेदारी तय करने और काम की निगरानी में सुविधा मिलने की उम्मीद है।नागरिक उपयोगिता को बनाया जाएगा केंद्रबोर्ड बैठक में स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के नागरिकों के लिए वास्तविक उपयोग को भी महत्वपूर्ण बिंदु माना गया। परियोजनाएं तैयार होने के बाद उनका इस्तेमाल कितना हो रहा है और उन्हें शहरवासियों के लिए और अधिक उपयोगी कैसे बनाया जा सकता है, इस पर भी कार्ययोजना तैयार की जाएगी।बैठक में नगरीय अधोसंरचना, नागरिक सुविधाओं और जल संबंधी कार्यों की प्रगति पर भी चर्चा हुई।एजुकेशन हब के अकादमिक ब्लॉक पर भी चर्चाबैठक में बिलासपुर के एजुकेशन हब में प्रस्तावित अकादमिक ब्लॉक के निर्माण का विषय भी सामने आया। उपलब्ध BSCL निधि से प्रस्तावित इस कार्य को संस्थागत स्थायित्व और भविष्य के उपयोग की दृष्टि से आगे बढ़ाने पर विचार किया गया।हाल ही में कोनी स्थित निर्माणाधीन कन्वेंशन सेंटर और एजुकेशन हब के नालंदा परिसर एवं अकादमिक ब्लॉक का निरीक्षण भी किया गया था, जहां निर्माण कार्यों को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया था।मंत्रालय से ऑनलाइन जुड़े अधिकारीबैठक वर्चुअल माध्यम से आयोजित हुई। इसमें नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, संचालक नीलेश महादेव क्षीरसागर, सूडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सुमीत अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी शामिल हुए।इसके अलावा सीएसपीडीसीएल के प्रबंध निदेशक भीम सिंह कंवर, CHiPS के मुख्य कार्यपालन अधिकारी मयंक अग्रवाल, आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के प्रतिनिधि सुजीत कुमार, बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल, पुलिस अधीक्षक रजनीश सिंह तथा बिलासपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के प्रबंध निदेशक प्रकाश कुमार सर्वे सहित बोर्ड के अन्य सदस्य और अधिकारी बैठक से ऑनलाइन जुड़े।निर्माण से संचालन तक बदलेगा फोकसबिलासपुर स्मार्ट सिटी की आगामी कार्ययोजना में अब परियोजनाओं के निर्माण के साथ उनके संचालन, रखरखाव, जवाबदेही, नागरिक उपयोग और राजस्व क्षमता को भी साथ लेकर चलने की तैयारी दिखाई दे रही है। SOP तैयार होने के बाद परियोजना-वार जिम्मेदारियां और संचालन की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।




