
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ पुलिस विभाग के हालिया तबादला आदेश ने राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के बीच नई बहस छेड़ दी है। 20 जुलाई 2026 को गृह (पुलिस) विभाग द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश में समान संवर्ग और समान बैच के अधिकारियों के साथ कथित रूप से अलग-अलग व्यवहार किए जाने का मामला सामने आया है। इस आदेश के बाद पुलिस महकमे में असंतोष का माहौल बताया जा रहा है। कई अधिकारी इसे पदस्थापना की सामान्य प्रक्रिया के विपरीत बताते हुए शासन के निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, राज्य पुलिस सेवा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (ग्रेड पे-8700) संवर्ग के अधिकांश अधिकारियों को उनके पद और वरिष्ठता के अनुरूप सेनानी अथवा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के समकक्ष पदों पर पदस्थ किया गया है। इसके विपरीत, इसी संवर्ग की एक महिला अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को उप सेनानी, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल (छसबल) के पद पर पदस्थ कर दिया गया। यही निर्णय अब विवाद का कारण बन गया है।जानकारी के अनुसार, संबंधित महिला अधिकारी ने इस पदस्थापना को अपनी सेवा गरिमा के प्रतिकूल बताते हुए इसे अपने साथ अन्याय और भेदभाव माना है। उनका कहना है कि जिस संवर्ग के अन्य अधिकारियों को सेनानी जैसे समकक्ष पद दिए गए हैं, वहीं उन्हें अधीनस्थ पद पर भेजा जाना समानता के सिद्धांत के विपरीत है। इतना ही नहीं, जिस वाहिनी में उनकी पदस्थापना उप सेनानी के रूप में की गई है, उसी वाहिनी में उनके ही संवर्ग की एक अन्य अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सेनानी के पद पर कार्यरत हैं। ऐसे में एक ही संवर्ग के दो अधिकारियों के बीच अधीनस्थ-अधिकारी का संबंध स्थापित होना स्वाभाविक रूप से कई प्रशासनिक और सेवा संबंधी प्रश्न खड़े कर रहा है।
विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि इस निर्णय से संबंधित अधिकारी स्वयं को उपेक्षित और पदावनत महसूस कर रही हैं। उनका मानना है कि समान बैच और समान संवर्ग के अधिकारियों के बीच इस प्रकार का अंतर न केवल सेवा नियमों की भावना के विपरीत है, बल्कि इससे अधिकारियों के मनोबल पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
इसी पीड़ा को लेकर महिला अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ने हाल ही में प्रमुख सचिव (गृह) निहारिका सिंह बारिक से मुलाकात कर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने प्रमुख सचिव को सौंपे गए आवेदन में अनुरोध किया है कि उनके स्थानांतरण आदेश में संशोधन करते हुए उन्हें सेनानी के पद पर पदस्थ किया जाए अथवा वर्तमान आदेश निरस्त कर उन्हें पूर्ववत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर कार्य करने का अवसर प्रदान किया जाए।
विभागीय सूत्रों के अनुसार, यह मामला केवल एक अधिकारी तक सीमित नहीं है। पुलिस विभाग के भीतर कई अधिकारी स्थानांतरण आदेश में अपनाए गए मापदंडों को लेकर असंतोष जता रहे हैं। उनका कहना है कि यदि समान संवर्ग और समान स्तर के अधिकारियों के साथ अलग-अलग व्यवहार किया जाएगा तो इससे सेवा व्यवस्था की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगेंगे।सेवा नियमों के जानकारों का भी मानना है कि सामान्यतः समान संवर्ग के अधिकारियों की पदस्थापना समान स्तर के पदों पर की जाती है। यदि किसी विशेष परिस्थिति में इससे अलग निर्णय लिया जाता है तो उसके पीछे स्पष्ट प्रशासनिक कारण होना आवश्यक माना जाता है। अन्यथा ऐसे निर्णय विवाद और असंतोष को जन्म देते हैं।
पुलिस महकमे में अब यह चर्चा तेज है कि क्या यह मामला केवल एक प्रशासनिक भूल है या फिर पदस्थापना प्रक्रिया में कहीं न कहीं दोहरे मापदंड अपनाए गए हैं। अधिकारियों के बीच यह भी सवाल उठ रहा है कि जब समान बैच और समान संवर्ग के अधिकांश अधिकारियों को सेनानी स्तर का दायित्व दिया गया, तब एक अधिकारी को उप सेनानी के पद पर भेजने का आधार क्या था।
अब पूरे मामले में निगाहें गृह विभाग और पुलिस मुख्यालय पर टिकी हुई हैं। यदि प्रमुख सचिव स्तर पर इस आवेदन पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाता है तो संभावना है कि आदेश में संशोधन कर विवाद को समाप्त किया जा सकता है। वहीं यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह मामला पुलिस विभाग के भीतर समानता, पारदर्शिता और पदस्थापना नीति पर व्यापक बहस का विषय बन सकता है।
फिलहाल, इस मामले ने पुलिस विभाग में यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या समान बैच और समान संवर्ग के अधिकारियों के साथ वास्तव में समान व्यवहार किया गया, या फिर स्थानांतरण प्रक्रिया में कहीं न कहीं भेदभाव की गुंजाइश रह गई। वहीं सर्वव्यापी यह कौन महिला अफसर है उसका खुलासा भी जल्द ही करने जा रही है..!




