छत्तीसगढ़ के राज्य निर्माता अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर से आखिर परहेज क्यों कर रही साय सरकार?भाजपा नेताओं से लेकर सरकारी विज्ञापन, बैनर और पोस्टरों तक से गायब नजर आए अटल जी ! पूर्व विधानसभा अध्यक्ष और छत्तीसगढ़िया एकता मंच के प्रदेशाध्यक्ष ने अपने बैनरों में अटल जी को दिया सम्मान, तो उठे कई सवाल।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर पूरे प्रदेश में उत्सव, बधाइयों और शुभकामनाओं का दौर चलता रहा। भाजपा के बड़े नेताओं से लेकर आम कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और पत्रकार बंधुओं तक ने अपने-अपने स्तर पर बैनर, पोस्टर और विज्ञापनों के माध्यम से छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस की बधाइयां दीं। लेकिन इस पूरे आयोजन के बीच एक ऐसा सवाल सामने आया, जिसने राजनीतिक और सामाजिक गलियारों में चर्चा को जन्म दे दिया। आखिर छत्तीसगढ़ राज्य के निर्माता, पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर अधिकांश बैनर-पोस्टरों और सरकारी विज्ञापनों में नजर क्यों नहीं आई?यह वही अटल बिहारी वाजपेयी हैं, जिनके प्रधानमंत्री कार्यकाल में 1 नवंबर 2000 को छत्तीसगढ़ पृथक राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। छत्तीसगढ़ की जनता के लिए उनका नाम केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व का नाम नहीं, बल्कि राज्य निर्माण के ऐतिहासिक फैसले और छत्तीसगढ़ की अस्मिता से जुड़ी एक महत्वपूर्ण पहचान है। ऐसे में राज्य स्थापना दिवस जैसे गौरवशाली अवसर पर उनके चित्र की अनुपस्थिति स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करती है।हैरानी की बात यह रही कि भाजपा के कई नेताओं, आम कार्यकर्ताओं और सरकारी प्रचार-प्रसार के माध्यमों में अटल जी की तस्वीर को अपेक्षित स्थान मिलता दिखाई नहीं दिया। सवाल यह है कि जिस पार्टी की सरकार आज प्रदेश में सत्ता पर काबिज है, उसी पार्टी के वैचारिक और राजनीतिक इतिहास में अटल बिहारी वाजपेयी का इतना महत्वपूर्ण स्थान है, फिर उनके सम्मान और स्मरण को लेकर इतनी उदासीनता क्यों दिखाई दे रही है?इस बीच पूर्व विधानसभा अध्यक्ष धरमलाल कौशिक और छत्तीसगढ़िया एकता मंच के प्रदेशाध्यक्ष तरुण कौशिक के बैनर-पोस्टर चर्चा का विषय बन गए, जिनमें राज्य निर्माता अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर को प्रमुखता से स्थान दिया गया। इन बैनरों ने यह संदेश दिया कि राजनीतिक पद और सत्ता से ऊपर भी इतिहास, विचारधारा और राज्य निर्माण के नायकों के प्रति सम्मान की अपनी जिम्मेदारी होती है।अब सवाल सीधे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार से है कि क्या राज्य स्थापना दिवस का आयोजन केवल औपचारिक बधाइयों, बड़े-बड़े होर्डिंग्स और राजनीतिक चेहरों के प्रचार तक सीमित रह गया है? क्या सरकार के जिम्मेदार लोगों को यह याद दिलाने की जरूरत है कि छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के पीछे अटल बिहारी वाजपेयी की ऐतिहासिक भूमिका रही है?भाजपा नेतृत्व को भी आत्ममंथन करना चाहिए कि जब पार्टी अपने कार्यकर्ताओं को अटल जी के विचारों, आदर्शों और सुशासन की राजनीति का पाठ पढ़ाती है, तो फिर राज्य स्थापना दिवस जैसे महत्वपूर्ण अवसर पर उनके चित्र को सम्मानजनक स्थान देने में संकोच क्यों? क्या अटल जी का योगदान केवल चुनावी मंचों पर भाषण देने और राजनीतिक अवसरों पर स्मरण करने तक सीमित रह गया है?मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को स्पष्ट करना चाहिए कि सरकारी विज्ञापनों और स्थापना दिवस के प्रचार-प्रसार में राज्य निर्माता अटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर को पर्याप्त स्थान क्यों नहीं मिला। यदि यह महज डिजाइन या प्रचार-प्रसार की चूक है, तो जिम्मेदारों से जवाबदेही तय होनी चाहिए। और यदि यह किसी सोची-समझी उपेक्षा का परिणाम है, तो यह और भी गंभीर विषय है।छत्तीसगढ़ किसी एक सरकार, किसी एक पार्टी या किसी एक राजनीतिक चेहरे की जागीर नहीं है। यह उन ऐतिहासिक प्रयासों और जनभावनाओं का परिणाम है, जिनमें अटल बिहारी वाजपेयी का योगदान सदैव याद रखा जाएगा। राज्य निर्माण के 26 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश को उत्सव मनाने के साथ-साथ अपने निर्माता के प्रति कृतज्ञता भी व्यक्त करनी चाहिए थी।आखिर सवाल यही है कि जिस अटल बिहारी वाजपेयी ने छत्तीसगढ़ को अलग राज्य की पहचान दी, उसी छत्तीसगढ़ की स्थापना दिवस की तस्वीरों से उनका चेहरा गायब क्यों है? क्या विष्णुदेव साय सरकार इस सवाल का जवाब देगी, या फिर अटल जी का नाम केवल राजनीतिक जरूरतों के समय ही याद किया जाएगा?राज्य निर्माता का सम्मान किसी राजनीतिक दल की मेहरबानी नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास के प्रति हमारी नैतिक जिम्मेदारी है।




