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हर विभाग में तबादलों की हलचल, राजस्व विभाग में जड़ता क्यों? एक ही जिले और स्थान पर वर्षों से जमे नायब तहसीलदार-तहसीलदार, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा से उठे जवाबदेही के सवाल।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ में इन दिनों शासन-प्रशासन के विभिन्न विभागों में उच्च स्तर पर तबादलों और पदस्थापना की प्रक्रिया चल रही है। कई विभागों में प्रशासनिक कसावट, कार्यकुशलता और पारदर्शिता के नाम पर अधिकारियों को एक स्थान से दूसरे स्थान भेजा जा रहा है, लेकिन राजस्व विभाग में स्थानांतरण नीति और प्रशासनिक फेरबदल को लेकर सवाल लगातार गहराते जा रहे हैं। प्रदेश के अनेक जिलों में नायब तहसीलदार और तहसीलदार लंबे समय से एक ही जिले अथवा एक ही स्थान पर जमे होने की चर्चा प्रशासनिक गलियारों में है।ऐसे में सबसे बड़ा सवाल राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा से उठ रहा है कि जब दूसरे विभागों में वर्षों से एक ही स्थान पर पदस्थ अधिकारियों को हटाकर नई जिम्मेदारियां दी जा रही हैं, तब राजस्व विभाग में आखिर यह प्रक्रिया प्रभावी रूप से क्यों दिखाई नहीं दे रही है?राजस्व विभाग आम जनता से सीधे जुड़ा हुआ विभाग है। नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा, डायवर्सन, भूमि अभिलेख, अतिक्रमण और अन्य अनेक महत्वपूर्ण मामलों का सीधा संबंध तहसील स्तर के प्रशासन से होता है। ऐसे में यदि कोई अधिकारी लंबे समय तक एक ही स्थान अथवा जिले में पदस्थ रहता है तो स्थानीय प्रभाव, कार्यप्रणाली की निष्पक्षता और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। लंबे समय से जमे अधिकारियों की सूची और उनके कार्यकाल की समीक्षा की मांग अब तेज होने लगी है।प्रशासनिक हलकों में चर्चा है कि राजस्व विभाग में तबादले की एक समान और स्पष्ट प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए। कौन अधिकारी कितने वर्षों से एक जिले या तहसील में पदस्थ है? किसे सामान्य कार्यकाल से अधिक समय हो चुका है? किन मामलों में विशेष कारणों से पदस्थापना बढ़ाई गई है? इन सभी बिंदुओं की सार्वजनिक और विभागीय समीक्षा आवश्यक मानी जा रही है।प्रदेश में सुशासन और प्रशासनिक पारदर्शिता की बात करने वाली सरकार के सामने अब यह सवाल है कि क्या राजस्व विभाग के लिए अलग व्यवस्था है? यदि नहीं, तो फिर अन्य विभागों की तरह यहां भी समयबद्ध स्थानांतरण और पदस्थापना नीति का पालन क्यों नहीं कराया जा रहा?मंत्री टंकराम वर्मा के विभाग में जमीनी स्तर पर बदलाव की प्रतीक्षा है। विभागीय स्तर पर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि लंबे समय से एक ही स्थान पर पदस्थ नायब तहसीलदारों और तहसीलदारों की समीक्षा कब होगी और तबादला प्रक्रिया को लेकर सरकार की नीति क्या है।जनता की मांग है कि सरकार जिलेवार सूची सार्वजनिक करे और बताए कि कौन अधिकारी कितने वर्षों से एक ही स्थान या जिले में पदस्थ है। पारदर्शी, समयबद्ध और समान तबादला नीति ही इस बहस का जवाब हो सकती है। अन्यथा राजस्व विभाग में वर्षों से जमे अधिकारियों को लेकर उठ रहे सवाल और तेज होंगे तथा जवाबदेही सीधे राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा के विभाग तक पहुंचेगी।सवाल साफ है—जब छत्तीसगढ़ के लगभग सभी विभागों में तबादलों की घंटी बज रही है, तो राजस्व विभाग में लंबे समय से जमे नायब तहसीलदार और तहसीलदारों पर कार्रवाई कब होगी, मंत्री टंकराम वर्मा जवाब देंगे?

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