
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा महाराष्ट्र में हिंदी दिवस के अवसर पर हिंदी की संवैधानिक स्थिति एवं वर्तमान तकनीकी चुनौतियां विषय पर सोमवार को आयोजित विशिष्ट व्याख्यान में लखनऊ विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग के अवकाश प्राप्त अध्यक्ष प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि आंतरिक निष्ठा और संकल्प से ही हिंदी भाषा की प्रगति को और गति दी जा सकती है। विश्वविद्यालय के हिंदी साहित्य विभाग की ओर से महादेवी वर्मा सभागार में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा की अध्यक्षता में विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। प्रो. दीक्षित ने अपने ऑनलाइन व्याख्यान में कहा कि हिंदी सृजन, व्यापार, तकनीकी और राजकाज की भाषा है। उन्होंने कहा कि 14 सितंबर 1950 में नियमावली बनने के बाद हिंदी को पंद्रह वर्षों में सर्वांग सम्पन्न बनाया जाने का लक्ष्य रखा गया था। इसके लिए आयोग और कार्यालय बनाए गए, परंतु अपेक्षित परिणाम नहीं निकल पाए। बदलते तकनीकी के दौर में अधिनियम की धाराओं में परिवर्तन आवश्यक है। उनका कहना था कि युनिकोड के कारण हिंदी को आगे बढ़ने में बड़ी मदद मिली है। हमें सत्यनिष्ठा के साथ हिंदी को आगे ले जाना चाहिए। उन्होंने भाषा का स्वतंत्र मंत्रालय बनाए जाने की जरूरत जताते हुए कहा कि भाषा का नष्ट होना एक संस्कृति के नष्ट होने का कारण बनता है इसलिए भाषाओं को बचाने के लिए स्वतंत्र मंत्रालय बनाना आवश्यक है। उन्होंने हिंदी के समक्ष आ रही तकनीकी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला।अध्यक्षीय उद्बोधन में कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने कहा कि अंग्रेजी का मोह छोड़ कर हमें अपने भीतर भरोसा, आत्म विश्वास और स्वाभिमान पैदा कर हिंदी को वर्तमान तकनीकी के दौर में अधिक सक्षम बनाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भाषा में सरलता ही उसकी गति को बढ़ाती है। हमें दैनिक जीवन में प्रचलन के शब्दों को उपयोग में लाना चाहिए। उनका कहना था कि आंतरिक निष्ठा और दृढ़ संकल्प से ही भाषा की प्रगति संभव है। उन्होंने आह्वान किया कि सरकारी कार्यालयों मौलिक कार्य से हिंदी को बढ़ावा दिया जाना चाहिए। कार्यक्रम का स्वागत भाषण हिंदी साहित्य विभाग की अध्यक्ष प्रो. प्रीति सागर ने दिया। उन्होंने कहा कि हमारा विश्वविद्यालय हिंदी के वैश्विक प्रचार-प्रसार के लिए प्रतिबद्ध है। इस दिशा में हमें जिम्मेदारी के साथ हिंदी को वैश्विक पटल पर ले जाने में काम करना चाहिए।कार्यक्रम का संचालन हिंदी साहित्य विभाग के सहायक प्रोफेसर डॉ. सुनील कुमार ने किया तथा एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. अशोक नाथ त्रिपाठी ने आभार ज्ञापित किया। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन एवं कुलगीत गायन से किया गया। इस अवसर पर प्रो. जनार्दन कुमार तिवारी, डॉ. एच. ए. हुनगुंद, डॉ. रामानुज अस्थाना, डॉ. रूपेश कुमार सिंह, डॉ. शैलेष मरजी कदम, डॉ. कोमल कुमार परदेसी, डॉ. रवि कुमार, डॉ. अमित विश्वास, बी.एस. मिरगे सहित बड़ी संख्या में शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों की उपस्थिति रही।




