
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिलासपुर कोनी थाना क्षेत्र में गणेश पंडाल में प्रसाद तैयार कर रही महिलाओं के साथ कथित मारपीट, गाली-गलौज और अभद्र व्यवहार का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार, कुछ लोगों ने पंडाल में पहुंचकर वहां मौजूद आदिवासी महिलाओं के साथ मारपीट की। एक गर्भवती महिला के पेट में लात मारने तथा एक युवती का सिर फोड़ने और हाथ में चोट पहुंचाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। मामले को लेकर सर्व आदिवासी समाज एवं सर्व समाज के प्रतिनिधियों ने पीड़ित महिलाओं के साथ बिलासपुर एसपी से मुलाकात कर कार्रवाई की मांग की है।शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि घटना के बाद पीड़ित पक्ष को कोनी थाने में देर रात तक बैठाए रखा गया, लेकिन आरोपितों के विरुद्ध तत्काल अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद पीड़ित महिलाओं को लेकर समाज के प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, एसपी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कोनी थाना प्रभारी को कड़ी फटकार लगाई और पीड़ित महिलाओं के बयान तत्काल दर्ज कर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। शिकायतकर्ताओं ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम सहित अन्य प्रासंगिक कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की है।हालांकि, इस पूरे मामले में पुलिस की ओर से दर्ज अपराध, आरोपितों की संख्या और घटनाक्रम की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि फिलहाल सामने नहीं आई है। वहीं, इसी घटना को लेकर प्रकाशित एक रिपोर्ट में कोनी क्षेत्र के गणेश पंडाल को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद और मारपीट की बात सामने आई है तथा पुलिस द्वारा दोनों पक्षों की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत प्रकरण दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई है। मामले ने अब सामाजिक और राजनीतिक बहस का रूप भी लेना शुरू कर दिया है। सामाजिक कार्यकर्ता श्याम मूरत कौशिक ने सवाल उठाया है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान यदि किसी समुदाय या वर्ग के लोगों के साथ कथित तौर पर मारपीट होती है, तो ऐसे मामलों में भी समाज के प्रभावशाली संगठनों और स्वयं को धर्म का प्रतिनिधि बताने वाले लोगों को सामने आकर पीड़ितों के पक्ष में आवाज उठानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि धार्मिक मुद्दों को लेकर सक्रिय रहने वाले कुछ संगठन और व्यक्ति चयनात्मक तरीके से प्रतिक्रिया देते हैं और दूसरे समुदाय से जुड़े विवाद होने पर ही अधिक मुखर दिखाई देते हैं।कौशिक ने कहा कि कानून-व्यवस्था और पीड़ितों को न्याय दिलाने का सवाल किसी जाति, धर्म या संगठन की पहचान से ऊपर होना चाहिए। उनका कहना है कि गणेश पंडाल जैसी धार्मिक आस्था से जुड़ी जगह पर महिलाओं के साथ यदि मारपीट और अभद्रता के आरोप लगे हैं तो पुलिस को निष्पक्ष जांच कर तथ्य सामने लाने चाहिए और दोष सिद्ध होने पर कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।इस घटना ने कोनी क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस पीड़ित महिलाओं के बयान, चिकित्सकीय साक्ष्य और प्रत्यक्षदर्शियों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की जांच किस दिशा में आगे बढ़ाती है और आरोपों में तथ्य पाए जाने पर किन धाराओं के तहत कार्रवाई करती है।




