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वन विभाग के सच से क्यों इतना बवाल है? सच लिखना जुर्म नहीं, ‘सर्वव्यापी’ का यही सवाल है।

भागवत प्रसाद, ब्यूरो चीफ

छत्तीसगढ़ के एकमात्र नियमित, निष्पक्ष,बेबाक साप्ताहिक समाचार पत्र एवं वेबपोर्टल ‘सर्वव्यापी’ द्वारा 20 जुलाई 2026 से 26 जुलाई 2026 के अंक के प्रथम पृष्ठ पर “वन मंडल के भ्रष्टाचार पर कब जागेगी विष्णु सरकार” शीर्षक से दस्तावेजों के आधार पर प्रमुखता से प्रकाशित समाचार के बाद वन विभाग के भीतर व्यापक हलचल मच गई है।विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, खबर प्रकाशित होने के बाद विभाग से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने अपने एक करीबी रिश्तेदार, जिनका नाम कथित रूप से भ्रष्टाचार के मामलों से जोड़ा जा रहा है, को बचाने के उद्देश्य से पहले संपादक तरुण कौशिक से संपर्क साधने का प्रयास किया। आरोप है कि इस दौरान समाचारों को आगे प्रकाशित नहीं करने के लिए पहले लेन-देन का संकेत दिया गया और बाद में कथित रूप से दबाव एवं धमकी का सहारा लिया गया।बताया जाता है कि जब संपादक ने किसी भी प्रकार के समझौते या दबाव को स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया, तब उक्त अधिकारी ने अपने राजनीतिक प्रभाव का उपयोग करते हुए एक वरिष्ठ भाजपा नेता को पूरे मामले से अवगत कराया। इसके बाद कथित रूप से उस भाजपा नेता की ओर से भी वन विभाग, विशेषकर मरवाही वन मंडल से संबंधित समाचारों को प्रकाशित नहीं करने की बात कही गई।

हालांकि, सर्वव्यापी के संपादक तरुण कौशिक ने स्पष्ट कर दिया कि उनका दायित्व जनता के हित में निष्पक्ष एवं तथ्यपरक पत्रकारिता करना है। किसी भी प्रकार का राजनीतिक, प्रशासनिक अथवा आर्थिक दबाव उनकी संपादकीय स्वतंत्रता को प्रभावित नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी विभाग में भ्रष्टाचार, अनियमितता या जनहित से जुड़े गंभीर मामले सामने आते हैं और उनके समर्थन में तथ्य एवं दस्तावेज उपलब्ध होते हैं, तो उन्हें पूरी जिम्मेदारी के साथ प्रकाशित किया जाता रहेगा।संपादक ने यह भी कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य किसी व्यक्ति या संस्था को निशाना बनाना नहीं, बल्कि जनहित के मुद्दों को समाज और शासन के सामने लाना है।

यदि किसी समाचार से संबंधित पक्ष के पास तथ्यात्मक स्पष्टीकरण या अपना पक्ष है, तो उसे भी समान महत्व के साथ प्रकाशित किया जाएगा। लेकिन खबरें रोकने, दबाने या दबाव बनाने की किसी भी कोशिश के आगे झुकना पत्रकारिता के मूल सिद्धांतों के विरुद्ध होगा।’सर्वव्यापी’ ने दोहराया कि उसकी प्रतिबद्धता केवल सत्य, दस्तावेजों और जनहित के प्रति है। भविष्य में भी वन विभाग सहित अन्य सभी विभागों में भ्रष्टाचार, अनियमितताओं और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर निर्भीकता से प्रकाशित किया जाता रहेगा।

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