Newsछत्तीसगढ़

संपादक के कलम ले…*छत्तीसगढ़ राज के सपना: पुरखा ले नवा पीढ़ी तक…

तरुण कौशिक, संपादक

छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस के बेरा म जम्मो छत्तीसगढ़िया मन ला गाड़ा-गाड़ा बधाई अउ जोहार!छत्तीसगढ़ हमर बर सिरिफ एक राज के नांव नो हे, ये हमर पुरखा मन के तपस्या, हमर पुरखा मन के सपना, हमर माटी के महक, हमर पुरखौती संस्कृति, हमर भाखा अउ हमर पहिचान आय। एक नवंबर 2000 के दिन बने छत्तीसगढ़ राज हमर पुरखा मन के लंबे संघर्ष अउ जनभावना के जीत के चिन्ह आय। ए दिन हर छत्तीसगढ़िया मनखे के मन म नवा आस, नवा उमंग अउ अपन राज के विकास के सपना जगाथे।छत्तीसगढ़ के धरती धान के कटोरा कहाथे। एखर कोरा म किसान के पसीना, मजदूर के मेहनत, वनवासी समाज के सादगी, लोककला के मिठास अउ लोकसंस्कृति के गहिर जड़ बसे हे। ए माटी ह संत-महात्मा, वीर सपूत अउ समाज ला सही रद्दा देखइया मनखे मन ला जनम देहे। हमर पंथी, राउत नाचा, सुआ नाचा, करमा अउ ददरिया के सुर म हमर पुरखा मन के जिनगी, दुख-सुख अउ माटी ले जुड़ाव के कहानी बसे हे।फेर आज स्थापना दिवस के ए पावन बेरा म एक सवाल हमर मन ला भीतर तक सोचे बर मजबूर करथे—जेन सपना ला देख के छत्तीसगढ़ राज बनाय गे रहिस, का ओ सपना आज पूरा होवत हे?राज बन गे, राजधानी बन गे, नवा-नवा भवन बन गे, सड़क अउ पुल के जाल बिछत हे, विकास के बड़े-बड़े दावा घलो होवत हे। फेर का गांव के गरीब मनखे के जिनगी म घलो ओतके बदलाव आय हे? का किसान अपन उपज के सही दाम पावत हे? का पढ़े-लिखे नौजवान मन ला अपन राज म रोजगार मिलत हे? का गांव के गरीब परिवार मन ला बिना परेशानी के इलाज, शिक्षा अउ सरकारी योजना के लाभ मिलत हे? ए सवाल मन के जवाब खाली मंच ले भाषण देके या विकास के बखान करके नइ मिल सकय। एखर जवाब त गांव-गांव के गली, खेत-खार, किसान के घर अउ मेहनतकश मनखे के जिनगी म खोजे बर परही।छत्तीसगढ़ के पहिचान किसान अउ खेती-किसानी ले हे। जेन किसान अपन पसीना बहाके धान उपजाथे, ओखर घर म खुशहाली आही, तबे राज के तरक्की के दावा सही माने जाही। किसान ला समय म खाद-बीज, सिंचाई के सुविधा, उपज के उचित दाम अउ खेती ले जुड़े समस्या के समाधान मिलना चाही। किसान के जिनगी कर्ज, चिंता अउ अनिश्चितता म गुजरही, त विकास के चमक अधूरा रहि जाही।सरकार चाहे कोनो दल के होवय, किसान के हित पहिली प्राथमिकता होना चाही। किसान के सम्मान खाली चुनावी वादा तक सीमित नइ रहना चाही, बल्कि सरकार के हर नीति अउ काम म दिखना चाही।आज छत्तीसगढ़ के पढ़े-लिखे नौजवान मन अपन भविष्य ला लेके चिंता म हें। डिग्री हासिल करे के बाद घलो रोजगार बर भटकना, नौकरी बर दूसर शहर जाय बर मजबूर होना अउ अपन परिवार ले दूर रहिना, ये समस्या मन ला अनदेखा नइ करे जा सकय।हमर राज म संसाधन के कमी नइ हे। खनिज संपदा हे, जंगल हे, खेती हे, उद्योग के संभावना हे अउ मेहनत करेइया मनखे मन के कमी नइ हे। जरूरत हे सही योजना, पारदर्शी व्यवस्था अउ स्थानीय नौजवान मन ला रोजगार के अवसर देय के।जेन दिन छत्तीसगढ़ के नौजवान ला अपन माटी म मेहनत के सही फल मिलही, ओही दिन स्थापना दिवस के सपना साकार होय के रद्दा म एक बड़े कदम आगू बढ़ही।मातृभाखा अउ संस्कृति के सम्मान हमर पहिली जिम्मेदारीछत्तीसगढ़ी हमर मया के भाखा आय। ए भाखा म दाई के ममता, ददा के दुलार, दाई-ददा के सीख अउ गांव के माटी के सुगंध बसे हे। फेर दुख के बात ये हे कि कई बेर अपन भाखा बोले म घलो कुछ मनखे मन संकोच करथें।अपन भाखा ला बोलना, लिखना अउ अगला पीढ़ी तक पहुंचाना हमर सबो के जिम्मेदारी आय। स्कूल, साहित्य, सरकारी कामकाज, लोकमंच अउ संचार के माध्यम म छत्तीसगढ़ी ला उचित जगह मिलना चाही। अपन भाखा के सम्मान करे के मतलब दूसर भाखा के विरोध करना नो हे, बल्कि अपन संस्कृति के जड़ ला मजबूत करना आय।जेन समाज अपन भाखा, संस्कृति अउ इतिहास ला भुला देथे, ओ समाज धीरे-धीरे अपन पहिचान ले दूर हो जाथे। एखर सेती छत्तीसगढ़ के विकास के संग-संग छत्तीसगढ़ियापन ला बचाय रखना घलो जरूरी हे।छत्तीसगढ़ के असली ताकत ओकर मेहनतकश जनता आय। जंगल म रहइया वनवासी समाज, खेत म काम करइया किसान, कारखाना म पसीना बहाय वाला मजदूर अउ रोजी-मजूरी करके परिवार चलाय वाला गरीब मनखे मन राज के विकास म अपन अमूल्य योगदान देथें।ए मनखे मन ला शिक्षा, स्वास्थ्य, साफ पानी, सड़क, बिजली अउ रोजगार के बेहतर सुविधा मिलना चाही। सरकारी योजना के लाभ सही हकदार तक बिना भेदभाव अउ बिना अनावश्यक परेशानी के पहुंचना चाही।विकास के असली मापदंड बड़े-बड़े भवन, चौड़ी सड़क अउ ऊंचा-ऊंचा विज्ञापन नो हे। विकास के असली मापदंड ये आय कि गरीब के घर म चूल्हा बरत हे कि नइ, बेटी मन सुरक्षित हें कि नइ, बच्चा मन ला बढ़िया पढ़ई मिलत हे कि नइ अउ बीमार मनखे ला समय म इलाज मिलत हे कि नइ।लोकतंत्र म सरकार जनता के सेवा करे बर बनथे। सरकार के जिम्मेदारी आय कि जनता के समस्या ला सुने, जनहित के फैसला लेवय अउ अपन वादा मन ला पूरा करे के दिशा म ईमानदारी ले काम करय। विकास के काम म पारदर्शिता होवय, सरकारी संसाधन के सही उपयोग होवय अउ भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा कार्रवाई होवय।ओतकेच जरूरी हे कि जनता घलो अपन अधिकार अउ जिम्मेदारी ला समझय। सवाल पूछना, समस्या बताना अउ जनहित के मुद्दा उठाना लोकतंत्र ला मजबूत करथे। सरकार के बढ़िया काम के सराहना होना चाही, अउ जिहां कमी दिखय, उहां सुधार के मांग घलो होना चाही।सच्चा छत्तीसगढ़िया ओहर नो हे, जे सिरिफ अपन राज के जय-जयकार करथे; सच्चा छत्तीसगढ़िया ओहर आय, जे अपन राज के भलाई बर सच के संग खड़े रहिथे।छत्तीसगढ़ स्थापना दिवस सिरिफ उत्सव मनाय के दिन नो हे। ए दिन अपन बीते दिन के संघर्ष ला सुरता करे, आज के स्थिति के समीक्षा करे अउ आने वाला पीढ़ी बर एक बेहतर छत्तीसगढ़ गढ़े के संकल्प लेय के दिन आय।आवव, हमन अइसन छत्तीसगढ़ बनाय के सपना देखन, जिहां किसान खुशहाल होवय, नौजवान मन ला रोजगार मिलय, बेटी अउ महिला मन सुरक्षित रहंय, गरीब मन ला न्याय मिलय, शिक्षा अउ स्वास्थ्य हर मनखे के पहुंच म होवय अउ छत्तीसगढ़ी भाखा-संस्कृति के मान बढ़य।हमन अइसन राज गढ़न, जिहां विकास के लाभ कुछ गिने-चुने मनखे तक सीमित नइ रहय, बल्कि समाज के आखिरी पांत म खड़े मनखे तक पहुंचय। जिहां जात-पात, ऊंच-नीच अउ भेदभाव के जगह आपसी मया, भाईचारा अउ समानता के भावना मजबूत होवय।हमर पुरखा मन जेन सपना देखे रहिन, ओला पूरा करना आज के पीढ़ी के जिम्मेदारी आय। छत्तीसगढ़ के माटी ह हमन ला पहिचान देहे हे, अब ए माटी के मान बढ़ाना हमर कर्तव्य आय।छत्तीसगढ़ के असली वैभव एखर खनिज संपदा म ही नइ, बल्कि एखर मेहनतकश जनता, लोकसंस्कृति, भाईचारा अउ अपन माटी बर मया म बसे हे।आवव, स्थापना दिवस के ए पावन अवसर म हमन संकल्प लेवन कि अपन राज ला सिरिफ आर्थिक रूप ले नइ, बल्कि सामाजिक, सांस्कृतिक अउ मानवीय रूप ले घलो समृद्ध बनाबो।जय जोहार! जय छत्तीसगढ़!जय छत्तीसगढ़ महतारी!

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!