
विकास नंद/सर्वव्यापी
सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत सरकार भले ही खाद्यान्न के भंडारण, वितरण और नियमित मॉनिटरिंग को लेकर पारदर्शिता के दावे कर रही हो, लेकिन सरायपाली क्षेत्र में उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर सामने आ रही शिकायतें इन दावों की जमीनी हकीकत पर सवाल खड़े कर रही हैं।
हितग्राहियों का आरोप है कि कुछ उचित मूल्य दुकानों के संचालक अपनी सुविधा और समय के अनुसार राशन वितरण कर रहे हैं, जिसके चलते आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य सरकार के अनुसार सितंबर एवं अक्टूबर 2026 के लिए खाद्यान्न का आबंटन प्रदेश की 14,186 उचित मूल्य दुकानों को जारी किया गया है। सितंबर माह के लिए आबंटित खाद्यान्न का सभी उचित मूल्य दुकानों में भंडारण पूर्ण होने तथा राशनकार्डधारियों को वितरण लगातार जारी रहने की जानकारी दी गई है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 24 सितंबर 2026 तक लगभग 60 लाख राशनकार्डधारियों ने सितंबर माह के खाद्यान्न का उठाव किया है। इस दौरान कुल 19 लाख 57 हजार 880 क्विंटल चावल का उठाव हुआ है। विभाग का कहना है कि शेष राशनकार्डधारियों को भी उनकी निर्धारित पात्रता के अनुसार खाद्यान्न उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरायपाली में संचालकों पर मनमानी के आरोप
इधर सरायपाली क्षेत्र में कुछ उचित मूल्य दुकानों के संचालन को लेकर हितग्राहियों में नाराजगी की बात सामने आ रही है। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि दुकानों के संचालन और राशन वितरण के लिए निर्धारित व्यवस्था के बावजूद कुछ संचालक अपनी सुविधा के अनुसार दुकान खोलते और राशन वितरित करते हैं। इससे कामकाजी लोगों, बुजुर्गों और दूरदराज से आने वाले हितग्राहियों को बार-बार दुकान के चक्कर लगाने की स्थिति बन रही है।
हितग्राहियों का यह भी कहना है कि जब शासन द्वारा राशन की उपलब्धता और वितरण व्यवस्था की लगातार निगरानी किए जाने की बात कही जा रही है, तो स्थानीय स्तर पर ऐसी शिकायतों का समयबद्ध निराकरण भी होना चाहिए।
सरकार के दावे और जमीनी व्यवस्था में तालमेल जरूरी
राज्य शासन का कहना है कि पीडीएस के तहत खाद्यान्न के भंडारण एवं वितरण की नियमित निगरानी और मॉनिटरिंग की जा रही है, ताकि पात्र राशनकार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न समय पर मिल सके। संबंधित अधिकारियों को भी पीडीएस के सुचारू संचालन के लिए आवश्यक निगरानी बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।ऐसे में सरायपाली क्षेत्र के हितग्राहियों की शिकायतों की स्थानीय स्तर पर जांच कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करना प्रशासन की जिम्मेदारी बनती है। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो संबंधित उचित मूल्य दुकान संचालकों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि पीडीएस व्यवस्था में हितग्राहियों का भरोसा कायम रहे।
अब सवाल यही है कि सरकारी आंकड़ों में सुचारू नजर आ रही पीडीएस व्यवस्था सरायपाली की उचित मूल्य दुकानों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंच रही है और हितग्राहियों को निर्धारित समय, मात्रा एवं व्यवस्था के अनुसार राशन मिल रहा है या नहीं?




