
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के स्कूल शिक्षा विभाग में समग्र शिक्षा के अंतर्गत सहायक कार्यक्रम समन्वयक (APC) के पद पर की गई हालिया प्रतिनियुक्तियों को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। विभाग द्वारा 8 सितंबर 2026 को जारी दो अलग-अलग आदेशों में एक सहायक शिक्षक और एक शिक्षक को सहायक कार्यक्रम समन्वयक के पद पर प्रतिनियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों की तुलना 7 अक्टूबर 2009 को स्कूल शिक्षा विभाग के तत्कालीन सचिव नंद कुमार द्वारा जारी शासन निर्देश से किए जाने के बाद विभागीय प्रक्रिया और पात्रता को लेकर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।7 अक्टूबर 2009 के शासन पत्र क्रमांक 6252/2531/09/20-1 में स्पष्ट किया गया था कि राजीव गांधी शिक्षा मिशन के अधिकांश जिलों में सहायक कार्यक्रम समन्वयक के पद रिक्त हैं। पत्र में तत्कालीन व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा गया था कि इन पदों को प्राचार्यों द्वारा भरा जाना था, लेकिन ऐसा संभव नहीं होने के कारण सर्व शिक्षा अभियान के प्रारंभ से इन पदों पर व्याख्याताओं की पदस्थापना की जाती रही है। जहां व्याख्याता उपलब्ध नहीं हों, वहां रिक्त पदों को शिक्षाकर्मी वर्ग-1 से भरने के निर्देश दिए गए थे।यही पुराना शासन निर्देश अब 2026 की नई पदस्थापनाओं के संदर्भ में चर्चा का केंद्र बन गया है।2026 के आदेश में क्या हुआ?स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 8 सितंबर 2026 को जारी आदेश क्रमांक ESTB-102(2)/565/2026/20-3 में भूपेन्द्र कुमार बंजारा, सहायक शिक्षक, शासकीय प्राथमिक शाला कन्या आश्रम पंतोरा, विकासखंड बलौदा, जिला जांजगीर-चांपा को प्रतिनियुक्ति पर लेते हुए सहायक कार्यक्रम समन्वयक, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा, जांजगीर-चांपा के पद पर पदस्थ किया गया।इसी दिन जारी एक अन्य आदेश में प्रज्ञा दुबे, शिक्षक, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय ताड़ोकी, जिला कांकेर को प्रतिनियुक्ति पर लेते हुए सहायक कार्यक्रम समन्वयक, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा, बिलासपुर के पद पर पदस्थ किया गया।दोनों आदेशों में पदस्थापना का आधार “प्रशासनिक आधार” बताया गया है और नियुक्तियां आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से की गई हैं।पुराने आदेश से कितना मेल खाती है नई व्यवस्था?यहीं से सबसे बड़ा सवाल पैदा होता है। 2009 के शासन निर्देश में सहायक कार्यक्रम समन्वयक के पद के लिए व्याख्याता को प्राथमिकता देने तथा व्याख्याता उपलब्ध न होने की स्थिति में शिक्षाकर्मी वर्ग-1 से पद भरने की व्यवस्था बताई गई थी। दूसरी ओर 2026 के दोनों आदेशों में पदस्थ किए गए कर्मचारी क्रमशः सहायक शिक्षक और शिक्षक हैं।हालांकि बाद के वर्षों में शासन द्वारा अलग-अलग अवसरों पर सहायक कार्यक्रम समन्वयक के पद पर विभिन्न शिक्षक संवर्गों के कर्मचारियों की प्रतिनियुक्ति के उदाहरण सामने आते रहे हैं। मसलन, 2024 में एक व्याख्याता एलबी को सहायक कार्यक्रम समन्वयक बनाया गया था, जबकि 2025 के उपलब्ध आदेशों में भी APC पद पर व्याख्याताओं की प्रतिनियुक्ति के उदाहरण मिलते हैं।इसलिए असली सवाल यह है कि क्या 2009 के निर्देश के बाद कोई नया शासन नियम, संशोधन, भर्ती/प्रतिनियुक्ति निर्देश या सक्षम प्राधिकारी का आदेश जारी हुआ है, जिसके आधार पर 2026 में सहायक शिक्षक एवं शिक्षक को APC बनाया जा सकता है?यदि ऐसा कोई नवीन प्रावधान है तो उसे सार्वजनिक किया जाना चाहिए। यदि ऐसा कोई नवीन प्रावधान नहीं है, तो 2009 के निर्देश के विपरीत की गई इन पदस्थापनाओं का वैधानिक आधार क्या है—यह शिक्षा विभाग को स्पष्ट करना होगा।क्या नियम सभी के लिए समान हैं?शिक्षा विभाग में लंबे समय से प्रतिनियुक्ति और पदस्थापना को लेकर पारदर्शिता का सवाल उठता रहा है। उपलब्ध समाचार एवं विभागीय आदेशों से यह भी स्पष्ट होता है कि सहायक कार्यक्रम समन्वयक जैसे पदों पर अलग-अलग शिक्षक संवर्गों के लोगों को अलग-अलग समय पर पदस्थ किया गया है।ऐसे में विभाग को यह बताना चाहिए कि APC पद के लिए वर्तमान में लागू शैक्षणिक योग्यता, संवर्ग, वेतनमान, ग्रेड-पे, अनुभव, पद की स्वीकृत संरचना तथा प्रतिनियुक्ति के मापदंड क्या हैं।यदि वर्तमान नियम 2009 के निर्देश से अलग हैं तो वह नियम कब जारी हुआ? किस आदेश से 2009 की व्यवस्था में परिवर्तन हुआ? और क्या उस आदेश को सभी जिलों में समान रूप से लागू किया जा रहा है?मुख्यमंत्री सचिवालय की चुप्पी पर सवालइस पूरे मामले में अब नजर मुख्यमंत्री सचिवालय पर भी है। शिक्षा विभाग से जुड़े पदस्थापना आदेशों को लेकर सवाल उठने के बावजूद यदि शासन स्तर पर कोई स्पष्टीकरण सामने नहीं आता है तो इससे पारदर्शिता को लेकर स्वाभाविक प्रश्न खड़े होंगे।मुद्दा किसी व्यक्ति विशेष की नियुक्ति का नहीं, बल्कि शासन के नियमों की समानता और उनके पालन का है। यदि किसी पद के लिए पात्रता का निर्धारण शासन ने किया है तो उसका पालन होना चाहिए और यदि नियमों में समय के साथ बदलाव हुआ है तो उस बदलाव की जानकारी सार्वजनिक होनी चाहिए।जांच के लिए ये सवाल महत्वपूर्णपूरे मामले में शासन से निम्न बिंदुओं पर स्थिति स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता है—पहला, 2009 के शासन निर्देश के बाद APC पद की पात्रता संबंधी कौन-कौन से नए आदेश जारी हुए?दूसरा, क्या वर्तमान में सहायक शिक्षक और शिक्षक संवर्ग को APC पद पर प्रतिनियुक्त करने का स्पष्ट प्रावधान है?तीसरा, यदि प्रावधान है तो संबंधित शासन आदेश अथवा नियम सार्वजनिक किया जाए।चौथा, 8 सितंबर 2026 के दोनों आदेशों में संबंधित कर्मचारियों की पात्रता और चयन का आधार क्या रहा?पांचवां, क्या प्रदेश के अन्य जिलों में भी इसी मापदंड से APC पदों पर नियुक्तियां की गई हैं?छठा, क्या व्याख्याता अथवा अन्य पात्र वरिष्ठ संवर्ग के कर्मचारियों की उपलब्धता का परीक्षण किए बिना इन पदस्थापनाओं का निर्णय लिया गया?अब विभाग को देना होगा जवाबसहायक कार्यक्रम समन्वयक का पद समग्र शिक्षा की जिला स्तरीय कार्यप्रणाली से जुड़ा महत्वपूर्ण पद है। ऐसे पद पर नियुक्ति को लेकर यदि पुराने शासन निर्देश और वर्तमान पदस्थापना आदेशों में अंतर दिखाई देता है, तो उसका समाधान केवल मौखिक स्पष्टीकरण से नहीं बल्कि लागू नियम, शासन आदेश और पात्रता के स्पष्ट दस्तावेज से होना चाहिए।इसलिए सवाल अब यह नहीं है कि किसी कर्मचारी को पदस्थ किया गया या नहीं, बल्कि सवाल यह है कि जिस नियम के आधार पर पदस्थापना हुई, वह नियम सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है?शिक्षा विभाग और मुख्यमंत्री सचिवालय से अपेक्षा है कि पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करते हुए 2009 के शासन निर्देश तथा 2026 की पदस्थापनाओं के बीच नियमगत संबंध को सार्वजनिक करें, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सहायक कार्यक्रम समन्वयक पद पर हुई नियुक्तियां शासन के वर्तमान नियमों के अनुरूप हैं अथवा नहीं।




