
विकास नंद/ सर्वव्यापी

सरायपाली प्रशासन द्वारा सड़कों से आवारा मवेशियों को हटाने के लिए लगातार निर्देश और कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। जिले के विभिन्न मुख्य मार्गों सहित सरायपाली नगर के प्रमुख मार्गों पर आज भी मवेशियों का जमावड़ा आम बात बना हुआ है।
स्थिति यह है कि व्यस्त सड़कों और मुख्य चौक-चौराहों पर मवेशियों के बैठे रहने से यातायात प्रभावित हो रहा है और वाहन चालकों के सामने दुर्घटना का गंभीर खतरा बना हुआ है। खासकर रात्रि के समय सड़क पर बैठे मवेशी दिखाई नहीं देने के कारण हादसे की आशंका और अधिक बढ़ जाती है।
बताया जा रहा है कि सरायपाली नगर पालिका के मुख्य कार्यपालन अधिकारी द्वारा सड़कों पर मवेशियों को छोड़ने वाले पशु मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं। यहां तक कि आवश्यक होने पर संबंधित लोगों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कराने तक की बात कही गई है। इसके बावजूद सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा कम होने का नाम नहीं ले रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि प्रशासनिक निर्देश और कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नजर आ रही है। यदि सख्ती से अभियान चलाकर मवेशियों को सड़कों से हटाने और पशु मालिकों के खिलाफ जिम्मेदारी तय नहीं की गई तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।
सवाल यह है कि जब सड़कों पर मवेशियों के कारण दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है, तब प्रशासन के सख्त निर्देशों और कार्रवाई का असर आखिर जमीनी स्तर पर क्यों दिखाई नहीं दे रहा है?
आमजनता अब प्रशासन से केवल निर्देश और घोषणाओं के बजाय प्रभावी एवं स्थायी कार्रवाई की अपेक्षा कर रही है, ताकि सरायपाली सहित जिले के प्रमुख मार्गों को मवेशियों के जमावड़े से मुक्त कर आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।



