
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ में परिवहन आयुक्त की पदस्थापना को लेकर चर्चाओं का दौर तेज है, लेकिन सवाल अब भी वही है—आखिर सरकार इस महत्वपूर्ण पद पर अंतिम फैसला कब करेगी? परिवहन विभाग जैसे राजस्व, सड़क सुरक्षा, यात्री परिवहन और प्रवर्तन से सीधे जुड़े विभाग में शीर्ष प्रशासनिक जिम्मेदारी को लेकर चल रही अटकलों के बीच आधिकारिक आदेश का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है।छत्तीसगढ़ परिवहन विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्तमान में एस. प्रकाश (आईएएस) को सचिव एवं परिवहन आयुक्त के रूप में प्रदर्शित किया गया है। दूसरी ओर, 9 सितंबर को प्रकाशित एक रिपोर्ट में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ओम प्रकाश पाल और प्रशांत सिंह ठाकुर के नाम को परिवहन आयुक्त पद के लिए संभावित दावेदार के रूप में बताया गया था और अन्य अधिकारियों के नामों की चर्चा का भी उल्लेख किया गया था। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार अभी तक इस संबंध में अंतिम सरकारी पदस्थापना आदेश सार्वजनिक नहीं हुआ है।यही स्थिति अब सरकार के सामने कई सवाल खड़े कर रही है। यदि सरकार को परिवहन आयुक्त के पद पर बदलाव करना है तो निर्णय में इतनी देरी क्यों? और यदि बदलाव नहीं करना है तो पदस्थापना को लेकर चल रही चर्चाओं पर विराम लगाने के लिए सरकार स्पष्ट आदेश क्यों जारी नहीं करती?मामला केवल एक अधिकारी की पदस्थापना का नहीं है। परिवहन विभाग के सामने राजस्व संग्रह, अवैध परिवहन पर नियंत्रण, यात्री बसों की निगरानी, परमिट व्यवस्था, वाहन फिटनेस और सड़क सुरक्षा जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं। हाल ही में परिवहन विभाग की जांच में करीब 2 हजार यात्री बसों के बिना जीपीएस/वीएलटीडी संचालित होने का मामला सामने आया है, जिसके बाद विभाग ने नोटिस जारी किए और परमिट रद्द करने की चेतावनी दी।ऐसे समय में विभाग के शीर्ष पद पर स्पष्ट और स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। सरकार यदि किसी नए अधिकारी को जिम्मेदारी देने जा रही है तो उसे जल्द निर्णय लेकर आदेश सार्वजनिक करना चाहिए और यदि मौजूदा व्यवस्था ही जारी रखनी है तो उसकी भी स्पष्टता सामने आनी चाहिए।सवाल यह है कि परिवहन आयुक्त की कुर्सी पर फैसला आखिर कब होगा?क्या सरकार प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर निर्णय ले रही है या पदस्थापना को लेकर चल रही चर्चाओं ने फैसले को उलझा दिया है? आखिर इतने महत्वपूर्ण विभाग के शीर्ष पद को लेकर सरकार की चुप्पी कब टूटेगी?अब निगाहें मंत्रालय से निकलने वाले उस आदेश पर टिकी हैं, जो इन तमाम अटकलों पर विराम लगा सकता है। पदस्थापना की तारीख चाहे जो हो, लेकिन सवाल का जवाब सरकार को देना ही होगा—परिवहन आयुक्त की कुर्सी पर अंतिम फैसला कब?




