Newsछत्तीसगढ़महासमुंद

संवाद, संवेदनशीलता और सख्ती से सुशासन की पहचान बने कलेक्टर विनय कुमार लंगेह…जनहित, पारदर्शी प्रशासन और त्वरित निर्णय क्षमता से गढ़ रहे हैं सुशासन की नई कार्यसंस्कृति।

विकास नंद/ सर्वव्यापी

किसी भी जिले की पहचान केवल विकास कार्यों से नहीं, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच विश्वास, संवाद और संवेदनशीलता से भी बनती है। महासमुंद जिले में यह विश्वास लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है, जिसका बड़ा कारण कलेक्टर विनय कुमार लंगेह की कार्यशैली है। वे प्रशासनिक सख्ती और मानवीय संवेदनशीलता के संतुलन के साथ जिले में सुशासन की ऐसी कार्यसंस्कृति स्थापित कर रहे हैं, जिसकी चर्चा आम नागरिकों से लेकर जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों तक में हो रही है।

आकांक्षी जिला महासमुंद की जिम्मेदारी संभालने के बाद से कलेक्टर लंगेह ने स्पष्ट संदेश दिया कि प्रशासन का उद्देश्य केवल कार्यालयों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति तक शासन की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन के संकल्प को आधार बनाते हुए उन्होंने प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसहभागिता को प्राथमिकता दी है।

जनदर्शन बना भरोसे का मंच

कलेक्टर लंगेह की सबसे बड़ी विशेषता आम जनता से सीधा संवाद है। नियमित जनदर्शन के माध्यम से वे नागरिकों की समस्याओं को स्वयं सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों को समय-सीमा में समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश देते हैं। इससे लोगों में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा है और समस्याओं के त्वरित निराकरण की व्यवस्था मजबूत हुई है।

लापरवाही पर जीरो टॉलरेंस

कलेक्टर लंगेह ने प्रशासनिक व्यवस्था में अनुशासन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। शासकीय योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही, अनियमितता अथवा भ्रष्टाचार की शिकायत मिलने पर उन्होंने कई मामलों में सख्त कार्रवाई कर यह स्पष्ट किया है कि जनहित से समझौता किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा। यही कारण है कि जिले में जवाबदेह और परिणाम आधारित कार्यसंस्कृति विकसित हो रही है।

धरातल पर योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन

कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला एवं बाल विकास, जल संरक्षण, ग्रामीण विकास और सामाजिक सुरक्षा जैसी योजनाओं की नियमित समीक्षा कर कलेक्टर लंगेह यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि शासन की प्रत्येक योजना का लाभ वास्तविक पात्र हितग्राहियों तक पहुंचे। आकांक्षी जिला होने के कारण विकास के विभिन्न संकेतकों में सुधार लाने के लिए भी उन्होंने विभागीय समन्वय पर विशेष जोर दिया है।

जनप्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय

किसी भी जिले के विकास में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच समन्वय की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कलेक्टर लंगेह ने जनप्रतिनिधियों के सुझावों को महत्व देते हुए विकास कार्यों में सहभागिता का वातावरण तैयार किया है। इससे विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में गति और पारदर्शिता दोनों बढ़ी हैं।

प्रशासनिक यात्रा

वर्ष 2016 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी विनय कुमार लंगेह वर्तमान में महासमुंद जिले के 23वें कलेक्टर के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 15 अक्टूबर 2018 को सरायपाली के अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) के रूप में अपनी पहली फील्ड पोस्टिंग संभाली। इसके बाद उन्होंने गरियाबंद जिले में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) तथा कोरिया जिले के कलेक्टर के रूप में भी सफलतापूर्वक अपनी जिम्मेदारियां निभाईं। विभिन्न प्रशासनिक दायित्वों का अनुभव आज उनके निर्णयों और कार्यशैली में स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

सुशासन की मजबूत होती मिसाल

संवेदनशीलता, पारदर्शिता, अनुशासन, त्वरित निर्णय क्षमता और जनहित के प्रति प्रतिबद्धता ने कलेक्टर विनय कुमार लंगेह को महासमुंद में एक प्रभावी प्रशासक के रूप में स्थापित किया है। उनकी कार्यशैली प्रशासन और जनता के बीच भरोसे का मजबूत सेतु बन रही है। विकास कार्यों की निरंतर मॉनिटरिंग, योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जवाबदेह प्रशासन की दिशा में उनके प्रयास महासमुंद को सुशासन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की ओर अग्रसर हैं।

कहा जा सकता है कि संवाद, संवेदनशीलता और सख्ती के संतुलन के साथ कलेक्टर विनय कुमार लंगेह महासमुंद में ऐसी प्रशासनिक संस्कृति विकसित कर रहे हैं, जहां शासन का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उन्हें प्रभावी ढंग से जनता तक पहुंचाना है। यही दृष्टिकोण उन्हें जिले में सुशासन की नई पहचान के रूप में स्थापित कर रहा है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!