
विकास नंद/सर्वव्यापी

कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहकर परिवार की जिम्मेदारियां निभाने वाली ग्रामीण महिलाएं आज अपने हुनर, मेहनत और सामूहिक प्रयासों के दम पर आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। विकासखंड बसना के ग्राम भंवरपुर में गठित नया सवेरा महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने पारंपरिक कौशल को आजीविका का माध्यम बनाकर न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की, बल्कि स्थानीय बाजार से निकलकर राष्ट्रीय स्तर के सरस मेलों तक अपनी पहचान बनाई है।छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ‘बिहान’ के माध्यम से महिलाओं को संगठित कर आर्थिक गतिविधियों से जोड़ने और बाजार उपलब्ध कराने की पहल ने समूह की महिलाओं के लिए नए अवसर पैदा किए। महिलाओं ने अपने पारंपरिक कौशल का उपयोग करते हुए कोषा साड़ी, शॉल, दुपट्टा, गमछा सहित विभिन्न उत्पाद तैयार किए। उत्पादों की गुणवत्ता और आकर्षक स्वरूप ने ग्राहकों का ध्यान खींचा और धीरे-धीरे इन उत्पादों को बड़े बाजार तक पहुंचने का अवसर मिला।
चक्रिय निधि से मिली आर्थिक गतिविधियों को गति
बिहान के अंतर्गत गठित नया सवेरा महिला स्व सहायता समूह को जनपद पंचायत बसना के माध्यम से चक्रिय निधि का लाभ मिला। इस आर्थिक सहयोग से समूह की गतिविधियों को गति मिली। महिलाओं ने सामूहिक रूप से कार्ययोजना तैयार कर अपने पारंपरिक हुनर को व्यवस्थित व्यवसाय का रूप देना शुरू किया।बिहान के माध्यम से समूह का चिन्हांकन कर विभिन्न स्थानों पर आयोजित सरस मेलों में स्टॉल उपलब्ध कराया गया। इससे महिलाओं को अपने उत्पादों की प्रदर्शनी और सीधे ग्राहकों तक पहुंच बनाने का अवसर मिला।
भिलाई से दिल्ली और नोएडा तक पहुंचा हुनर
नया सवेरा समूह की महिलाओं ने भिलाई, रायपुर, दिल्ली, विशाखापट्टनम और नोएडा में आयोजित सरस मेलों में अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाई। इन मेलों में ग्राहकों ने समूह द्वारा तैयार कोषा साड़ी, शॉल, दुपट्टा, गमछा सहित अन्य उत्पादों को पसंद किया।समूह द्वारा विभिन्न सरस मेलों में किए गए विक्रय का आंकड़ा भी महिलाओं की सफलता को दर्शाता है। भिलाई में 1 लाख 25 हजार रुपये, रायपुर में 1 लाख 1 हजार रुपये, दिल्ली में 78 हजार रुपये, विशाखापट्टनम में 82 हजार 500 रुपये और नोएडा में 3 लाख 21 हजार रुपये के उत्पादों की बिक्री हुई। इस तरह पांचों सरस मेलों में समूह ने कुल 7 लाख 7 हजार 500 रुपये के उत्पादों का विक्रय किया।
बाजार मिला तो बढ़ा आत्मविश्वास
सरस मेलों में मिली सफलता से समूह की महिलाओं का उत्साह और आत्मविश्वास बढ़ा है। अब समूह स्थानीय बाजार में भी अपने उत्पादों का विक्रय कर रहा है। इससे महिलाओं को आय का निरंतर स्रोत मिल रहा है और वे अपने व्यवसाय को और विस्तार देने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।नया सवेरा महिला स्व सहायता समूह की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए इस बात की मिसाल बन रही है कि हुनर को यदि संगठन, आर्थिक सहयोग और बाजार का साथ मिल जाए तो गांव की महिलाएं भी बड़े बाजार में अपनी पहचान बना सकती हैं। सामूहिक प्रयासों से रोजगार और आय के अवसर बढ़ने के साथ महिलाओं में निर्णय लेने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने का आत्मविश्वास भी मजबूत हो रहा है।




