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हिंदी विश्वविद्यालय में शहीद बाजी राउत की विरासत पर हुआ राष्ट्रीय युवा सम्मेलन का,बाजी राउत का साहस और कर्तव्य-निष्ठा हर युवा के लिए प्रेरणा : कुलपति प्रो. कुमुद।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

महाराष्ट्र के महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा में शुक्रवार को “शहीद बाजी राउत की विरासत पर राष्ट्रीय युवा सम्मेलन : राष्ट्र-निर्माण हेतु युवा अभिप्रेरण” का उद्घाटन समारोह में कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. कुमुद शर्मा ने बाजी राउत के बलिदान का स्मरण किया। अक्तूबर 1938 में ढेंकानाल रियासत के प्रजामंडल आंदोलन के दौरान बारह वर्षीय बाजी राउत ब्राह्मणी नदी के घाट पर नाव की रखवाली कर रहे थे। उन्होंने रियासत की पुलिस को नाव देने से इनकार किया और गोली लगने से शहीद हुए। उनके साथ छह अन्य ग्रामीण भी शहीद हुए। कुलपति ने कहा कि यह कहानी मूलतः उसी सत्याग्रह की कहानी है जो गांधी जी ने देश को सिखाया था: बिना शस्त्र के, सत्य और न्याय के पक्ष में दृढ़ता से खड़े रहना। उन्होंने बताया कि 5 अक्तूबर 2026 को बाजी राउत के जन्म के सौ वर्ष पूरे हो रहे हैं।कुलपति ने विद्यार्थियों के सामने तीन बातें रखीं। पहली, साहस किसी भी आयु में और किसी भी व्यक्ति में जाग सकता है। दूसरी, सच्ची नागरिकता सौंपे गए दायित्व को ईमानदारी से निभाने में है। तीसरी, स्वतंत्रता संग्राम का इतिहास हज़ारों गाँवों, रियासतों और भाषाओं में फैला है, और उसे जोड़ना हिंदी विश्वविद्यालय का दायित्व है। उन्होंने शिक्षकों और शोधार्थियों से आग्रह किया कि इस शताब्दी वर्ष में स्थानीय स्मृतियों को खोजें, उनका अनुवाद करें और उन्हें हिंदी के माध्यम से व्यापक पाठक तक पहुँचाएँ। विद्यार्थियों से उन्होंने आग्रह किया कि वे अपने समय में सत्य और न्याय के पक्ष में दृढ़ता से खड़े हों और अपने दायित्वों को पूरी निष्ठा से निभाएँ। इसके साथ उन्होंने सम्मेलन के विश्वविद्यालय स्तरीय कार्यक्रमों का विधिवत उद्घाटन किया।समारोह में 150 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। यह सम्मेलन भारतीय ऐतिहासिक अनुसंधान परिषद (ICHR) एवं भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR) के तत्वावधान में ओडिशा अनुसंधान केंद्र (ORC) के सहयोग से आयोजित किया गया। उद्घाटन समारोह कस्तूरबा सभागार में हुआ।कार्यक्रम का आरंभ दीप-प्रज्वलन एवं कुलगीत से हुआ। नोडल अधिकारी डॉ. चंद्रशेखर पाण्डेय ने स्वागत वक्तव्य दिया और सम्मेलन की रूपरेखा प्रस्तुत की। विधि विद्यापीठ के अधिष्ठाता प्रो. जनार्दन तिवारी ने भी संबोधित किया।समारोह में सम्मेलन के आगामी कार्यक्रमों की घोषणा की गई। निबंध लेखन प्रतियोगिता की प्रविष्टियाँ 27 सितम्बर को दोपहर 12 बजे तक ऑनलाइन प्राप्त की जाएँगी। 28 सितम्बर को महादेवी वर्मा सभागार में कार्यशाला होगी, जिसके द्वितीय सत्र में प्रथम पाँच चयनित निबंधों की प्रस्तुति होगी। 29 सितम्बर को भाषण प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। सम्मेलन का समापन एवं पुरस्कार वितरण 2 अक्तूबर को होगा। श्रेष्ठ प्रविष्टियाँ राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाले राष्ट्रीय युवा सम्मेलन हेतु भेजी जाएँगी।समारोह में विभिन्न विभागों के शिक्षक, अधिकारी एवं शोधार्थी उपस्थित रहे। डॉ. योगेन्द्र बाबू ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

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