
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
बिलासपुर जिले के बिल्हा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत हरदीकला (टोना) के नए तालाब को वर्षों से जमी जलकुंभी से मुक्त कराने के लिए ग्रामीणों ने श्रमदान का अनुकरणीय अभियान शुरू किया है। लंबे समय से जलकुंभी की मोटी परत के कारण तालाब का प्राकृतिक स्वरूप पूरी तरह प्रभावित हो गया था। इससे न केवल जलस्रोत की उपयोगिता कम हो गई थी, बल्कि जल प्रदूषण, मच्छरों के प्रकोप और जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी संकट गहराता जा रहा था।गुरुवार को ग्रामवासियों ने सामूहिक श्रमदान कर तालाब से जलकुंभी निकालने की शुरुआत की।
इस अभियान में युवाओं, बुजुर्गों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब केवल जल संग्रहण का साधन नहीं, बल्कि गांव की सांस्कृतिक और सामाजिक पहचान का भी महत्वपूर्ण केंद्र है। इसलिए इसकी स्वच्छता और संरक्षण प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्षों से तालाब की नियमित सफाई नहीं होने के कारण जलकुंभी तेजी से फैल गई थी। इससे तालाब का अधिकांश हिस्सा ढक गया था, जिसके कारण पानी की गुणवत्ता लगातार खराब होती जा रही थी। जलकुंभी की वजह से पशुओं को पानी पिलाने, सिंचाई और अन्य घरेलू उपयोग में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था।श्रमदान अभियान के दौरान ग्रामीणों ने तालाब से बड़ी मात्रा में जलकुंभी निकालकर किनारे एकत्रित की।
अभियान में शामिल लोगों का कहना है कि यह कार्य एक-दो दिन में पूरा होने वाला नहीं है, बल्कि लगातार कई दिनों तक श्रमदान कर पूरे तालाब को जलकुंभी मुक्त बनाया जाएगा। इसके बाद तालाब के संरक्षण और नियमित साफ-सफाई की भी स्थायी व्यवस्था करने का संकल्प लिया गया है।
ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से भी मांग की है कि तालाबों के संरक्षण और समय-समय पर जलकुंभी हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए, ताकि जलस्रोतों का अस्तित्व सुरक्षित रह सके। उनका कहना है कि यदि समय रहते सफाई नहीं की गई तो जलकुंभी दोबारा तेजी से फैल सकती है।
गांव के लोगों ने इस पहल को “जल संरक्षण और जनभागीदारी” का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए अन्य ग्राम पंचायतों से भी अपने-अपने तालाबों की सफाई के लिए आगे आने की अपील की है। उनका मानना है कि सरकारी योजनाओं के साथ यदि जनसहभागिता जुड़ जाए तो जल संरक्षण के अभियान को नई गति मिल सकती है।
हरदीकला (टोना) में शुरू हुआ यह श्रमदान अभियान न केवल तालाब को पुनर्जीवित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, बल्कि यह संदेश भी दे रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। यदि इसी प्रकार सामूहिक प्रयास जारी रहे तो आने वाले समय में यह तालाब फिर से स्वच्छ, सुंदर और जल संरक्षण का सशक्त केंद्र बन सकता है।




