
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के गृह एवं पंचायत मंत्री तथा कवर्धा विधायक विजय शर्मा का जनता से सहज और शुद्ध छत्तीसगढ़ी भाषा में संवाद करना उन्हें प्रदेश की सियासत में एक अलग पहचान दिला रहा है। आम लोगों के बीच पहुंचकर अपनी माटी की बोली में बातचीत करने का उनका अंदाज न केवल आत्मीयता का भाव पैदा करता है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़कर ही जनप्रतिनिधि जनता के दिलों तक आसानी से पहुंच सकता है।विजय शर्मा जिस सहजता से छत्तीसगढ़ी में अपनी बात रखते हैं, उससे ग्रामीण अंचलों और आमजन के बीच अपनापन महसूस होता है। उनकी संवाद शैली में स्थानीय शब्दों, मुहावरों और छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक दिखाई देती है। यही वजह है कि उनकी यह शैली राजनीतिक संवाद से आगे बढ़कर मातृभाषा के सम्मान का विषय भी बनती जा रही है।आज आवश्यकता इस बात की है कि छत्तीसगढ़ के जनप्रतिनिधि, अधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता और आम नागरिक अपनी मातृभाषा छत्तीसगढ़ी के प्रति और अधिक सजग हों। अपनी भाषा बोलना केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि अपनी मिट्टी, अपनी संस्कृति, अपनी परंपरा और अपनी पहचान को सम्मान देना भी है।युवा मंत्री विजय शर्मा का छत्तीसगढ़ी भाषा में जनता से संवाद निश्चित रूप से एक सकारात्मक पहल के रूप में देखा जा सकता है। यदि प्रदेश के अन्य जनप्रतिनिधि भी सार्वजनिक जीवन में छत्तीसगढ़ी भाषा के प्रयोग को बढ़ावा दें, तो इससे हमारी मातृभाषा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण योगदान मिल सकता है।सियासत की भाषा चाहे जितनी बदल जाए, लेकिन जब जनप्रतिनिधि जनता से उसकी अपनी बोली में बात करता है, तो संवाद केवल शब्दों का नहीं रहता—वह सीधे दिल से दिल का रिश्ता बन जाता है।




