
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ भाजपा की प्रदेश प्रभारी एवं केंद्रीय महासचिव स्मृति ईरानी का दो दिवसीय छत्तीसगढ़ प्रवास संपन्न हो गया है। इस दौरान उन्होंने भाजपा संगठन के पदाधिकारियों, मंत्रियों, सांसदों-विधायकों तथा विभिन्न निगम, मंडल, आयोग, बोर्ड और अन्य संस्थाओं के पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर संगठनात्मक गतिविधियों और सरकार के कामकाज से जुड़े विषयों पर चर्चा की। इन बैठकों के संपन्न होने के बाद अब राजनीतिक गलियारों में इस बात को लेकर चर्चा महत्वपूर्ण हो गई है कि समीक्षा के दौरान सामने आए विषयों का धरातल पर कितना प्रभाव दिखाई देगा और संगठन तथा सरकार की कार्यप्रणाली में किस तरह के बदलाव देखने को मिलेंगे।सत्ता और संगठन के बीच बेहतर समन्वय किसी भी राजनीतिक दल के लिए महत्वपूर्ण होता है। छत्तीसगढ़ में भाजपा की सरकार होने के कारण संगठन की जिम्मेदारी केवल राजनीतिक गतिविधियों तक सीमित नहीं है, बल्कि सरकार की योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक पहुंचाने, कार्यकर्ताओं की समस्याओं को समझने तथा आम लोगों की अपेक्षाओं के अनुरूप काम करने की भी है। ऐसे में प्रदेश प्रभारी की समीक्षा बैठकों को संगठनात्मक जवाबदेही और सरकार के कामकाज के आकलन के नजरिये से देखा जा रहा है।बैठकों में प्रदेश संगठन से लेकर विभिन्न स्तरों के पदाधिकारियों तथा मंत्रियों और निगम-मंडल के जिम्मेदार लोगों की भागीदारी ने समीक्षा के दायरे को व्यापक बनाया। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संगठनात्मक गतिविधियों, जनसंपर्क, कार्यकर्ताओं की सक्रियता और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े विषयों पर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं। विशेषकर जिला और मंडल स्तर पर कार्यकर्ताओं की भूमिका, जनप्रतिनिधियों के साथ उनका समन्वय तथा स्थानीय समस्याओं के समाधान की गति जैसे विषय किसी भी समीक्षा की प्रभावशीलता को परखने के महत्वपूर्ण आधार हैं।समीक्षा के बाद सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। मंत्रियों से लेकर निगम, मंडल, आयोग और बोर्ड के पदाधिकारियों तक को सौंपी गई जिम्मेदारियों के परिणाम किस रूप में सामने आते हैं, इस पर राजनीतिक और संगठनात्मक हलकों की नजर रहेगी। जनता के बीच सरकार की छवि केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि योजनाओं के क्रियान्वयन, समस्याओं के समाधान और प्रशासनिक व्यवस्था के परिणामों से बनती है। इसी तरह संगठन की मजबूती का आकलन भी कार्यकर्ताओं की सक्रियता और जनता से उसके जुड़ाव के आधार पर किया जाता है।राजनीतिक दृष्टि से इन बैठकों को आगामी चुनौतियों के मद्देनजर संगठन की तैयारियों की समीक्षा के रूप में भी देखा जा सकता है। भाजपा के सामने सरकार के कामकाज को प्रभावी बनाए रखने के साथ संगठनात्मक गतिविधियों को लगातार सक्रिय रखने की जिम्मेदारी है। इसके लिए आवश्यक है कि बैठकों में हुई चर्चा केवल कागजों और निर्देशों तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित स्तरों पर उसकी नियमित समीक्षा और क्रियान्वयन भी सुनिश्चित हो।फिलहाल, स्मृति ईरानी का दो दिवसीय प्रवास और समीक्षा बैठकों का दौर संपन्न हो चुका है। अब असली परीक्षा बैठकों के बाद शुरू होती है। क्या संगठन और सरकार के बीच समन्वय और मजबूत होगा? क्या कार्यकर्ताओं की समस्याओं के समाधान में तेजी आएगी? क्या मंत्रियों तथा निगम-मंडल के पदाधिकारियों के कामकाज में जवाबदेही के ठोस परिणाम दिखाई देंगे? इन सवालों का जवाब आने वाले दिनों में सामने आने वाली कार्यप्रणाली से मिलेगा। अंततः किसी भी समीक्षा बैठक की सफलता का वास्तविक पैमाना उसमें हुई चर्चा नहीं, बल्कि उसके बाद जमीन पर दिखाई देने वाले परिणाम होते हैं।




