
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के समीप स्थित ग्राम पंचायत छतौना में इन दिनों बिजली की आंख-मिचौली ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। गांव में बिजली कब आएगी और कब चली जाएगी, इसका कोई भरोसा नहीं रह गया है। हालात यह हैं कि दिनभर में कम से कम 15 बार बिजली गुल होना अब ग्रामीणों के लिए आम बात बन गई है।बिजली की इस आंख-मिचौली ने ग्रामीणों की दिनचर्या को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। कभी कुछ मिनट के लिए बिजली जाती है तो कभी बार-बार आने-जाने का सिलसिला शुरू हो जाता है। इससे घरेलू कामकाज से लेकर बच्चों की पढ़ाई, दुकानदारों के व्यवसाय और अन्य जरूरी कार्य प्रभावित हो रहे हैं।ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग को बार-बार समस्या से अवगत कराया जा रहा है। लाइन में खराबी हो या तकनीकी समस्या, सुधार के नाम पर कर्मचारी आते हैं और मरम्मत भी करते हैं, लेकिन समस्या स्थायी रूप से दूर होने का नाम नहीं ले रही है। मरम्मत के बाद बिजली कुछ समय के लिए आती है और फिर दोबारा गुल—मानो बिजली विभाग और बिजली के बीच ‘आओ-जाओ’ का खेल चल रहा हो।ग्राम पंचायत की सरपंच राधिका राकेश कौशिक भी ग्रामीणों की इस समस्या को लेकर लगातार प्रयास कर रही हैं। बिजली व्यवस्था में सुधार कराने के लिए बार-बार संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से संपर्क किया जा रहा है, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद बिजली की आंख-मिचौली पर विराम नहीं लग पाया है।ग्रामीणों में अब सवाल उठने लगा है कि आखिर हर रोज मरम्मत के बावजूद बिजली व्यवस्था क्यों नहीं सुधर रही है? यदि तकनीकी खराबी बार-बार सामने आ रही है तो उसका स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा? आखिर विभाग कब ऐसी व्यवस्था बनाएगा कि बिजली कम से कम दिन में 15 बार आने-जाने के बजाय निर्बाध रूप से उपलब्ध हो सके?‘बिजली आई तो समझो मेहमान आई, गई तो पता नहीं कब लौटेगी!’छतौना में बिजली की स्थिति को लेकर ग्रामीण अब व्यंग्य करते हुए कहने लगे हैं कि बिजली अब सुविधा नहीं, बल्कि मेहमान बन गई है—जब मन हुआ आई और जब मन हुआ चली गई। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली विभाग यदि इसी तरह आंख-मिचौली का खेल जारी रखता है तो आने वाले दिनों में गांव में बिजली के आने-जाने का बाकायदा समय-सारिणी जारी करनी पड़ेगी।ग्रामीणों ने विद्युत विभाग के उच्च अधिकारियों से मांग की है कि छतौना की बिजली व्यवस्था की स्थायी तकनीकी जांच कराकर बार-बार होने वाली बिजली कटौती का समाधान किया जाए, ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।अब देखना यह है कि छतौना की बिजली कब तक आंख-मिचौली खेलती रहेगी और विभाग कब इस तमाशे का स्थायी पटाक्षेप करेगा।




