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प्रकृति की रक्षा का संकल्प, कर्तव्य के प्रति समर्पण का उदाहरण… सुबह 10 बजे से रात 9 बजे तक मैदान में सक्रिय नजर आते हैं डीएफओ ग्रीष्मी।

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री स्वर्गीय अजीत जोगी के गृह जिला गौरेला-पेंड्रा-मरवाही का मरवाही वनमंडल इन दिनों अपने प्रशासनिक कार्यों और वन संरक्षण गतिविधियों को लेकर चर्चा में है। इसकी एक प्रमुख वजह वनमंडल के आईएफएस अधिकारी डीएफओ ग्रीष्मी चांद की कार्यशैली बताई जा रही है।

विभागीय सूत्रों और स्थानीय लोगों के अनुसार वे प्रायः सुबह लगभग 10 बजे से लेकर रात 9 बजे तक शासकीय दायित्वों के निर्वहन में सक्रिय दिखाई देते हैं।बताया जाता है कि वनमंडल के विभिन्न परिक्षेत्रों का नियमित निरीक्षण, पौधरोपण कार्यों की समीक्षा, वन एवं वन्यजीव संरक्षण, विभागीय योजनाओं की प्रगति का आकलन तथा मैदानी कर्मचारियों के साथ लगातार संवाद उनकी कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है। यही कारण है कि अधिकांश समय वे कार्यालय की अपेक्षा मैदानी क्षेत्रों में अधिक सक्रिय नजर आते हैं।

वन विभाग से जुड़े लोगों का कहना है कि मरवाही वनमंडल का भौगोलिक क्षेत्र काफी विस्तृत और चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में प्रत्येक कार्य की मौके पर जाकर समीक्षा करना आसान नहीं होता, लेकिन वन मंडलाधिकारी आईएफएस अफसर ग्रीष्मी चांद लगातार क्षेत्र का भ्रमण कर व्यवस्थाओं पर नजर बनाए रखते हैं। कई बार देर शाम और रात्रि तक भी वे विभागीय बैठकों, निरीक्षणों और आवश्यक प्रशासनिक कार्यों में व्यस्त दिखाई देते हैं।

स्थानीय लोगों का मानना है कि किसी भी अधिकारी की कार्यशैली का सबसे बड़ा प्रभाव विभागीय व्यवस्था और कर्मचारियों की जवाबदेही पर पड़ता है। नियमित निरीक्षण और सतत निगरानी से कर्मचारियों में भी कार्य के प्रति गंभीरता बढ़ती है तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में गति आती है।

वन संरक्षण के क्षेत्र में मरवाही वनमंडल का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि यह समृद्ध जैव विविधता, घने जंगलों और वन्यजीवों के लिए जाना जाता है। ऐसे संवेदनशील वन क्षेत्र में अधिकारियों की सक्रियता को पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है।

हालांकि किसी भी अधिकारी के कार्य का अंतिम मूल्यांकन विभागीय उपलब्धियों, शासन के निर्धारित मानकों तथा दीर्घकालिक परिणामों के आधार पर ही किया जाता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर यह चर्चा जरूर है कि मरवाही वनमंडल के आईएफएस अधिकारी डीएफओ ग्रीष्मी चांद लंबे समय तक मैदानी क्षेत्रों में रहकर अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन करते हुए दिखाई देते हैं। विभागीय हलकों में इसे कर्तव्यनिष्ठा और कार्य के प्रति समर्पण के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

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