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धान खरीदी को लेकर सरकार की तैयारी के बीच सरायपाली में पिछले दो खरीफ सीजन के मामलों ने उठाए गंभीर सवाल, भ्रष्टाचार पर समिति प्रबंधकों पर कार्रवाई, प्राधिकृत अध्यक्षों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाने की शासन से मांग।

विकास नंद/सर्वव्यापी

समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने से पहले ही सरायपाली विकासखंड में पिछले दो खरीफ विपणन वर्षों के दौरान सामने आई अनियमितताओं को लेकर व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल उठने लगे हैं। सवाल यह है कि यदि धान उपार्जन केंद्रों में बड़ी वित्तीय अनियमितताएं सामने आती हैं और समिति प्रबंधकों अथवा खरीदी प्रभारियों पर कार्रवाई होती है, तो संबंधित समितियों के अध्यक्षों की जवाबदेही किस स्तर तक तय होती है?वर्ष 2024-25 और 2025-26 में सरायपाली क्षेत्र के विभिन्न धान उपार्जन केंद्रों में कमी, शॉर्टेज और अनियमितताओं के मामले सामने आए। केना धान उपार्जन केंद्र के मामले में जांच के बाद करीब 4.50 करोड़ रुपये मूल्य के धान एवं बारदाने की अनियमितता का उल्लेख सामने आया और केंद्र प्रभारी सहित संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर की कार्रवाई हुई।

इसी तरह वर्ष 2025-26 में केना केंद्र के भौतिक सत्यापन से जुड़ी एक अन्य कार्रवाई में भी अनियमितता सामने आने और एफआईआर दर्ज किए जाने की जानकारी सामने आई। सुखीपाली में भी निरीक्षण के बाद प्रभारी समिति प्रबंधक एवं धान खरीदी प्रभारी को निलंबित किए जाने की कार्रवाई हुई थी।

ऐसे मामलों के बीच अब सबसे बड़ा सवाल समिति अध्यक्षों की जवाबदेही को लेकर उठ रहा है। यदि समिति का संचालन अध्यक्ष, प्राधिकृत अधिकारी और समिति प्रबंधक की निर्धारित व्यवस्था के तहत होता है, तो केवल कर्मचारियों पर कार्रवाई कर क्या पूरी जवाबदेही तय हो जाती है? क्या संबंधित समिति अध्यक्षों से भी यह पूछा गया कि उनके कार्यकाल में खरीदी केंद्रों पर स्टॉक, बारदाना, ऑनलाइन प्रविष्टि, परिवहन और दस्तावेजों की निगरानी किस तरह की गई?

खुद धान उपार्जन नीति में समिति के अध्यक्ष/प्राधिकृत अधिकारी एवं समिति प्रबंधक को निर्धारित गुणवत्ता के धान की खरीदी तथा संबंधित अभिलेखों के समुचित रख-रखाव के लिए प्रशिक्षण दिए जाने का प्रावधान है। वहीं ऑनलाइन खरीदी केंद्रों का डेटा नियमित रूप से अपडेट करने की जिम्मेदारी भी संबंधित अधिकारियों के स्तर पर निर्धारित की गई है।ऐसे में इस बार धान खरीदी व्यवस्था शुरू होने से पहले प्रशासन के सामने यह स्पष्ट करना जरूरी होगा कि पिछली अनियमितताओं से क्या सबक लिया गया है और जिम्मेदारी किसकी तय होगी? क्या जिन समितियों में पिछले वर्षों में गंभीर कमियां सामने आईं, वहां केवल समिति प्रबंधक बदलना ही पर्याप्त माना जाएगा या समिति के संचालन और निगरानी की जिम्मेदारी निभाने वाले पदाधिकारियों की भूमिका की भी समीक्षा होगी?

करोड़ों की कमी के मामलों के बाद भी जवाबदेही का सवाल कायम

महासमुंद जिले में वर्ष 2024-25 के दौरान 182 धान उपार्जन केंद्रों के भौतिक सत्यापन में कई केंद्रों पर शॉर्टेज सामने आने की जानकारी विधानसभा के दस्तावेजों में भी दर्ज है। वर्ष 2025-26 में भी जिले में धान की बड़ी मात्रा के ऑनलाइन स्टॉक और वास्तविक उपलब्धता के बीच अंतर को लेकर रिपोर्ट सामने आई है।

ऐसे में अब किसानों और आम लोगों की नजर इस बात पर है कि आगामी धान खरीदी में सिर्फ निरीक्षण और कार्रवाई की खानापूर्ति होगी या जिम्मेदारी की पूरी श्रृंखला तय की जाएगी।सरकार की छवि से जुड़ा सवालधान खरीदी सरकार की सबसे महत्वपूर्ण किसान-केंद्रित व्यवस्थाओं में शामिल है। ऐसे में यदि किसी केंद्र पर अनियमितता होती है तो उसका असर केवल सरकारी धन पर नहीं, बल्कि किसानों के भरोसे और शासन की छवि पर भी पड़ता है। इसलिए यह जांच का विषय होना चाहिए कि जहां गंभीर अनियमितताएं सामने आईं, वहां संबंधित समिति अध्यक्षों की भूमिका क्या रही, उन्होंने कौन-कौन सी निगरानी की और उन्हें समय रहते गड़बड़ियों की जानकारी क्यों नहीं हुई।

अब सवाल सीधा है—

समिति प्रबंधकों पर कार्रवाई के बाद क्या जिम्मेदारी की अगली कड़ी समिति अध्यक्षों तक पहुंचेगी? यदि अध्यक्षों की कोई जवाबदेही नहीं है तो शासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि उन्हें समितियों में किस उद्देश्य से प्राधिकृत किया गया है। और यदि जवाबदेही है, तो पिछले वर्षों में सामने आए मामलों में उनकी भूमिका की समीक्षा और कार्रवाई कब होगी?आगामी धान खरीदी में पारदर्शिता के लिए स्टॉक का भौतिक सत्यापन, ऑनलाइन रिकॉर्ड का मिलान, परिवहन की निगरानी और समिति स्तर पर जिम्मेदारी तय करना जरूरी है। यही तय करेगा कि इस बार धान खरीदी व्यवस्था केवल कागजों में पारदर्शी रहती है या जमीन पर भी।

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