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धमकी पर पुलिस तत्काल सक्रिय, महिला कानून की धज्जियां उड़ाने पर कार्रवाई क्यों नहीं? कानून सबके लिए समान है तो कार्रवाई में यह दोहरा मापदंड क्यों?

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर एक गंभीर सवाल लगातार सामने आ रहा है—यदि किसी व्यक्ति द्वारा धमकी दिए जाने की शिकायत मिलते ही पुलिस तत्काल हरकत में आ सकती है, तो महिला सुरक्षा और महिलाओं से जुड़े कानूनों के कथित उल्लंघन की शिकायतों पर उसी तत्परता से कार्रवाई क्यों नहीं होती?महिला संरक्षण के लिए देश में कई सख्त कानूनी प्रावधान मौजूद हैं। इन कानूनों का उद्देश्य महिलाओं को सुरक्षा, सम्मान और न्याय दिलाना है। लेकिन जब इन्हीं कानूनों के दुरुपयोग अथवा उल्लंघन की शिकायतें सामने आती हैं, तब पुलिस की भूमिका और कार्रवाई की गति पर सवाल उठना स्वाभाविक है।सवाल किसी महिला के अधिकारों को कम करने का नहीं, बल्कि कानून के समान अनुपालन का है। यदि कानून का उल्लंघन करने वाला कोई पुरुष हो या महिला, कार्रवाई शिकायतकर्ता की पहचान अथवा सामाजिक प्रभाव देखकर नहीं, बल्कि उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों और कानून के आधार पर होनी चाहिए।अक्सर देखा जाता है कि धमकी, विवाद या शिकायत के मामलों में पुलिस तत्काल संबंधित पक्षों को बुलाकर पूछताछ शुरू कर देती है। वहीं दूसरी ओर, गंभीर आरोपों अथवा महिला कानूनों के कथित उल्लंघन की शिकायतों में कार्रवाई लंबित रहने से शिकायतकर्ता के मन में यह सवाल पैदा होता है कि क्या कानून का पालन कराने की प्रक्रिया सभी के लिए एक जैसी है?पुलिस की जिम्मेदारी केवल शिकायत दर्ज करना नहीं, बल्कि प्रत्येक शिकायत की निष्पक्ष जांच करना भी है। यदि शिकायत झूठी है तो जांच के बाद उसे स्पष्ट किया जाना चाहिए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी के खिलाफ कानून के अनुरूप कार्रवाई होनी चाहिए। यही न्याय व्यवस्था में जनता का विश्वास मजबूत करता है।महिला कानूनों की आवश्यकता और उनकी उपयोगिता पर कोई सवाल नहीं है। लेकिन किसी भी कानून की ताकत उसके निष्पक्ष और पारदर्शी इस्तेमाल में होती है। कानून किसी के खिलाफ हथियार और किसी के लिए सुरक्षा कवच न बने, बल्कि वास्तविक पीड़ित को न्याय और निर्दोष को संरक्षण मिले—यही कानून के शासन की मूल भावना है।अब सवाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से है कि क्या धमकी की शिकायत पर तत्काल सक्रिय होने वाली पुलिस महिला कानूनों के कथित उल्लंघन की शिकायतों पर भी उसी गंभीरता और तत्परता से जांच करेगी? यदि नहीं, तो इसकी वजह क्या है?जनता को जवाब चाहिए—कानून सबके लिए समान है, तो कार्रवाई की गति और सख्ती में अंतर क्यों?

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