तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी


स्कूल शिक्षा विभाग में स्थानांतरण को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने विभागीय प्रक्रिया और प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासकीय प्राथमिक शाला मुंडा, जिला बलौदाबाजार-भाटापारा में पदस्थ प्रधान पाठक गायत्री देवी जायसवाल का स्थानांतरण एक ही प्रक्रिया में दो अलग-अलग जिलों के जिला शिक्षा अधिकारी के विकल्प पर किए जाने का मामला सामने आया है। पहले उनका स्थानांतरण जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर के विकल्प पर किया गया, जबकि बाद में इसी नाम से जारी आदेश में जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद के विकल्प पर स्थानांतरण कर दिया गया।सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि एक ही कर्मचारी के स्थानांतरण को लेकर विभागीय स्तर पर दो अलग-अलग विकल्प कैसे सामने आए और आखिर प्रभावी आदेश कौन-सा माना जाए? मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि दोनों आदेश स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय स्तर से जारी हुए हैं।प्राप्त जानकारी के अनुसार, स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय के अवर सचिव आर.पी. वर्मा के हस्ताक्षर से स्थानांतरण संबंधी आदेश जारी किए गए हैं। इन आदेशों में प्रधान पाठक गायत्री देवी जायसवाल का नाम शामिल है। पहले आदेश में उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी रायपुर के विकल्प पर स्थानांतरित किया गया, लेकिन बाद में इसी स्थानांतरण को जिला शिक्षा अधिकारी महासमुंद के विकल्प पर किए जाने का आदेश सामने आया।एक नाम, दो आदेश और दो अलग-अलग विकल्पस्थानांतरण जैसे संवेदनशील प्रशासनिक मामलों में आदेश की स्पष्टता बेहद महत्वपूर्ण होती है। किसी कर्मचारी के लिए एक स्थानांतरण आदेश जारी होने के बाद यदि उसी कर्मचारी के संबंध में दूसरा आदेश जारी किया जाता है, तो सामान्य तौर पर यह स्पष्ट होना चाहिए कि पूर्व आदेश निरस्त किया गया है अथवा संशोधित किया गया है। लेकिन इस मामले में सामने आए दोनों आदेशों ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।यदि पहला आदेश प्रभावी था तो फिर उसी कर्मचारी के लिए बाद में दूसरा विकल्प क्यों निर्धारित किया गया? और यदि दूसरा आदेश संशोधित आदेश है, तो क्या उसमें पहले आदेश का स्पष्ट उल्लेख करते हुए उसे निरस्त या संशोधित किया गया है? यही वे सवाल हैं जिनका जवाब विभागीय स्तर पर दिया जाना जरूरी है।क्या स्थानांतरण प्रक्रिया में हुई प्रशासनिक चूक?मामले को लेकर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या यह महज विभागीय स्तर पर हुई टंकण अथवा प्रशासनिक त्रुटि है या इसके पीछे कोई अन्य कारण है। यदि यह त्रुटि है तो इतने महत्वपूर्ण स्थानांतरण आदेश में ऐसी गलती कैसे हुई? वहीं यदि बाद का आदेश पहले आदेश में संशोधन के रूप में जारी किया गया है, तो इसकी स्थिति स्पष्ट रूप से आदेश में दर्ज क्यों नहीं की गई?शिक्षा विभाग में पदस्थापना और स्थानांतरण को लेकर पहले से ही पारदर्शिता और स्पष्ट प्रक्रिया की अपेक्षा की जाती रही है। ऐसे में एक ही प्रधान पाठक के लिए अलग-अलग जिला शिक्षा अधिकारियों के विकल्प पर आदेश सामने आना विभागीय कार्यप्रणाली पर स्वाभाविक रूप से सवाल खड़े करता है।कौन-सा आदेश माना जाए प्रभावी?इस पूरे मामले में सबसे बड़ा प्रशासनिक प्रश्न यही है कि गायत्री देवी जायसवाल का स्थानांतरण आखिर रायपुर हुआ है या महासमुंद?यदि दोनों आदेश विभागीय रिकॉर्ड में मौजूद हैं, तो संबंधित अधिकारी और कर्मचारी के लिए भी असमंजस की स्थिति उत्पन्न होना स्वाभाविक है। ऐसी स्थिति में विभाग को स्पष्ट करना होगा कि अंतिम एवं प्रभावी आदेश कौन-सा है और पहले जारी आदेश की प्रशासनिक स्थिति क्या है।मंत्रालय से जारी आदेश होने के कारण मामला गंभीरयह मामला किसी स्थानीय कार्यालय के स्तर पर जारी आदेश तक सीमित नहीं है। स्थानांतरण आदेश स्कूल शिक्षा विभाग मंत्रालय के अवर सचिव आर.पी. वर्मा के हस्ताक्षर से जारी किए गए हैं। इसलिए इस प्रकरण में विभागीय स्तर पर दस्तावेजों की जांच और आदेशों की वैधता एवं क्रम की स्पष्टता जरूरी हो जाती है।यदि यह महज लिपिकीय अथवा तकनीकी त्रुटि है तो विभाग को तत्काल संशोधित आदेश जारी कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि संबंधित कर्मचारी और संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी दोनों के स्तर पर भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके। वहीं यदि दोनों आदेश किसी अलग प्रशासनिक निर्णय के तहत जारी किए गए हैं, तो उसके कारणों को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए।स्थानांतरण नीति की पारदर्शिता पर भी सवालस्थानांतरण को लेकर शासन द्वारा नियम और प्रक्रिया निर्धारित की जाती है। ऐसे में सवाल यह भी है कि क्या स्थानांतरण आदेश जारी करने से पहले संबंधित कर्मचारी के नाम, पदस्थापन स्थल और स्थानांतरण के विकल्पों का पर्याप्त सत्यापन किया गया था?एक ही प्रधान पाठक का नाम पहले रायपुर और फिर महासमुंद के विकल्प पर सामने आना केवल एक कर्मचारी के स्थानांतरण का मामला नहीं रह जाता, बल्कि यह स्थानांतरण आदेश तैयार करने, परीक्षण करने और जारी करने की पूरी प्रशासनिक प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है।अब देखना होगा कि स्कूल शिक्षा विभाग इस मामले में क्या स्पष्टीकरण देता है और क्या दोनों आदेशों की स्थिति स्पष्ट करते हुए संशोधित आदेश जारी किया जाता है। फिलहाल, गायत्री देवी जायसवाल का दो अलग-अलग जिला शिक्षा अधिकारियों के विकल्प पर स्थानांतरण विभागीय गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है।सवाल सीधा है—एक ही प्रधान पाठक का स्थानांतरण आखिर रायपुर हुआ है या महासमुंद? और यदि आदेश में बदलाव हुआ है, तो पहले आदेश की स्थिति क्या है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब अब स्कूल शिक्षा विभाग से अपेक्षित है।




