
तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी
छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी सोनमणि बोरा को नगरीय निकाय प्रशासन एवं विकास विभाग का प्रमुख सचिव बनाए जाने के बाद बिलासपुर में विकास और नगरीय व्यवस्था को लेकर नई उम्मीदें जगी हैं। बिलासपुर उनके लिए केवल प्रदेश का एक प्रमुख शहर नहीं, बल्कि कर्मस्थल भी रहा है। ऐसे में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की जिम्मेदारी मिलने के बाद शहरवासियों की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि बिलासपुर की लंबे समय से चली आ रही नगरीय समस्याओं का समाधान कितनी तेजी से होता है।
बिलासपुर प्रदेश के प्रमुख शहरों में शामिल है, लेकिन बढ़ती आबादी और लगातार फैलते शहरी क्षेत्र के साथ नगरीय सुविधाओं पर दबाव भी लगातार बढ़ा है। शहर की सड़कों की स्थिति, नालियों और जल निकासी की समस्या, सफाई व्यवस्था, यातायात का दबाव, अतिक्रमण, स्ट्रीट लाइट, पेयजल आपूर्ति और अधोसंरचना से जुड़े कई मुद्दे समय-समय पर चर्चा में आते रहे हैं। शहरवासियों का मानना है कि अब विभाग के शीर्ष स्तर पर अनुभवी अधिकारी के आने से इन समस्याओं को प्राथमिकता के साथ देखने का अवसर मिल सकता है।
कर्मस्थल से विभागीय जिम्मेदारी तक का सफर
सोनमणि बोरा का बिलासपुर से जुड़ाव प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा है। यही वजह है कि उन्हें नगरीय निकाय प्रशासन एवं विकास विभाग की जिम्मेदारी मिलने को बिलासपुर के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रशासनिक अनुभव रखने वाले अधिकारी के रूप में उनसे अपेक्षा की जा रही है कि वे प्रदेश के नगरीय निकायों की समस्याओं के साथ-साथ बिलासपुर की जमीनी परिस्थितियों को भी बेहतर ढंग से समझते हुए योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन पर विशेष ध्यान देंगे।
बिलासपुर में विकास योजनाओं के लिए करोड़ों रुपये की राशि स्वीकृत होने के बावजूद कई बार योजनाओं के क्रियान्वयन, गुणवत्ता, समय-सीमा और रखरखाव को लेकर सवाल उठते रहे हैं। शहरवासियों की अपेक्षा है कि अब केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि उनके धरातल पर परिणाम दिखाई दें।
सड़कों से लेकर सफाई तक, कई मोर्चों पर चुनौती
बिलासपुर की सबसे बड़ी चुनौतियों में सड़कों की स्थिति और यातायात व्यवस्था को माना जाता है। अनेक इलाकों में सड़क निर्माण, मरम्मत और जल निकासी के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत महसूस की जाती है। बारिश के दौरान जलभराव की समस्या कई क्षेत्रों में नागरिकों के लिए परेशानी का कारण बनती है। नालियों की नियमित सफाई और बरसाती पानी की निकासी की व्यवस्था को मजबूत करना भी नगर प्रशासन के सामने महत्वपूर्ण चुनौती है।इसी तरह शहर की सफाई व्यवस्था को लेकर भी नागरिक लगातार बेहतर व्यवस्था की अपेक्षा करते हैं। शहर का विस्तार होने के साथ कचरा प्रबंधन, डोर-टू-डोर कलेक्शन, सार्वजनिक स्थानों की सफाई और निस्तारण व्यवस्था को वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
अधूरे और धीमे विकास कार्यों पर भी नजर जरूरी
बिलासपुर में विभिन्न विभागों और नगरीय निकाय से जुड़े अनेक विकास कार्य लंबे समय से चर्चा में रहे हैं। कहीं काम की गति धीमी है तो कहीं निर्माण के बाद रखरखाव का अभाव दिखाई देता है। नागरिकों की अपेक्षा है कि प्रमुख सचिव के स्तर से योजनाओं की नियमित समीक्षा के साथ यह भी देखा जाए कि स्वीकृत राशि का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के लिए हुआ या नहीं।सिर्फ फाइलों में प्रगति और बैठकों में समीक्षा से शहर की तस्वीर नहीं बदल सकती। जरूरत इस बात की है कि योजनाओं की वास्तविक प्रगति का भौतिक सत्यापन हो और जिम्मेदारी तय की जाए।
बिलासपुर को मिल सकता है अनुभव का लाभ
सोनमणि बोरा को विभाग की जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है जब प्रदेश के नगरीय निकायों में विकास और प्रशासनिक सुधार की बड़ी जरूरत है। बिलासपुर से उनका पूर्व परिचय इस शहर के लिए अतिरिक्त लाभ साबित हो सकता है। शहर की भौगोलिक स्थिति, प्रमुख समस्याओं और प्रशासनिक तंत्र की कार्यप्रणाली से परिचित होने के कारण स्थानीय समस्याओं को समझने में उन्हें अपेक्षाकृत आसानी हो सकती है।
हालांकि शहरवासियों की अपेक्षाएं बड़ी हैं और अब इन अपेक्षाओं को परिणाम में बदलने की चुनौती भी उतनी ही बड़ी है।
जनता चाहती है परिणाम, केवल घोषणाएं नहीं
बिलासपुर के नागरिकों की मूल अपेक्षा साफ है—शहर को योजनाओं और घोषणाओं से आगे बढ़ाकर जमीन पर बेहतर सुविधाएं मिलें। सड़कें समय पर बनें और टिकाऊ हों, नालियां साफ रहें, जलभराव की समस्या कम हो, कचरा प्रबंधन प्रभावी हो, स्ट्रीट लाइट व्यवस्था सुधरे, सार्वजनिक सुविधाओं का विस्तार हो और विकास कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित हो।साथ ही नगरीय निकायों में पारदर्शिता और जवाबदेही भी जरूरी है। विकास कार्यों की निविदा से लेकर भुगतान तक पूरी प्रक्रिया में निगरानी मजबूत हो तो भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की संभावनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है।
अब नजर प्रमुख सचिव के अगले कदम परसोनमणि बोरा के प्रमुख सचिव बनने के बाद बिलासपुर को लेकर उम्मीद इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि यह उनके लिए परिचित शहर है। अब देखना होगा कि विभागीय जिम्मेदारी संभालने के बाद वे बिलासपुर सहित प्रदेश के नगरीय निकायों की समस्याओं के समाधान के लिए किस तरह की कार्ययोजना बनाते हैं।
कर्मभूमि बिलासपुर अब अपने ही प्रशासनिक अनुभव वाले अधिकारी से उम्मीद लगाए बैठा है। सवाल सिर्फ इतना है कि क्या यह नई जिम्मेदारी शहर की पुरानी बदहाली को नई दिशा दे पाएगी? आने वाले समय में इसका जवाब विकास कार्यों की रफ्तार, शहर की साफ-सफाई, सड़कों की गुणवत्ता और नागरिक सुविधाओं में दिखाई देने वाले बदलाव से मिलेगा।




