NewsGPMछत्तीसगढ़

कलेक्टर विजय का वन विभाग पर बढ़ता फोकस, क्या भ्रष्टाचार के मामलों में राज्य सरकार को भेजी जाएगी सख्त अनुशंसा?

तरुण कौशिक, संपादक सर्वव्यापी

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में प्रशासनिक गतिविधियों के बीच इन दिनों एक महत्वपूर्ण चर्चा यह भी है कि कलेक्टर विजय दयाराम के. द्वारा वन विभाग को प्रोटोकॉल के अनुरूप विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। विभिन्न शासकीय बैठकों, विकास कार्यों और विभागीय समन्वय में वन विभाग की सक्रिय भागीदारी देखने को मिल रही है। इसी क्रम में वर्ष 2020 बैच की भारतीय वन सेवा अधिकारी एवं मरवाही वनमंडल की वनमंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद की प्रशासनिक सक्रियता भी चर्चा का विषय बनी हुई है।

प्रशासनिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या जिले में वन विभाग से जुड़े लंबे समय से उठते रहे वित्तीय अनियमितताओं एवं भ्रष्टाचार संबंधी आरोपों की निष्पक्ष समीक्षा कर कलेक्टर विजय दयाराम के. राज्य शासन को आवश्यक कार्रवाई की अनुशंसा करेंगे। हालांकि इस संबंध में अभी तक कलेक्टर कार्यालय अथवा राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय या घोषणा सामने नहीं आई है।

जिले में समय-समय पर वन विभाग की विभिन्न योजनाओं, पौधरोपण,कैम्पा, खाद्य,गोबर खरीदी, निर्माण कार्यों, सामग्री क्रय तथा अन्य विकास कार्यों को लेकर प्रश्न उठते रहे हैं। कई मामलों में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और नागरिकों ने जांच की मांग भी की है। ऐसे में लोगों की निगाहें अब नए कलेक्टर के प्रशासनिक रुख पर टिकी हुई हैं।

प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी विभाग में वित्तीय या प्रशासनिक अनियमितताओं की शिकायतें प्राप्त होती हैं, तो जिला प्रशासन तथ्यों के आधार पर जांच कर संबंधित प्रतिवेदन राज्य शासन को भेज सकता है।

अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी और राज्य सरकार के स्तर पर लिया जाता है।मरवाही वनमंडल की वनमंडलाधिकारी ग्रीष्मी चांद को एक सक्रिय और मैदानी अधिकारी के रूप में भी देखा जाता है।

विभागीय कार्यों की नियमित निगरानी, पौधरोपण, वन संरक्षण तथा शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी भूमिका लगातार सामने आती रही है। ऐसे में यह भी अपेक्षा की जा रही है कि यदि विभाग में किसी स्तर पर अनियमितताओं की शिकायतें हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच हो तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।जिले के नागरिकों का मानना है कि पारदर्शिता और जवाबदेही ही सुशासन की पहचान है।

यदि किसी विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगते हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है, वहीं यदि आरोप निराधार हों तो संबंधित अधिकारियों को भी स्पष्ट रूप से क्लीन चिट मिलनी चाहिए। इससे प्रशासन पर जनता का विश्वास और मजबूत होता है।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है कि क्या कलेक्टर विजय दयाराम के.जिले में प्राप्त शिकायतों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर वन विभाग से जुड़े मामलों की व्यापक समीक्षा कर राज्य सरकार को किसी प्रकार की अनुशंसा करेंगे, या फिर वर्तमान व्यवस्था पूर्ववत चलती रहेगी। इसका उत्तर आने वाले समय में प्रशासनिक निर्णयों से स्पष्ट होगा।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!